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'हम दोस्त हैं', संकट के बीच ईरान ने दी राहत भरी खबर; होर्मुज से सुरक्षित गुजरेंगे भारतीय जहाज

भारत अपनी 85 प्रतिशत कच्चे तेल जरूरत यहां से आयात करता है. ईरानी नौसेना की गतिविधियों और खदानों से टैंकर रुक गए हैं, जिससे देश में एलपीजी संकट पैदा हो चुका. ऐसे में राजदूत का आश्वासन भारत के लिए राहत भरी खबर है.

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मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध की वजह से तनाव चरम पर है, जिसकी वजह से दुनियाभर में ईंधन संकट को लेकर हड़कंप मचा हुआ है. भारत समेत कई देशों की ईंधन सप्लाई खाड़ी में मौजूद संकरे जलमार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य से की जाती है, जिस पर ईरान ने आक्रामक रुख अपनाया हुआ है. ईरान ने इस रास्ते से गुजरने वाले अमेरिकी जहाजों पर हमले कर रहा है. हालांकि कई मित्र देशों को राहत देते हुए उनके जहाजों को सुरक्षित भेजने की बात कही है, जिसमें से एक भारत भी है.

भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली ने स्पष्ट संकेत दिए कि होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय जहाज बिना किसी भय या खतरे के गुजर सकेंगे. पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘हां, क्योंकि भारत हमारा दोस्त है. आप ऐसा होते हुए अगले कुछ घंटों में देख लेंगे.’ यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान विवाद ने होर्मुज को युद्ध का सेंटर बना दिया. लगभग 30 किलोमीटर चौड़े इस संकरे जलमार्ग से दुनिया का 20 फीसदी तेल-गैस व्यापार होता है.

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भारत के लिए क्यों जरूरी है होर्मुज?


भारत अपनी 85 प्रतिशत कच्चे तेल जरूरत यहां से आयात करता है. ईरानी नौसेना की गतिविधियों और खदानों से टैंकर रुक गए हैं, जिससे देश में एलपीजी संकट पैदा हो चुका. ऐसे में राजदूत का आश्वासन भारत के लिए राहत भरी खबर है. फतहाली ने भारत-ईरान संबंधों की गहराई पर जोर देते हुए कहा ‘हम मानते हैं कि ईरान और भारत के क्षेत्रीय हित समान हैं. दोनों देश दोस्त हैं, साझा आस्था रखते हैं. युद्ध के बाद भारतीय सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में हमारी मदद की.’

पीएम मोदी और ईरान राष्ट्रपति की बातचीत


गौरतलब है कि हाल ही में विदेश मंत्री एस जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची में बातचीत हुई थी. शुक्रवार को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ईरान के राष्ट्रपति ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से फोन पर बात की. ईरान के बयान को कूटनीतिक जीत के तौर पर देखा जा रहा है. 170 भारतीय आर्मेनिया के रास्ते सुरक्षित लौट चुके हैं. होर्मुज से सुरक्षित गुजरान एलपीजी, तेल आयात को पटरी पर ला सकता है.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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