जर्मनी की वाहन निर्माता कंपनी फॉक्सवैगन ने बड़े पैमाने पर लागत कम करने की योजना को मंजूरी दे दी है. कंपनी के निदेशक मंडल (Board of Directors) ने इस योजना को मंजूरी दी है. इसके तहत कंपनी में करीब 50,000 नौकरियों की कटौती की जाएगी. इसके अलावा कंपनी अपने वाहनों के मॉडलों की संख्या भी कम करेगी. योजना के तहत जर्मनी में मौजूद कंपनी के चार संयंत्रों में वाहनों का उत्पादन भी बंद किया जाएगा.
कंपनी की ओर से यह कदम लगातार बढ़ती आर्थिक चुनौतियों के बीच उठाया गया है. फॉक्सवैगन को चीन की वाहन कंपनियों से मिल रही कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है. चीन में कम लागत पर वाहनों का उत्पादन होने के कारण यूरोपीय वाहन कंपनियों पर दबाव बढ़ रहा है. इसके साथ ही अमेरिका की ओर से लगाए गए शुल्क के कारण भी वाहन उद्योग के सामने नई चुनौतियां पैदा हुई हैं.
फॉक्सवैगन के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) ओलिवर ब्लूम ने लागत में कमी लाने की यह योजना पेश की है. कंपनी का कहना है कि इस योजना का उद्देश्य मौजूदा परिस्थितियों में कंपनी को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना और उसकी लागत को कम करना है. कंपनी अपने उत्पादन और कारोबार को बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुसार ढालना चाहती है.
बताया गया है कि पहले से तय 50,000 नौकरियों में कटौती के अलावा नई योजना के तहत भी करीब 50,000 पदों पर असर पड़ेगा. इस तरह फॉक्सवैगन में कुल करीब एक लाख पद खाली हो जाएंगे. हालांकि, कंपनी के इस फैसले का कर्मचारियों के प्रतिनिधियों ने जोरदार विरोध किया है. कर्मचारी प्रतिनिधियों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में नौकरियों में कटौती से कर्मचारियों और उनके परिवारों पर गंभीर असर पड़ सकता है.
फॉक्सवैगन की इस योजना का जर्मनी की प्रांतीय सरकार ने भी विरोध किया है. प्रांतीय सरकार की कंपनी में हिस्सेदारी है. इसके बावजूद कंपनी के निदेशक मंडल ने लागत कटौती की योजना को मंजूरी दे दी. अब इस योजना के तहत कंपनी अपने उत्पादन, मॉडल और कर्मचारियों की संख्या में बड़े बदलाव करने की तैयारी कर रही है.