Kartik Purnima 2023: भक्तों ने गंगा नदी में लगाई आस्था की डुबकी, दीप जला सुंरग में फंसे मजदूरों के लिए की प्रार्थना, देखें Video

हरिद्वार में कार्तिक पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने गंगा नदी में पावन स्नान किया। देव दिवाली पर भक्तों ने हर की पौड़ी पर 21 हजार दीप जलाए हैं.

Kartik-Purnima

Kartik Purnima 2023 : सनातन धर्म में ऐसे तो हर महीने पूर्णिमा पड़ती है, लेकिन कार्तिक महीने की पूर्णिमा का अपना ही एक अलग महत्व है। कार्तिक पूर्णिमा में भगवान विष्णु की उपासना के लिए उत्तम माना जाता है। मान्यता है कि अगर आप कार्तिक पूर्णिमा पर पवित्र नदी में स्नान और दान देते हैं तो आपकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस बार कार्तिक पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त 26 नवंबर को दोपहर 3.53 बजे से लेकर 27 नवंबर को दोपहर 2.45 बजे तक रहेगा. इस अवसर पर भक्तों ने गंगा नदी में आस्था की डुबकी लगाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को ‘कार्तिक पूर्णिमा’ और ‘देव दीपावली’ के अवसर पर शुभकामनाएं दी हैं।

जानें हरिद्वार में हर की पौड़ी में भक्तों ने जलाए दीपक और किए स्नान

हरिद्वार में कार्तिक पूर्णिमा के पवित्र अवसर पर भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने गंगा नदी में पावन स्नान किया। साथ ही देव दिवाली के मौके पर भक्तों ने हरिद्वार में हर की पौड़ी पर 21 हजार दीप जलाए हैं और उत्तराकाशी सुरंग में फंसे मजदूरों के लिए प्रार्थना की है।

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जानें उत्तर प्रदेश का क्या है नजारा

कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा नदी में पवित्र डुबकी लगाई। साथ ही श्रद्धालुओं ने हापुड़ में गंगा नदी में पवित्र स्नान किए हैं।

पीएम मोदी ने दीं शुभकामनाएं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स (पहले ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि श्रद्धा, भक्ति और दैवीय उपासना की भारतीय परंपरा से प्रकाशित पावन पर्व कार्तिक पूर्णिमा एवं देव दीपावली की असीम शुभकामनाएं। मेरी कामना है कि यह पावन अवसर देशभर के मेरे परिवारजनों के जीवन में नई रौनक और स्फूर्ति लेकर आए।

देखें दीपों की रोशनी से जगमगा उठा तमिलनाडु और ओडिशा

कार्तिगई दीपम के त्योहार के अवसर पर तमिलनाडु के कोयंबटूर में ईशा आश्रम हजारों दीपों की रोशनी से जगमगा उठा है। जनता और ईशा स्वयंसेवकों ने ध्यानलिंग और लिंग भैरवी मंदिरों, तीर्थकुंड, नंदी, आदियोगी और ईशा के अन्य स्थानों पर मिट्टी के दीपक जलाकर त्योहार मनाया। वहीं, कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर रेत कलाकार सुदर्शन पटनायक ने ओडिशा के पुरी में फूलों के साथ बोइता (पारंपरिक नाव) की रेत से एक कलाकृति बनाई।

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