E-Bike Didi Scheme: दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा, रोजगार और पर्यावरण तीनों को एक साथ ध्यान में रखते हुए सरकार जल्द e-Bike दीदी स्कीम शुरू कर सकती है. इस योजना का मकसद सिर्फ एक नई सवारी सेवा शुरू करना नहीं है, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और शहर में सुरक्षित यात्रा का ऑप्शन देना है. फिलहाल यह योजना प्रस्ताव चरण में है, लेकिन अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो जल्द ही दिल्ली की सड़कों पर महिला राइडर्स इलेक्ट्रिक बाइक चलाती नजर आ सकती हैं.
क्या है e-Bike Didi Scheme?
e-Bike दीदी स्कीम का मकसद दिल्ली की युवा महिलाओं को रोजगार देना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है. इसके साथ ही सरकार चाहती है कि महिलाओं को सेफ और भरोसेमंद यात्रा का ऑप्शन मिले. यह योजना पॉल्यूशन कम करने की दिशा में भी एक कदम होगी, क्योंकि इसमें इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों का इस्तेमाल किया जाएगा. शुरुआत में इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया जाएगा और सफल रहने पर इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे शहर में विस्तार दिया जाएगा.
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कैसे काम करेगी यह योजना?
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इस स्कीम का मॉडल बड़े राइड-हेलिंग ऐप्स जैसे Ola और Rapido की तरह हो सकता है. राइड की बुकिंग ऑनलाइन होगी और डिजिटल पेमेंट का विकल्प भी रहेगा. महिलाएं इलेक्ट्रिक बाइक चलाकर कमाई कर सकेंगी. यानी यह योजना महिलाओं के लिए रोजगार और यात्रियों के लिए सुविधा दोनों होगी.
महिला यात्रियों को क्या मिलेगा फायदा?
इस सेवा के तहत महिला राइडर्स सिर्फ महिला यात्रियों को ही राइड देंगी. उन्हें मेट्रो स्टेशन, बस स्टॉप, पर्यटन स्थलों और दिल्ली-NCR के प्रमुख इलाकों तक सेफ पहुंचाया जाएगा. खास तौर पर लास्ट माइल कनेक्टिविटी पर जोर रहेगा, ताकि मेट्रो से घर तक की दूरी भी सुरक्षित तरीके से तय की जा सके.
भारत टैक्सी के साथ पार्टनरशिप की तैयारी
सरकार इस योजना को लागू करने के लिए राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म्स से साझेदारी का सोच रही है. खास तौर पर Bharat Taxi को संभावित पार्टनर माना जा रहा है. हाल ही में Delhi Tourism and Transportation Development Corporation (DTTDC) ने भारत टैक्सी के साथ एक समझौता (MoU) भी साइन किया है, ताकि दिल्ली में कैब सेवाएं मिलकर चलाई जा सकें. माना जा रहा है कि इसी मॉडल पर e-Bike दीदी स्कीम को भी आगे बढ़ाया जा सकता है.
कैसे लागू होगी पूरी योजना?
फिलहाल सरकार योजना के हर पहलू पर विचार कर रही है. किराया कितना होगा, रूट कैसे तय किए जाएंगे, सुरक्षा के क्या इंतजाम होंगे और निजी कंपनियों के साथ आर्थिक मॉडल कैसे काम करेगा इन सभी बिंदुओं पर चर्चा जारी है. कोशिश यही है कि योजना व्यवहारिक भी हो और लंबे समय तक सफल भी रहे.
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