अगर आपने अपनी पुरानी कार बच दी है तो सिर्फ RC और दूसरे कागजात नए मालिक के नाम ट्रांसफर करना ही काफी नहीं है. एक छोटा लेकिन बेहद जरूरी काम और करना चाहिए, जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं. यह काम है FASTag को डिएक्टिवेट कराना. अगर कार बेचने के बाद भी आपका पुराना FASTag एक्टिव रहा, तो नई कार का मालिक जब उस गाड़ी को टोल प्लाजा से लेकर गुजरेगा, तो टोल का पैसा आपके FASTag अकाउंट से कट सकता है. कई बार लोगों को इसकी जानकारी महीनों बाद मिलती है.
FASTag को बंद करना क्यों जरूरी है?
FASTag कार की विंडशील्ड पर लगा एक RFID टैग होता है, जो आपके FASTag अकाउंट से जुड़ा रहता है. टोल प्लाजा पर लगे स्कैनर इस टैग को पहचानते हैं और टोल की रकम उससे जुड़े अकाउंट से अपने आप कट जाती है. इसलिए कार बेचने के बाद पुराने मालिक का FASTag एक्टिव रहना परेशानी खड़ी कर सकता है.
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NHAI की FAQ के मुताबिक, काब बेचने या किसी दूसरे व्यक्ति को ट्रांसफर करने के बाद पुराने मालिक को अपने FASTag जारी करने वाले बैंक से संपर्क करके अकाउंट या वॉलेट बंद कराना चाहिए. वहीं, कार खरीदने वाले नए मालिक को अपने नाम से नया FASTag लेना होता है.
FASTag में पैसे बचे हैं तो क्या होगा?
अगर कार बेचते समय आपके FASTag वॉलेट में कुछ पैसे बचे हुए हैं तो अकाउंट बंद कराने से पहले बैंक से इसके बारे में जानकारी जरूर लेलें. रिफंड या बची हुई रकम को वापस पाने की प्रोसेस संबंधित FASTag जारी करने वाले बैंक के नियमों पर निर्भर कर सकती है.
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FASTag बंद कराने की रिक्वेस्ट देते समय बैंक से यह भी पूछें कि आपके अकाउंट में मौजूद बैलेंस का क्या होगा. अगर रकम वापस मिल सकती है तो इसके लिए कौन-सी प्रक्रिया अपनानी होगी, इसकी जानकारी भी ले लें. इससे FASTag बंद कराने के बाद बची हुई रकम को लेकर कोई परेशानी नहीं होगी.
FASTag कैसे बंद कराएं?
FASTag को डिएक्टिवेट कराने का तरीका इस बात पर निर्भर करता है कि आपका FASTag किस बैंक या एजेंसी ने जारी किया है. सबसे पहले उस बैंक की कस्टमर केयर सर्विस या FASTag पोर्टल पर संपर्क करें. वहां कार बेचने की जानकारी देकर FASTag अकाउंट बंद करने के लिए क्लोजर रिक्वेस्ट डाली जा सकती है.
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बैंक मांगेगा ये जानकारी
FASTag बंद कराने के दौरान बैंक आपसे कुछ जरूरी जानकारी मांग सकता है. इसमें FASTag से जुड़ा रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर शामिल हो सकता है. जानकारी का वेरिफिकेशन होने के बाद बैंक FASTag बंद करने की प्रक्रिया शुरू करेगा.
कार बेचने के बाद सिर्फ क्लोजर रिक्वेस्ट डालना ही काफी नहीं है. रिक्वेस्ट स्वीकार होने के बाद यह भी सुनिश्चित कर लें कि आपका FASTag अब एक्टिव नहीं है. इससे आगे होने वाले टोल ट्रांजैक्शन को लेकर किसी तरह की परेशानी से बचा जा सकता है.
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बैंक से समस्या हो तो यहां करें शिकायत
अगर संबंधित बैंक से FASTag बंद कराने या उससे जुड़ी किसी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है, तो FASTag से संबंधित सहायता के लिए IHMCL की हेल्पलाइन और शिकायत व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसलिए कार बेचने के बाद FASTag की स्थिति जरूर चेक करें और उसे समय पर बंद कराएं.
कार बेचने के बाद ये काम भूलना पड़ सकता है भारी
कार की बिक्री के बाद कागजात ट्रांसफर कराने के साथ FASTag अकाउंट बंद कराना भी जरूरी है. ऐसा न करने पर नई गाड़ी के मालिक के टोल ट्रांजैक्शन पुराने FASTag से जुड़े रह सकते हैं और रकम आपके अकाउंट से कट सकती है
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