बांग्लादेश में फरवरी महीने में आम चुनाव होने वाले हैं. शेख हसीना की पार्टी, अवामी लीग पर चुनाव में हिस्सा लेने पर बैन लगाया हुआ है. ऐसे में जमात-ए-इस्लामी की संभावित बड़ी जीत को देखते हुए अमेरिका इस कट्टरपंथी पार्टी के साथ अपने संपर्क बढ़ा रहा है. यह खुलासा ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ की रिपोर्ट में हुआ है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी राजनयिकों ने संकेत दिए हैं कि वे इस संगठन के साथ काम करने के लिए तैयार हैं. जमात-ए-इस्लामी एक कट्टरपंथी संगठन है, इसे बांग्लादेश में कई बार प्रतिबंधित किया जा चुका है.
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सीक्रेट मीटिंग में दिए संकेत
1 दिसंबर 2025 को एक अमेरिकी राजनियक ने बांग्लादेशी महिला पत्रकारों के साथ एक बंद कमरे में बैठक की थी. बैठक में राजनयिक ने अनुमान लगाया था कि चुनाव में जमात-ए-इस्लामी अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन करेगी. साथ ही राजनयिक ने कहा था, ‘हम चाहते हैं कि वे हमारे दोस्त बनें.’
टैरिफ की चेतावनी
हालांकि, अमेरिकी अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जमात सत्ता में आकर शरिया कानून लागू करती है या महिलाओं के अधिकारों में कटौती करती है, तो अमेरिका बांग्लादेश पर 100% टैरिफ लगाकर उसे तबाह कर देगा.
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इस मामले पर ढाका में US एम्बेसी की प्रवक्ता मोनिका शी ने कहा कि यह बातचीत ‘एक रूटीन मीटिंग, ऑफ-द-रिकॉर्ड चर्चा’ थी. इसमें कई सियायी पार्टियों पर चर्चा हुई. साथ ही कहा कि अमेरिका किसी एक पॉलिटिकल पार्टी को दूसरी पर तरजीह नहीं देता है और बांग्लादेशी लोगों द्वारा चुनी गई किसी भी सरकार के साथ काम करने की योजना है.
भारत के लिए क्या चिंता?
अमेरिका का यह कदम नई दिल्ली में चिंता पैदा कर सकता है. भारत के लिए जमात हमेशा से सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा खतरा रही है. भारत ने 2019 में ही कश्मीर में जमात-ए-इस्लामी को “अवैध समूह” घोषित किया था. जानकारों का मानना है कि अमेरिका का यह कदम भारत-अमेरिका संबंधों में दरार पैदा कर सकता है, जो पहले से ही व्यापारिक विवादों और क्षेत्रीय मुद्दों के कारण तनावपूर्ण हैं. जमात की सरकार को भारत के साथ रिश्ते ठीक करने में BNP की सरकार के मुकाबले ज्यादा मुश्किल होगी. शेख हसीना के हटने के बाद भी ढाका-नई दिल्ली के रिश्ते खराब हैं.
क्या है जमात-ए-इस्लामी?
इस कट्टरपंथी पार्टी की स्थापना 1941 में इस्लामिस्ट विचारक सैयद अबुल अला मौदूदी ने की थी. इसने पाकिस्तान से बांग्लादेश की आजादी का विरोध किया था. 1971 के युद्ध के दौरान, जमात के बड़े नेताओं ने पाकिस्तानी सरकार का साथ दिया था. यहां तक कि पैरामिलिट्री ग्रुप भी बनाए, जिन्होंने आजाद बांग्लादेश के लिए लड़ रहे हजारों आम लोगों को मार डाला था.
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जब शेख हसीना 2009 में सत्ता में लौटीं, तो जमात के बड़े नेताओं के खिलाफ युद्ध-अपराधों के ट्रायल का आदेश दिए और पार्टी पर बैन लगा दिया था. 2024 में छात्र प्रदर्शनकारियों द्वारा शेख हसीना को हटाए जाने के बाद पार्टी पर से बैन हटा लिया गया.
2024 में हसीना के हटने के बाद से, जमात-ए-इस्लामी ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ कई मीटिंग की हैं. पार्टी के नेता, मोहम्मद रहमान ने जनवरी में अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमीसन ग्रीर से भी वर्चुअली मुलाकात की थी.
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