मिडिल ईस्ट में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के बाद अमेरिकी नौसेना का शक्तिशाली विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन अपने विनाशक जहाजों के बेड़े के साथ ईरान की दहलीज पर तैनात हो गया है. साउथ चाइना-सी से रवाना होकर यह पोत मात्र 10 दिनों के रिकॉर्ड समय में मिडिल ईस्ट पहुंचा है, जो सीधे तौर पर ईरान के भीतर लक्ष्यों पर हमला करने की स्थिति में है.
अभेद्य घेराबंदी और घातक हथियार
USS अब्राहम लिंकन कोई आम जहाज नहीं है. यह गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर, स्टील्थ फाइटर जेट्स और सी-हॉक्स हेलीकॉप्टरों से लैस एक तैरता हुआ किला है. यहां से दागी जाने वाली टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें ईरान के किसी भी कोने को निशाना बना सकती हैं. इसके साथ ही अमेरिका ने अपनी हवाई ताकत को धार देने के लिए जॉर्डन में F-15E स्ट्राइक ईगल्स और कतर में घातक B-52 बॉम्बर्स की तैनाती कर दी है.
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US ने ऐसा बनाया रक्षा कवच
THAAD और पैट्रियट का जाल ईरान के संभावित जवाबी हमले से बचने के लिए अमेरिका ने THAAD और पैट्रियट डिफेंस सिस्टम को खाड़ी देशों (कुवैत, सऊदी, कतर) और इजरायल में सक्रिय कर दिया है. इन्हें इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से हटाकर इतनी तेजी से मिडिल ईस्ट में तैनात किया गया है. जॉर्डन में F-15E स्ट्राइक इगल्स और कतर में B-52 Bombers तैनात किए गए हैं. सुरक्षा के मद्देनजर ईरान की मारक क्षमता के भीतर आने वाले बेस से गैर-जरूरी स्टाफ को भी हटा लिया गया है.
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ईरान की चेतावनी
दूसरी ओर, ईरानी सैन्य कमांडरों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि USS अब्राहम लिंकन ने ईरानी जलक्षेत्र में घुसपैठ की, तो इसे हाइपरसोनिक मिसाइलों से समुद्र में दफन कर दिया जाएगा. यह बयान ऐसे वक्त में आया है, जब अमेरिका और ईरान आमने सामने हैं. अब्राहम लिंकन वर्तमान में गल्फ ऑफ ओमान में तैनात है, जो ईरान के दक्षिणी जलक्षेत्र से सटे अहम समुद्री मार्ग पर स्थित है.