World's Dangerous Animal Orca Whale

एक किलर व्हेल, जिसका खाना शार्क और उसके बच्चे, 2 मिनट के अंदर शिकार को मारकर खा जाता कलेजा

World’s Dangerous Animal Orca Whale: समुद्री जीव शार्क को सबसे खतरनाक शिकारी कहते हैं, लेकिन इस शिकारी का शिकार करने वाला जानवर भी है, जिसे इससे भी ज्यादा खतरनाक जानवर कहा जाता है। यह शिकार भी समुद्र के अंदर ही रहता है और पिछले कुछ समय से इन्हें शार्क का शिकार करते देखा जा रहा है। आइए जानते हैं इसके बारे में…

World’s Dangerous Animal Orca Whale: समुद्र के अंदर कई खतरनाक, जहरीले और अजीबोगरीब जानवर हैं, जो पलक झपकते ही अपने शिकार को मारकर खा जाते हैं। समुद्री जीव शार्क को सबसे खूंखार जानवर माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं इस शिकारी का शिकार करने वाला जानवर भी समुद्र के अंदर ही रहता है।

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जी हां, शार्क का भी शिकार होता है और यह शिकार कोई और नहीं, बल्कि किलहर व्हेल Orca है, जो काले-सफेद रंग की व्हेल है। यह व्हेल 2 मिनट के अंदर शार्क को मारकर उसका कलेजा निकालकर खा जाती है। इस किलर व्हेल को बड़ी सफेद रंग की शार्क का शिकार करते और मारते हुए कैप्यर भी किया जा चुका है। दक्षिण अफ़्रीका के तट पर 2 ओर्कास को शार्क का शिकार करते हुए भी देखा जा चुका है।

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2022 में 2 ओर्का को शार्क का शिकार करते देखा गया

शार्क जीवविज्ञानी डॉ. एलिसन टाउनर दक्षिण अफ्रीका के ग्राहमस्टाउन में रोड्स विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हैं। वे पिछले कई सालों से समुद्री जीवों पर रिसर्च कर रहे हैं। वे बताते हैं कि साल 2023 में उन्होंने एक नर किलर व्हेल को देखा, जो 2 मिनट के अंदर शार्क को मारकर उसका लीवर खा गया। पहली बार 2022 में सफेद शार्क का शिकार करने के लिए आपस में भिड़ रहे 2 नर ओर्का की ड्रोन फुटेज कैप्टर की गई थी।

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किलर व्हेल से बचने की कोशिश में शार्क उसे कसकर पकड़ लेती थीं, लेकिन ओर्का ने 2.5 मीटर लंबे किशोर शार्क के बाएं पेक्टोरल पंख को पकड़ लिया और फिर से उसे मार दिया। सेंट एंड्रयूज विश्वविद्यालय के समुद्री स्तनपायी वैज्ञानिक डॉ. ल्यूक रेंडेल कहते हैं कि व्हेल काफी चालाकी से शार्क का शिकार करने माहिर होते हैं।

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जहरीले मांस वाली शार्क का शिकार व्हेल के लिए खतरनाक

डॉ. ल्यूक रेंडेल ने BBC न्यूज़ को बताया कि जिस तरह से व्हेल शार्क का शिकार करती हैं, एक सवाल यह उठाता है कि किलर व्हेल का व्यवहार समुद्री जीव शार्क की आबादी को कैसे प्रभावित कर रहा है?

वैज्ञानिक नहीं जानते कि आखिर व्हेल के इस व्यवहार के पीछे क्या कारण हैं, लेकिन डॉ. टाउनर बताते हैं कि जलवायु परिवर्तन और व्यापार के लिए मछली पकड़ने जैसी मानवीय गतिविधियों के कारण महासागरों पर दबाव पड़ रहा है।

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शार्क का शिकार करने वाली किलर व्हेल के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव भी पड़ सकता है, क्योंकि शार्क का मांस और खून जहरीला होता है, तभी तो उसके हमला करते ही इंसान तक ढेर हो जाता है। किलर व्हेल शार्क के अलावा अफ्रीकी पेंगुइन और फर सील्स का शिकार भी करते हैं।

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किलर व्हेल ओर्का से जुड़े फैक्ट…

  • डॉलफिन और व्हेल की प्रजाति ओर्का व्हेल पूरी दुनिया में पाई जाती हैं। यह व्हेल झुंड बनाकर शिकार करती है।
  • एक नर ओर्का की लंबाई करीब 10 मीटर और वजन 10 हजार किलोग्राम हो सकता है।
  • मादा ओर्का 80 साल तक जीवित रह सकती है। नर ओर्का का पंख 2 मीटर ऊंचा होता है।
  • ओर्का बेहद तेज़ तैरते हैं। इनकी मैक्सिमम स्पीड 54 किलोमीरट प्रति घंटा रिकॉर्ड की गई है।
  • ओर्का सामान्यत: मछली, सील, समुद्री शेर, डॉल्फ़िन, पोरपोइज़, शार्क, समुद्री पक्षियों का शिकार करते हैं।
  • ओर्का जब सोते हैं तो एक आंख बंद करते हैं और आधा दिमाग खुला रखते हैं।
  • बाईं आंख बंद करते हैं तो दिमाग का दायां हिस्सा सोता है। दाई आंख बंद करते हैं तो दिमाग का बायां हिस्सा सोता है।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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