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कार खरीदते समय इन 5 फीचर्स के पीछे न भागें, बेवजह खर्च हो सकते हैं हजारों रुपये

नई कार खरीदते समय सनरूफ, जेस्चर कंट्रोल और ऑटोमैटिक पार्किंग जैसे फीचर्स काफी आकर्षक लगते हैं. लेकिन क्या ये सभी फीचर्स रोजाना ड्राइविंग में आपके काम आते हैं?

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नई कार खरीदते समय सनरूफ, जेस्चर कंट्रोल और ऑटोमैटिक पार्किंग जैसे फीचर्स काफी आकर्षक लगते हैं.

जब भी हम नई कार खरीदने शोरूम जाते हैं, तो टॉप मॉडल में मिलने वाले फीचर्स देखकर उसे खरीदने का मन करने लगता है. बड़ी टचस्क्रीन, सनरूफ और कई स्मार्ट फीचर्स वाली कार पहली नजर में ज्यादा आकर्षक लगती है. कई बार इन्हीं फीचर्स के चक्कर में हम अपने बजट से ज्यादा पैसे खर्च कर देते हैं. लेकिन क्या ये सभी फीचर्स रोजाना इस्तेमाल में भी काम आते हैं? जरूरी नहीं. भारतीय सड़कों, मौसम और ट्रैफिक को देखते हुए कुछ फीचर्स का इस्तेमाल काफी सीमित हो जाता है. ऐसे में कार खरीदते समय सिर्फ फीचर्स की लंबी लिस्ट देखकर फैसला करना सही नहीं है. जानते हैं ऐसे फीचर्स के बारे में, जिनके लिए ज्यादा पैसे खर्च करने से पहले आपको जरूर सोचना चाहिए.

क्या इन फीचर्स पर पैसे खर्च करना सही है?

1. सनरूफ

आजकल भारतीय बाजार में सनरूफ वाली कारों की काफी डिमांड है. कई ग्राहक तो कार खरीदते समय सबसे पहले यही देखते हैं कि उसमें सनरूफ है या नहीं. कंपनियां भी इस फीचर को अपनी कारों की खासियत के तौर पर पेश करती हैं. लेकिन भारत के ज्यादातर हिस्सों में तेज गर्मी, धूल और प्रदूषण के कारण सनरूफ खोलकर ड्राइविंग करना आसान नहीं होता. इसे खोलने पर कार के अंदर की ठंडी हवा भी बाहर निकल जाती है.

कुछ लोग सनरूफ को सिर्फ कार का लुक बेहतर बनाने के लिए पसंद करते हैं. लेकिन अगर आप इसका इस्तेमाल बहुत कम करने वाले हैं, तो सिर्फ इस फीचर के लिए ज्यादा पैसे खर्च करना समझदारी नहीं होगी. खासकर शहर में रोजाना कार चलाने वालों को पहले इसकी जरूरत के बारे में सोचना चाहिए. ध्यान रखें कि चलती कार में सनरूफ से बाहर निकलना बेहद खतरनाक है.

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2. कार का इन-बिल्ट नेविगेशन सिस्टम

कई कारों के टॉप मॉडल में कंपनी की तरफ से इन-बिल्ट नेविगेशन सिस्टम दिया जाता है. इसका काम ड्राइवर को रास्ता बताना होता है. हालांकि, कुछ कारों में इसका इस्तेमाल करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है. कई बार मैप अपडेट करने की जरूरत पड़ती है और ट्रैफिक की ताजा जानकारी भी आसानी से नहीं मिल पाती.

वहीं, आजकल ज्यादातर लोग रास्ता खोजने के लिए स्मार्टफोन में Google Maps का इस्तेमाल करते हैं. इसमें ट्रैफिक, रास्तों में बदलाव और दूसरे जरूरी अपडेट भी मिल जाते हैं. अगर आपकी कार में Android Auto या Apple CarPlay की सुविधा है, तो अलग से दिए गए नेविगेशन सिस्टम की जरूरत काफी कम हो जाती है.

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3. जेस्चर कंट्रोल

कुछ महंगी कारों में जेस्चर कंट्रोल का फीचर मिलता है. इसकी मदद से हाथ के इशारे से म्यूजिक बदलने और आवाज कम-ज्यादा करने जैसे काम किए जा सकते हैं. देखने में यह फीचर काफी आधुनिक लगता है, लेकिन रोजाना ड्राइविंग के दौरान यह हर किसी के लिए सुविधाजनक नहीं होता.

कई बार हाथ के इशारे सही तरीके से काम नहीं करते. वहीं, स्टीयरिंग पर दिए गए बटन या नॉब से म्यूजिक कंट्रोल करना ज्यादा आसान हो सकता है. ड्राइविंग के दौरान हाथ हिलाकर कमांड देने से ध्यान भी भटक सकता है. ऐसे में सिर्फ दिखावे के लिए इस फीचर पर अतिरिक्त पैसे खर्च करने से बचना चाहिए.

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4. ऑटोमेटेड पार्किंग असिस्ट

ऑटोमेटेड पार्किंग असिस्ट एक ऐसा फीचर है, जिसकी मदद से कार पार्किंग की जगह पहचानकर खुद पार्क होने में मदद कर सकती है. पहली नजर में यह काफी काम का फीचर लगता है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें कार पार्क करने में परेशानी होती है.

लेकिन भारत में कई जगह पार्किंग की जगह काफी कम होती है. बाजारों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में गाड़ियों के बीच भी ज्यादा जगह नहीं मिलती. ऐसे में यह सिस्टम हमेशा उम्मीद के मुताबिक काम नहीं कर पाता. कई बार कार को पार्क करने में ज्यादा समय भी लग सकता है. इसलिए अगर आप अक्सर तंग गलियों या भीड़भाड़ वाली जगहों पर गाड़ी पार्क करते हैं, तो इस फीचर की उपयोगिता को पहले समझ लें.

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5. पैडल शिफ्टर्स

पैडल शिफ्टर्स कार के स्टीयरिंग के पीछे लगे होते हैं. इनकी मदद से ड्राइवर बिना गियर लीवर को छुए गियर बदल सकता है. यह फीचर खासतौर पर उन लोगों को पसंद आता है, जिन्हें खुद गियर बदलकर ड्राइविंग करना अच्छा लगता है.

हालांकि, रोजाना शहर के ट्रैफिक में गाड़ी चलाने वालों के लिए पैडल शिफ्टर्स का इस्तेमाल ज्यादा जरूरी नहीं होता. ट्रैफिक में बार-बार रुकने और चलने के दौरान ज्यादातर ड्राइवर सामान्य ऑटोमैटिक मोड का ही इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में अगर आप स्पोर्टी ड्राइविंग के शौकीन नहीं हैं, तो सिर्फ पैडल शिफ्टर्स के लिए महंगा वेरिएंट खरीदने से पहले अपनी जरूरत जरूर समझें.

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नई कार खरीदते समय यह जरूरी नहीं है कि सबसे ज्यादा फीचर्स वाला मॉडल ही आपके लिए सबसे अच्छा हो. कार का इस्तेमाल कहां और किस तरह करना है, यह समझना ज्यादा जरूरी है. इसलिए टॉप मॉडल खरीदने से पहले उसके फीचर्स की तुलना अपनी जरूरत से जरूर करें. जिन सुविधाओं का इस्तेमाल आप रोजाना करने वाले हैं, उन्हें प्राथमिकता दें. इससे आपका बजट भी कंट्रोल में रहेगा और बेकार के फीचर्स पर अतिरिक्त पैसे खर्च नहीं करने पड़ेंगे.

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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