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बारिश या बाढ़ से कार को हुए नुकसान का इंश्योरेंस मिलेगा या खुद उठाना पडे़गा खर्च, जानें इसमें क्या कवर होता है?

मानसून में जलभराव के बीच कार में पानी घुस गया या कार पानी डूब गई तो मरम्मत का खर्च हजारों से लाखों तक पहुंच सकता है. लेकिन क्या कार इंश्योरेंस में इस नुकसान को कवर किया जा सकता है. आइए जानते हैं.

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मानसून में कार डूब गई तो मिलेगा पूरा पैसा? इंश्योरेंस की ये शर्त जरूर जान लें. (Photo-AI)

बारिश में सड़कों पर जलभराव और कई जगहों पर बाढ़ जैसी स्थिति बनना आम बात है. ऐसे में अगर आपकी कार पानी में फंस जाती है या उसमें पानी भर जाता है या वो पानी डूब जाती है तो उसे फिर से ठीक कराने में हजारों रुपये का खर्च आ सकता है. ऐसे में सवाल आता है कि क्या इंश्योरेंस कंपनी इसे कवर करेगी? समझने वाली जरूरी बात है कि हर कार इंश्योरेंस पॉलिसी इस तरह के नुकसान को कवर नहीं करती है. ऐसे में अगर आपके पास केवर थर्ड पार्टी इंश्योरेंस है तो अपनी कार को हुए नुकसान का खर्च आपको खुद उठाना पड़ सकता है.

क्या कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस बारिश और बाढ़ का नुकसान कवर करता है?

कॉम्प्रिहेंसिव और ओन डैमेज इंश्योरेंस पॉलिसी आमतौर पर बारिश, बाढ़ और जलभराव की वजह से कार को हुए कई तरह के नुकसान को कवर करती है. इसके तहत कार की बॉडी, पेंट,सस्पेंशन, इंटीरियर, सीट और इलेक्ट्रिकल सिस्टम समेत दूसरे हिस्सों को हुए नुकसान की भरपाई की जा सकती है. इसके अलावा तूफान, चक्रवात, पेड गिरने और लैंडस्लाइज जैसी प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान को भी पॉलिसी के दायरे में शानिल किया जा सकता है.

बाढ़ और जलभराव में किन चीजों का नुकसान कवर होता है?

कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस के तहत आमतौर पर बाढ़ और जलभराव के कारण कार को हुए नुकसान को कवर किया जाता है. भारी बारिश से इलेक्ट्रिकल सिस्टम खराब होने, कार के इंटीरियर और सीटों को नुकसान पहुंचने जैसी स्थितियों में भी क्लेम मिल सकता है. इसके अलावा पेड़ या कोई दूसरी वस्तु गिरने, तूफान, चक्रवात, लैंडस्लाइड और रॉकस्लाइड से हुए नुकसान को भी कवर किया जा सकता है. हालांकि, वास्तविक कवरेज पॉलिसी की शर्तों, डिडक्टिबल और IDV यानी Insured Declared Value पर निर्भर करती है.

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इंजन में पानी घुस गया तो क्या मिलेगा क्लेम?

मानसून में कार के इंजन में पानी घुसना सबसे महंगी समस्याओं में से एक हो सकता है. अगर कार पानी में फंस जाती है और इंजन सीज हो जाता है तो सामान्य कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी में इका क्लेम आमतौर पर नहीं मिलता.इसे कॉन्सीक्वेंशियल लॉस माना जाता है. ऐसे नुकसान से बचने के लिए अलग से इंजन प्रोटेक्शन कवर लेना जरूरी होता है. ये प्रोटेक्श कवर एड ऑन पानी घुसने, इंजन सीज होने, हाइड्रोस्टैटिक लॉक और इंजन, गियरबॉक्स से जुड़े कुछ नुकसान को कवर करने में मदद करता है.

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इन गलतियों पर क्लेम हो सकता है रिजेक्ट

इंश्योरेंस पॉलिसी होने के बावजूद हर स्थिति में क्लेम मिलना जरूरी नहीं है. अगर जलभराव में फंसी कार को दोबारा स्टार्ट करने की कोशिश की जाती है, तो इंजन को और नुकसान हो सकता है और क्लेम रिजेक्ट किया जा सकता है. इसके अलावा जलभराव वाले रास्ते पर जानबूझकर या लापरवाही से गाड़ी चलाना, सामान्य टूट-फूट और जंग लगना भी आमतौर पर कवरेज में शामिल नहीं होते. इंजन ऑयल और दूसरे कंज्यूमेबल्स से जुड़े नुकसान के लिए भी अलग कवरेज की जरूरत पड़ सकती है.

मानसून में कौन-से एड-ऑन काम आएंगे?

बारिश में कार को बेहतर सुरक्षा देने के लिए कुछ एड ऑन काफी उपयोगी साबित हो सकते हैं. इंजन प्रोटेक्शन कवर पानी घुसने, हाइड्रोस्टैटिक लॉक और इंजन सीज होने जैसी स्थितियों में मदद करता है. जीरो डेप्रिसिएशन कवर के तहत पार्ट्स की कीमत से डेप्रिसिएशन की कटौती नहीं होती और पॉलिसी की शर्तों के मुताबिक ज्यादा क्लेम राशि मिल सकती है. कंज्यूमेंबल्स कवर इंजन ऑयल, लुब्रिकेंट और छोटे पार्ट्स के खर्च को कवर कर सकता है. वहीं रोडसाइड असिस्टेंस में टोइंग, बैटरी जंप-स्टार्ट और फ्यूल डिलीवरी जैसी सुविधाएं मिल सकती हैं.

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AI Generated

क्या सिर्फ थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस काफी है?

सिर्फ थर्ड पार्टी इंश्योरेंस आपकी अपनी कार को बारिश या बाढ़ से हुए नुकसान से सुरक्षा नहीं देता. ये मुख्य रूप से किसी दूसरे व्यक्ति या वाहन को हुए नुकसान के लिए कवरेज देता है. इसलिए अगर मानसून में अपनी कार को जलभराव और बाढ़ स होने वाले नुकसान से बेहतर सुरक्षा देना चाहते हैं, तो कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस ज्यादा उपयोगी हो सकता है. इसके साथ ही कवर प्रोजेक्शन और एड ऑन लेना बेहतर होता है.

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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