Surya ke Upay: सूर्य को जल चढ़ाते समय भूल कर भी न करें ये गलतियां, कंगाल हो जाएंगे

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Surya ke Upay: कई बार जन्मकुंडली में सूर्य प्रतिकूल होता है या उस पर क्रूर ग्रहों की दृष्टि होती है। ऐसे में ज्योतिषी अक्सर सूर्य के उपाय बताते हैं। इन उपायों में भी सूर्य को जल चढ़ाने का उपाय सबसे ज्यादा बताया जाता है। परन्तु क्या आप जानते हैं कि गलत तरीके से जल चढ़ाने पर फायदे की जगह नुकसान भी हो सकता है। यही नहीं, गलत तरह से सूर्य को अर्ध्य देने या जल चढ़ाने पर व्यक्ति करोड़पति से कंगाल भी बन सकता है।

वैदिक ज्योतिष पूरी तरह से एक वैज्ञानिक विद्या है जिसमें प्रकृति की ऊर्जा और पंचतत्वों के संतुलन को साधा जाता है। इन दोनों के ही सुसंयोग से व्यक्ति को सौभाग्य की प्राप्ति होती है। प्रत्येक ग्रह अपने आप में ऊर्जा का एक सम्पूर्ण सोर्स है। हर ग्रह और उसकी ऊर्जा की अपनी एक खास फ्रिक्वेंसी होती है, उसका अपना एक ऑरा होता है। ज्योतिष में बताए गए उपायों से उसी ऊर्जा को अप्रोच कर उसका प्रयोग किया जाता है। ऐसे में किसी भी उपाय को गलत करना फायदे की जगह नुकसान का कारण बन सकता है।

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सूर्य को ग्रह राज माना गया है। यही कारण है कि लगभग प्रत्येक हिंदू रोजाना सुबह सूर्य को अर्ध्य देता है या जल चढ़ाता है। उनमें से बहुतों को जल अर्ध्य चढ़ाने का सही तरीका मालूम नहीं है। जिसकी वजह से उन्हें कई बार नुकसान भी उठाना पड़ता है। यहां आप ऐसी ही कुछ बातों के बारे में जानेंगे ताकि आप सही तरह से जल चढ़ा सकें और लाभ उठा सकें।

कैसे दें सूर्य को अर्ध्य (Surya ke Upay)

सूर्य को अर्ध्य देने का सबसे सरल तरीका है कि सुबह स्नान के बाद साफ धुले हुए कपड़े पहन कर अर्ध्य दिया जाए। उस समय गंदे और बिना धुले कपड़े नहीं पहनने चाहिए। मन में अच्छे विचार हों। सूर्य को जल चढ़ाने के बाद उन्हें नमस्कार करें तथा गायत्री मंत्र का 11 या 21 बार जप करें। इस तरह जल चढ़ाने से व्यक्ति के सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं और वह जीवन में सफलता, सौभाग्य और समृद्धि प्राप्त करता है। सूर्य के उपाय (Ravivar ke Upay) आम तौर पर रविवार से शुरू किए जाते हैं।

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जल चढ़ाते समय भूल कर भी न करें ये गलतियां (Surya ke Upay Lal Kitab)

जाने-अनजाने में सूर्य को जल चढ़ाते समय (Surya Ke Upay) हमसे कई गलतियां हो जाती हैं जो नहीं होनी चाहिए। ये इस प्रकार हैं-

  • कभी भी बिना धुले कपड़े पहन कर जल न चढ़ाएं। यदि ऐसा नहीं हो सकता तो टॉवल लपेट कर ही अर्ध्य देना उपयुक्त रहेगा।
  • अर्ध्य देते समय जो जल भूमि पर गिरता है, वह किसी साफ-सुथरे स्थान पर जाना चाहिए। यदि सूर्य को चढ़ाया गया पानी गिर कर गंदे स्थान पर जाता है तो इससे दोष लगता है और सौभाग्य भी दुर्भाग्य में बदल जाता है।
  • उसके छींटे पैरों में नहीं लगने चाहिए। ऐसा करना भी एक तरह का दोष है। अतः पानी चढ़ाते समय इस तरह खड़े होना चाहिए कि पानी के छींटे बिल्कुल भी पैरों में न लगें बल्कि किसी स्वच्छ स्थान पर बह कर चला जाएं।
  • सूर्य को अर्ध्य देने के लिए ब्रह्म मुहूर्त का समय सर्वोत्तम माना गया है। यदि उस समय ऐसा न कर सकें तो दोपहर 12 बजे तक चढ़ा सकते हैं। परन्तु दोपहर 12 बजे बाद किसी भी स्थिति में सूर्य को अर्ध्य नहीं देना चाहिए।
  • जन्मकुंडली के आधार पर कई बार जल में पुष्प, सिंदूर या दूसरी वस्तुएं मिला कर फिर सूर्य को अर्ध्य देने की सलाह दी जाती है। यदि आपको किसी विद्वान ज्योतिषी ने ऐसा करने की सलाह नहीं दी है तो आपको भूल कर भी नहीं करना चाहिए। आप सामान्य जल ही चढ़ाएं अन्यथा फायदे की जगह नुकसान भी हो सकता है।

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष के ज्ञान पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। news24 इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी उपाय को करने से पहले संबंधित विषय के एक्सपर्ट से सलाह अवश्य लें।

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