कार चलाते समय अगर इंजन अचानक बंद हो जाए, तो परेशानी बढ़ सकती है. कई बार छोटी-छोटी लापरवाही भी इंजन को बड़े नुकसान की वजह बन जाती है. इंजन ऑयल की कमी, जरूरत से ज्यादा गर्म होना या बारिश में गहरे पानी से गाड़ी निकालने ऐसी गलतियां हैं, जिनसे इंजन सील होने का खतरा बढ़ सकता है. एक बार इंजन सीज हो जाए, तो उसकी मरम्मत में हजारों से लेकर लाखों रुपये तक खर्च हो सकते हैं. हालांकि, कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखकर इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
इंजन से जुड़ी ये गलतियां करने से बचें
1. इंजन ऑयल की अनदेखी पड़ सकती है भारी
कार के इंजन को सही तरीके से चलाने में इंजन ऑयल की अहम भूमिका होती है. यह पिस्टन, क्रैंकशाफ्ट और इंजन के दूसरे चलने वाले पार्ट्स के बीच घर्षण कम करता है. अगर इंजन ऑयल कम हो जाए या लंबे समय तक इसे न बदला जाए, तो इंजन के अंदर गर्मी और घर्षण बढ़ने लगता है. ऐसी स्थिति में अंदरूनी पार्ट्स को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है और इंजन सीज भी हो सकता है.
इस परेशानी से बचने के लिए समय-समय पर इंजन ऑयल का लेवल चेक करते रहें. कार कंपनी ने जितने किलोमीटर चलने या जितने समय बाद ऑयल बदलने की सलाह दी है, उसका पालन करें. साथ ही, अपनी कार के लिए फिक्स ग्रेड का ही इंजन ऑयल इस्तेमाल करें. अगर गाड़ी के नीचे ऑयल टपकता दिखाई दे, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत जांच करवाएं.
2. कूलेंट की कमी से इंजन हो सकता है ओवरहीट
इंजन को ज्यादा गर्म होने से बचाने के लिए कार में कूलिंग सिस्टम दिया जाता है. इसमें कूलेंट इंजन की अतिरिक्त गर्मी को बाहर निकालने में मदद करता है. अगर कूलेंट का लेवल कम हो जाए, पाइप में लीकेज हो या कूलिंग सिस्टम ठीक से काम न करे, तो इंजन का तापमान बढ़ सकता है. लगातार ओवरहीटिंग होने से इंजन के अंदरूनी पार्ट्स खराब हो सकते हैं और गंभीर स्थिति में इंजन सीज होने का खतरा भी रहता है.
कूलेंट का लेवल नियमित रूप से चेक करें और जरूरत पड़ने पर कार निर्माता के निर्देशों के मुताबिक सही कूलेंट डलवाएं. अगर डैशबोर्ड पर इंजन के तापमान की वॉर्निंग दिखाई दे या तापमान सामान्य से ज्यादा बढ़ने लगे, तो सुरक्षित जगह पर गाड़ी रोक दें. इंजन को ठंडा होने दें और जरूरत पड़ने पर मैकेनिक की मदद लें. ध्यान रखें कि गर्म इंजन का रेडिएटर कैप कभी न खोलें, क्योंकि गर्म कूलेंट और भाप से जलने का खतरा रहता है.
3. बारिश में गहरे पानी से गाड़ी निकालना पड़ सकता है भारी
बारिश के मौसम में सड़कों पर पानी भरना आम बात है, लेकिन ऐसे रास्तों से कार निकालना इंजन के लिए खतरनाक हो सकता है. अगर गहे पानी के दौरान इंजन के एयर इनटेक से पानी सिलेंडर के अंदर पहुंच जाए, तो हाइड्रो लॉकिंग की कंडीशन बन सकती है. इंजन के पिस्टन हवा और ईंधन के मिश्रण को कंप्रेस करने के लिए बने होते हैं, लेकिन पानी को उसी तरह कंप्रेस नहीं किया जा सकता. ऐसे में इंजन स्टार्ट करने की कोशिश करने पर पिस्टन, कनेक्टिंग रॉड और दूसरे अंदरूनी पार्ट्स को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है.
अगर सड़क पर पानी की गहराई का अंदाजा नहीं है तो जोखिम लेने से बचें और दूसरा रास्ता चुनें. अगर पानी गुजरते समय कार अचानाक बंद हो जाए, तो बार-बार सेल्प या स्टार्टर ने चलाएं. गाड़ी को सुरक्षित स्थिति में रखें और मैकेनिक से जांच करवाएं. पानी में कार बंद होने की हर घटना हाइड्रो-लॉकिंग नहीं होती, लेकिन जांच के बिना इंजन दोबारा स्टार्ट करना नुकसान बढ़ा सकता है.
4. खराब क्वालिटी का फ्यूल भी बन सकता है परेशानी
कार में मिलावटी या खराब पेट्रोल-डीजल इस्तेमाल करने से फ्यूल फिल्टर, इंजेक्टर और फ्यूल सिस्टम में खराबी आ सकती है. इसका अ्सर इंजन की परफॉर्मेंस पर भी पड़ सकता है. हालांकि खराब फ्यूल सीधे इंजन सीज होने की सामान्य वजह नहीं है, लेकिन इससे पैदा होने वाली समस्याएं इंजन को नुकसान पहुंचा सकती हैं.इसलिए फ्यूल भरवाते समय लापरवाही न करें.
हमेशा भरोसेमंद पेट्रोल पंप से ही ईंधन भरवाएं. अपनी कार के इंजन के हिसाब से कंपनी की ओर से निर्धारित फ्यूल का इस्तेमाल करें. अगर ईंधन भरवाने के बाद कार में झटके लगने लगें, पिकअप कम हो जाए या इंजन ठीक से काम न करे, तो इसकी जांच करवाएं.
इन बातों का रखें ध्यान
कुल मिलाकर, इंजन ऑयल की कमी, ओवरहीटिंग, गहरे पानी में गाड़ी चलाना और दूषित फ्यूल का इस्तेमाल ऐसी गलतियां हैं, जिनसे कार को नुकसान पहुंच सकता है. समय पर सर्विसिंग और जरूरी सावधानियां अपनाकर आप इंजन की उम्र बढ़ाने के साथ-साथ महंगे रिपेयर के खर्च से भी बच सकते हैं.