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Car Safety Rules: कारों में आएंगे बड़े सेफ्टी फीचर्स, झपकी आते ही ड्राइवर को जगाएगा सिस्टम, ब्लैक बॉक्स बताएगा हादसे का सच!

सड़क हादसों को रोकने के लिए सरकार कारों के सेफ्टी नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है. नए प्रस्ताव में ड्राइवर को नींद आने पर अलर्ट, एडवांस इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम और हादसे के बाद कार का राज खोलने वाले EDR से जुड़े नियम शामिल हैं. जानिए कब से लागू होंगे ये बदलाव.

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सड़क हादसों को रोकने के लिए सरकार कारों के सेफ्टी नियमों में बड़े बदलावों की तैयारी में है. (Image Credit-AI)

Car Safety Rules: ड्राइविंग के दौरान अगर अचानक आंख लगने लगे तो कुछ ही सेकंड में बड़ा हादसा हो सकता है. अब सरकार इसी खतरे को कम करने के लिए कारों की सेफ्टी में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रही है. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने कारों में एडवांस इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम और ड्राइवर को नींद आने पर अलर्ट करने वाले सिस्टम को अनिवार्य करने का ड्राफ्ट जारी किया है. इतना ही नहीं, नई कारों में हादसे के बाद उसकी वजह समझने में मदद करने वाला ब्लैक बॉक्स यानी EDR भी अहम होने जा रहा है. सरकार ने ड्राफ्ट पर लोगों से 30 दिनों के अंदर सुझाव मांगे हैं.

नींद आते ही तेज आवाज से अलर्ट करेगा सिस्टम

प्रस्तावित नियमों के तहत कार में ऐसा सिस्टम लगाया जाएगा, जो ड्राइव के नींद में जाने या ध्यान भटनके के संकेत मिलने पर उसे अलर्ट करेगा. ड्राइवर को झपकी आने पर तेज आवाज में बीप बज सकती है और ड्रावर की सीट तेजी से वाइब्रेट होगी. इसका मकसद ड्रावर को तुरंत सावधान करना है, ताकि वह समय रहते कार को संभाल सके और संभावित हादसे बचा सके.

एडवांस इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम भी होगा जरूरी

सरकार कारों में एडवांस इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम को भी अनिवार्य करने की तैयारी कर रही है. यह सिस्टम सामने किसी बाधा या संभावित टक्कर को पहचानकर ड्राइवर को चेतावनी देने के साथ जरूरत पड़ने पर ब्रेक लगाने में मदद कर सकता है. नई कारों के लिए यह व्यवस्था धीरे-धीरे लागू की जाएगी.

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2032 तक M1 कारों पर पूरी तरह लागू होगा नियम

ड्राफ्ट के मुताबिक, 2032 तक देश में बिकने वाली आठ सीटों तक वाली M1 कैटेगरी की गाड़ियों पर ये सुरक्षा नियम पूरी तरह लागू हो जाएंगे. यानी कार कंपनियों को आने वाले सालों में अपने मॉडल में इन सेफ्टी सिस्टम को शामिल करना होगा. नियमों को अलग-अलग चरणों में लागू करने का मकसद कंपनियों को जरूरी तकनीकी बदलाव के लिए पर्याप्त समय देना है.

टैक्सी और कैब के लिए नियम पहले होंगे सख्त

ट्रांसपोर्ट के तौर पर रजिस्टर होने वाली M1 गाड़ियों यानी टैक्सी, कैब और कंपनी की कारों के लिए कुछ नियम पहले लागू होंगे. ड्राफ्ट के मुताबिक, 1 अक्टूबर 2029 से ऐसी गाड़ियों में ड्राइवर ड्रोसिनेस और अटेंशन सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा. वहीं, ड्राइवर को झपकी आने पर अलर्ट करने वाला सिस्टम 1 अक्टूबर 2027 से जरूरी करने का प्रस्ताव है.

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कार में आएगा ब्लैक बॉक्स

नए सुरक्षा मानकों में Event Data Recorder यानी EDR से जुड़े नियम भी शामिल हैं. इसे आम भाषा में कार का ब्लैक बॉक्स कहा जा सकता है. यह कोई अलग से दिखाई देने वाली बड़ी मशीन नहीं होती, बल्कि कार के कंट्रोल सिस्टम से जुड़ी होती है. इसका संबंध एयरबैग जैसी सुरक्षा प्रणालियों से भी होता है.

हादसे के वक्त की जानकारी सेव करेगा EDR

जब कार की जोरदार टक्कर होती है या एयरबैग खुलते हैं, तो EDR हादसे के आसपास के कुछ पलों की जानकारी सेव कर सकता है. इसमें कार की स्पीड, ब्रेक इस्तेमाल किए गए थे या नहीं, सीट बेल्ट लगी थी या नहीं और एयरबैग खुलने जैसी जानकारी शामिल हो सकती है. यह सिस्टम पूरी ड्राइविंग का रिकॉर्ड नहीं रखता, बल्कि हादसे से जुड़े कुछ सेकंड का डेटा सेव करता है.

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आवाज नहीं होगी रिकॉर्ड 

EDR को लेकर एक बात साफ समझना जरूरी है. यह कार में बैठे लोगों की बातचीत या आवाज रिकॉर्ड करने वाला सिस्टम नहीं है. इसका काम हादसे के समय गाड़ी से जुड़ी जरूरी तकनीकी जानकारी को सेव करना है. यानी इसे किसी तरह का ऑडियो रिकॉर्डर नहीं समझना चाहिए. इससे हादसे की परिस्थितियों को समझना आसान हो सकता है. हालांकि, EDR के डेटा से किसी हादसे की पूरी वजह का पता लगना जरूरी नहीं है.

कब लागू होंगे ये नियम?

प्रस्तावित सभी सुरक्षा नियम एक साथ लागू नहीं होंगे. कुछ नियमों के लिए अक्टूबर 2027 की समयसीमा रखी गई है, जबकि कुछ बदलाव 2028 और 2029 से लागू होंगे. इसके अलावा कुछ दूसरे प्रावधानों की समयसीमा 2031 और 2032 तक रखी गई है. इससे कार कंपनियों को नई तकनीक और सुरक्षा सिस्टम को अपनी गाड़ियों में शामिल करने के लिए समय मिल सकेगा.

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सरकार ने 30 दिन में मांगे सुझाव

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इन बदलावों को लेकर ड्राफ्ट जारी किया है और लोगों से 30 दिनों के अंदर सुझाव मांगे हैं. सुझाव मिलने के बाद नियमों में जरूरी बदलाव किए जा सकते हैं. इसके बाद अलग-अलग सुरक्षा सिस्टम को तय समयसीमा के हिसाब से नई कारों में लागू किया जाएगा.

ये भी पढे़ं- कारों की सेफ्टी को लेकर सरकार का बड़ा बदलाव, क्रैश से लेकर पैदल यात्रियों तक के लिए नए नियम, जानें कब से होंगे लागू?

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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