Tubeless Tyre Tip: कितने पंचर के बाद बदल देना चाहिए ट्यूबलेस टायर? जान लीजिए सही जवाब

ट्यूबलेस टायर में पंचर होना आम बात है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कितने पंचर के बाद टायर बदल देना चाहिए? जानिए कब पुराना टायर चलाना ठीक है और कब नया टायर लगवाना जरूरी हो जाता है.

Tubeless tyre

ट्यूबलेस टायर में कितने पंचर के बाद बदल देना चाहिए टायर? (Image Credit-Magnific)

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कार हो या बाइक, ट्यूबलेस टायर आज लगभग हर गाड़ी में इस्तेमाल होते हैं. इनका फायदा यह है कि पंचर होने पर टायर की हवा अक्सर एकदाम से खत्म नहीं होती और गाड़ी को संभालने के लिए कुछ समय मिल जाता है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि एक ही टायर को बार-बार पंचर होने के बाद भी बेफिफ्र होकर इस्तेमाल करते रहें. अगर आपके टायर में कई बार पंचर हो चुका है, तो यहा जानना जरूरी है किस स्थिति में उसे रिपेयर कराया जा सकता है और कब नया टायर लगवाना ही सुरक्षित रहता है.

3-4 पंचर के बाद टायर बदलने की सलाह

ट्यूबलेस टायर में 3-4 बार पंचर होने के बाद आमतौर पर उसे बदलने की सलाह दी जाती है. हालांकि केवल पंचर की संख्या देखकर टायर बदलने का फैसला नहीं किया जाना चाहिए. पंचर कहां हुआ है, छेद कितना बड़ा है और टायर की मौजूदा हालत कैसी है, य बातें भी उनती ही जरूरी हैं. अगर ट्रेड एरिया में छोटे पंचर हुए हैं और उन्हें सही तरीके से रिपेयर किया गया है, तो टायर कुछ समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है.

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पंचर के बीच 150 मिमी की दूरी जरूरी

टायर में पंचर कितने हैं, इसके साथ यह भी देखना जरूरी है कि वे एक-दूसरे से कितनी दूरी पर हैं. दो पंचरों के बीच कम से कम 150 मिमी यानी करीब 6 इंच की दूरी होनी चाहिए. अगर दो पंचर एक-दूसरे के बहुत करीब हैं, तो उनके बीच का रबर कमजोर हो सकता है. ऐसी स्थिति में टायर को रिपेयर कराने के बजाय बदलना ज्यादा सुरक्षित हो सकता है.

साइडवॉल में पंचर हो तो सावधान

टायर के उस हिस्से को ट्रेड कहा जाता है, जो सीधे सड़क के कॉन्टैक्ट में रहता है. इसके किनारे का हिस्सा साइडवॉल होता है. ट्रेड में हुआ छोटे पंचर को सही तरीके से रिपेयर किया जा सकता है, लेकिन साइडवॉल या शोल्डर में पंचर होने का मामला अलग होता है. इस हिस्से में लगातार दबाव और फ्लेक्सिंग होती है, इसलिए यहां किया गया रिपेयर भरोसेमेंद नही माना जाता. ऐसे मामले में टायर को बदलने की जरूरत पड़ सकती है.

6 मिमी से बड़ा छेद हो तो बदलें टायर

पंचर के छेद का साइज भी टायर की सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाता है. अगर कील स्क्रू या किसी दूसरी चीज से हुआ छेद 6 मिमी से बड़ा है तो उसे सामान्य रबर प्लग या बत्ती से रिपेयर करना सेफ नहीं माना जाता. ऐसे में नया टायर लगवाना बेहतर विकल्प होता है.

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टायर में पंचर होने के बाद उसकी ट्रेड डेप्थ पर भी ध्यान देना चाहिए. अगर टायर का ट्रेड पहले ही काफी घिस चुका है और उसकी गहराई 1.6 मिमी से कम रह गई है, तो पंचर ठीक कराने के बजाय टायर बदलना चाहिए.

क्या हर पंचर के बाद नया टायर लगवाना जरूरी है?

कई लोगो को लगता है कि ट्यूबलेस टायर में एक बार पंचर होने के बाद उसे बदल देना चाहिए. ऐसा जरूरी नहीं है अगर पंचर ट्रेड के बीच वाले हिस्से में छोटा है, सही तरीके से रिपेयर किया गया है और टायर बाकी मामलों में अच्छी हालत में है, तो उसे इस्तेमाल किया जा सकता है. लेकिन बार-बार पंचर होने पर टायर की पूरी स्थिति की जांच जरूर करवानी चाहिए.

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इन संकेतों पर तुरंत बदलें टायर

सिर्फ पंचर की संख्या ही टायर बदलने का कारण नहीं है. अगर टायर में गहरी दरार, कट या उभार दिखाई दे रहा है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. इसी तरह टायर से बार-बार हवा निकल रही हो, ट्रेड काफी घिस गया हो या टायर काफी पुराना हो चुका हो, तो उसे बदलने पर विचार करना चाहिए. रबर समय के साथ अपनी मजबूती खो सकता है.

पंचर के बाद जल्दबाजी में न लें फैसला

टायर में पंचर होने पर केवल उसे तुरंत प्लग लगाकर आगे बढ़ जाना सही तरीका नहीं है. खासकर अगर टायर में पहले भी कई बार रिपेयर हो चुका है, तो उसकी अंदरूनी और बाहरी स्थिति की जांच जरूरी है. टायर की उम्र, ट्रेड, पंचर की जगह, छेद का आकार और पंचरों के बीच की दूरी देखकर ही तय करना चाहिए कि पुराना टायर चलाना सुरक्षित है या नया टायर लगवाने का समय आ गया है.

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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