पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची अचानक दुनिया भर की सुर्खियों में आ गए हैं. अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी और मिडिल ईस्ट में इजराइल के साथ जारी खींचतान के बीच अराघची ईरान का वो चेहरा बनकर उभरे हैं, जो कूटनीति और सख्त तेवरों के बीच संतुलन बनाना बखूबी जानते हैं. सैयद अब्बास अराघची ईरान की विदेश नीति के सबसे अनुभवी राजनयिकों में से एक हैं, जो वर्तमान में अमेरिका और इजराइल के साथ निपटने में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं. अराघची ने सऊदी अरब को 'भाई' बताते हुए अमेरिकी एयरफोर्स के एक क्रैश प्लेन की तस्वीर साझा कर सीधे तौर पर ट्रंप को चेतावनी दी है.

ईरान के सैन्य ऑपरेशन केवल दुश्मन हमलावरों के खिलाफ

बागची ने अपने कड़े तेवर दिखाते हुए कहा कि ईरान के सैन्य ऑपरेशन केवल उन 'दुश्मन हमलावरों' के खिलाफ हैं, जो न तो अरबों का सम्मान करते हैं और न ही ईरानियों का. अमेरिका पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि जो देश खुद सुरक्षा देने का दावा करते हैं, वे असल में कोई सुरक्षा प्रदान नहीं कर सकते. उन्होंने US एयरफोर्स के क्रैश प्लेन की तस्वीर शेयर कर उन्होंने ट्रंप प्रशासन को साफ इशारा दिया है कि ईरान अब पहले जैसा नहीं रहा.

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राघची ने सऊदी अरब का जिक्र करते हुए कहा कि 'ईरान सऊदी अरब का सम्मान करता है और उसे भाईचारे का देश मानता है. हमारे ऑपरेशन सिर्फ उन दुश्मन आक्रांताओं के खिलाफ हैं जिन्हें न अरबों का सम्मान है और न ईरानियों का. जरा देख लीजिए कि हमने उनके हवाई कमांड का क्या हाल किया है. अमेरिकी बलों को निकालने का वक्त आ गया है.'

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'परमाणु समझौते' के मास्टरमाइंड

5 दिसंबर, 1962 को तेहरान में जन्मे अराघची एक मंझे हुए खिलाड़ी हैं. उन्होंने जापान और फिनलैंड में ईरान के राजदूत के रूप में सेवा दी है. उनकी सबसे बड़ी पहचान साल 2015 के ऐतिहासिक परमाणु समझौते (JCPOA) की बातचीत में रही, जहां उन्होंने मुख्य वार्ताकार की भूमिका निभाई थी. 2024 में राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने उन्हें ईरान का 67वां विदेश मंत्री नियुक्त किया. अराघची फिलहाल इजराइल-अमेरिका के साथ चल रहे क्षेत्रीय तनाव और संभावित युद्धविराम की बातचीत में ईरान का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं.

भारत से गहरे रिश्ते

भारत के लिए भी अराघची एक जाना-पहचाना नाम हैं. मई 2025 में भारत दौरे के बाद, जनवरी 2026 में भी उनके भारत आने की खबरें चर्चा में रहीं. वे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और चाबहार पोर्ट जैसे प्रोजेक्ट्स पर भारत के साथ लगातार संवाद में रहते हैं.