कार में तेज म्यूजिक सुनने से क्या कट सकता है चालान? जानें क्या कहता है नियम?
कार में तेज आवाज में गाने बजाने से क्या चालान कट सकता है? इस तरह के सवाल अक्सर लोगों के मन में आते हैं, तो जानते हैं इससे जुड़े नियम.
Written By Mikita Acharya

Written By Mikita Acharya

लंबे सफर में कार के अंदर गाने सुनना किसे पसंद नहीं होता. सफर थोड़ा आसान और मजेदार बनाने के लिए लोग अक्सर म्यूजिक चलाते हैं. लेकिन अगर यही म्यूजिक इतना तेज हो कि कार के बाहर तक आवाज जाए तो यह आपके लिए परेशानी खड़ी कर सकता है. तेज आवाज में गाने बजाने पर न सिर्फ आसपास के लोगों को दिक्कत होती है, बल्कि कुछ परिस्थितियों में ट्रैफिक और शोर से जुड़े नियमों को तहत कार्रवाई भी हो सकती है.
कार में बहुत तेज आवाज में म्यूजिक चलाने का असर ड्राइविंग पर भी पड़ सकता है. तेज आवाज के कारण ड्राइवर का ध्यान सड़क से हट सकता है. इतना ही नहीं, अगर कार के अंदर म्यूजिक बहुत तेज है तो पीछ से आने वाली गाड़ियों का हॉर्न या एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड का सायरन भी सुनाई नहीं दे सकता. ऐसी स्थिति में इमरजेंसी वाहन को रास्ता देने में देरी हो सकती है और हादसे का खतरा बढ़ सकता है.
तेज म्यूजिक और शोर से जुड़े उल्लंघन पर अलग-अलग नियमों के तहत कार्रवाई हो सकती है. मोटर वाहन अधिनियम की धारा 190(2) के तहत शोर प्रदूषण और रोड सेफ्टी मानकों के उल्लंघन पर पहली बार पकड़े जाने पर 1,000 से 10,000 रुपये तक जुर्माने का प्रावधान बताया गया है. हालांकि, जुर्माने की राशि राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के हिसाब से अलग हो सकती है.
अगर तेज म्यूजिक की वजह से ड्राइवर का ध्यान ड्राइविंग से हटता है और पुलिस इसे खतरनाक ड्राइविंग मानती है तो धारा 184 के तहत भी कार्रवाई हो सकती है. इसलिए सिर्फ यह सोचना सही नहीं है कि कार के अंदर गाना बज रहा है तो पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर सकती. म्यूजिक की आवाज और ड्राइविंग के तरीके, दोनों पर ध्यान देना जरूरी है.
अस्पताल, स्कूल, कॉलेज और कोर्ट के आसपास के इलाकों को साइलेंस जोन के तौर पर चिन्हित किया जा सकता है. इन जगहों पर शोर को लेकर नियम ज्यादा सख्त होते हैं. साइलेंज जोन में दिन के समय 50 डेसिबल और रात में 40 डेसिबल से ज्यादा शोर की सीमा बताई गई है. अगर कार का म्यूजिक बाहर सड़क तक तेज आवाज में सुनाई देता है, तो कार्रवाई हो सकती है.
कई लोग कार के म्यूजिक सिस्टम को ज्यादा दमदार बनाने के लिए बड़े एम्पलीफायर, सबवूफर और एक्स्ट्रा स्पीकर लगवा लेते हैं. कंपनी की तरफ से दिया गया म्यूजिक सिस्टम आमतौर पर वाहन के तय मानकों के हिसाब से लगाया जाता है, लेकिन बाद में किए गए मॉडिफिकेशन पर नियमों का ध्यान रखना जरूरी है. अगर किसी बदलाव से वाहन नियमों का उल्लंघन होता है, तो पुलिस कार्रवाई कर सकती है और अलग से चालान भी हो सकता है.
अगर कार में तेज म्यूजिक चल रहा है और खिड़कियां भी खुली हैं तो इसकी आवाज आसानी से बाहर तक पहुंच सकती है. इससे सड़क पर चल रहे दूसरे लोगों को परेशानी हो सकती है. इसलिए म्यूजिक सुनते समय खिड़कियां बंद रखना बेहतर है और आवाज को जरूरत से ज्यादा तेज नहीं करना चाहिए.
कार में म्यूजिक की आवाज इतनी रखें कि वह सड़क पर आसपास के लोगों को परेशान न करे. साइलेंस जोन से गुजरते समय म्यूजिक बंद करना या आवाज काफी कम करना बेहत है. सबसे जरूरी बात ये है कि ड्राइविंग के दौरान म्यूजिक इतना तेज न हो कि आपको आसपास के वाहनों का हॉर्न या एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड का सायरन सुनाई न दें.सुरक्षित ड्राइविंग के लिए सड़क की आवाज और आसपास की स्थिति पर ध्यान देना भी उतना ही जरूरी है.
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