इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका ने शनिवार को ईरान पर हमला किया. इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की अपने कार्यालय में मौत हो गई. ईरानी सरकारी मीडिया ने खामेनेई की मौत की पुष्टि की. ईरान का सुप्रीम लीडर बनने से आठ साल पहले, तत्कालीन राष्ट्रपति खामेनेई की हत्या की कोशिश हुई थी. उस हादसे में वह खुद तो जिंदा बच गए, लेकिन उन्हें पर्मानेंट जख्म मिल गया, जो जिंदगीभर उनके साथ रहा.

साल 1981 की घटना

27 जून, 1981 को, वह ईरान-इराक युद्ध के मोर्चे से लौटने के बाद नमाज के लिए एक मस्जिद में गए थे. नमाज के बाद, उन्होंने अपने अनुयायियों से बात की और उनके सवालों के जवाब दिए.तभी वहां पर एक शख्स आता है, और खामेनेई के सामने एक टेप रिकॉर्डर रखा और एक बटन दबा देता है. करीब एक मिनट बाद, रिकॉर्डर से सीटी जैसी आवाज आने लगी, जिसमें उसमें विस्फोट हो गया.

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फुरकान गुट का 'तोहफा'

टेप रिकॉर्डर की अंदर एक मैसेज लिखा हुआ था, 'इस्लामिक गणराज्य को फुरकान समूह का तोहफा.' फुरकान समूह एक आतंकी संगठन था, जो सत्तारूढ़ मौलवी व्यवस्था का विरोधी था.

बाएं हाथ से लिखना सीखा

अपने दाहिने हाथ, वोकल कॉर्ड और फेफड़ों में चोट लगने के बाद खामेनेई को ठीक होने में कई महीने लगे. उनके कुछ घाव भर गए, लेकन दाहिना हाथ हमेशा के लिए लकवाग्रस्त हो गया. उन्होंने एक बार कहा था कि उन्हें हाथ की जरूरत नहीं है, बस मेरा दिमाग और जुबान काम करती रहें. उन्होंने अपने बाएं हाथ से लिखना सीखा.

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बता दें, 86 वर्षीय खामेनेई ने 35 वर्षों तक ईरान का नेतृत्व किया था. जिससे वह दुनिया के सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले शासकों में से एक बन गए. उनकी मौत ईरान के लिए एक बड़ा झटका है.