हमारे साथ जुड़ें X IG YT FB
Trending: CJP ProtestGyanesh KumarSIRBigg Boss 20

ग्रीनलैंड को हड़पना चाहता है अमेरिका! जानें डोनाल्ड ट्रंप के लिए क्यों खास है देश और कितने पैसे देने पड़ेंगे?

Donald Trump Wish For Greenland: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप डेनमार्क के कब्जे वाले ग्रीनलैंड को खरीदना चाहते हैं, अगर सीधे न मिला तो वे हमला करके इसे कब्जा भी सकते हैं। आइए जानते हैं कि आखिर मामला क्या है?

विज्ञापन

Trump Plan to Acquire Greenland: कनाडा के बाद अमेरिका की नजर ग्रीनलैंड पर है। अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को खरीदने, इस अपना कब्जा करने की इच्छा जताई थी, जिसका डेनमार्क ने विरोध किया है और कहा है कि यह बिकने के लिए उपलब्ध नहीं है। यह चर्चा उठी, क्योंकि बीते दिनों ट्रंप ने डेनमार्क का दौरा किया था। इस दौरान ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री म्यूट एगेडे ने उनके सामने डेनमार्क से आजाद होने की इच्छा जाहिर की थी, क्योंकि गीनलैंड पर अभी डेनमार्क का कब्जा है।

वहीं अगर ट्रंप ग्रीनलैंड को खरीदते हैं तो उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। 12.5 बिलियन डॉलर से लेकर 77 बिलियन डॉलर (6 लाख करोड़ रुपये) देने पड़ेंगे। इससे पहले साल 1946 में अमेरिका के राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने डेनमार्क को ग्रीनलैंड के लिए 100 मिलियन डॉलर का सोना ऑफर किया था, लेकिन डेनमार्क ने प्रस्ताव ठुकरा दिया था। ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है, लेकिन यह कोई महाद्वीप नहीं है, बल्कि यूरोप में आता है।

यह भी पढ़ें:क्या शेख हसीना की भतीजी को बर्खास्त करेंगे ब्रिटेन PM, जानें क्यों आ रहा कीर स्टार्मर पर दबाव?

विज्ञापन

ग्रीनलैंड को क्यों कब्जाना चाहता है अमेरिका?

NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, साल 1700 से ही ग्रीनलैंड पर डेनमार्क का कब्जा है। साल 2009 में ग्रीनलैंड को डेनमार्क से आजाद होने का अधिकार मिला, लेकिन क्योंकि ग्रीनलैंड अमेरिका और रूस के बॉर्डर पर बसा देश है, इसलिए अमेरिका ग्रीनलैंड को सुरक्षा की नजर से अहम मानता है। रणनीतिक रूप से सबसे जरूरी जगह मानता है। शीतयुद्ध के समय अमेरिका ने ग्रीनलैंड में एक रडार बेस बनाया था। इसके अलावा ग्रीनलैंड में दुनिया के दुर्लभ खनिजों का भंडार है। इनमें बैटरियां और हाई-टेक डिवाइस बनाए जा सकते हैं।

ग्रीनलैंड 21.6 लाख वर्ग किलोमीटर एरिया में फैला है। 80 प्रतिशत ग्रीनलैंड बर्फ की चादर से ढका है। यहां जाने के लिए वैसे तो समुद्री जहाज एकमात्र रास्ता है। साल 2024 के आखिर में राजधानी नुउक में एक इंटरनेशनल एयरपोर्ट खोला गया था, जिससे जून 2025 से यूनाइटेड एयरलाइंस की सप्ताह में 2 बार नेवार्क से नुउक तक फ्लाइट उड़ती है। ग्रीनलैंड में पश्चिमी तट पर एक बंदरगाह है, जो अमेरिका के समुद्र जहाजों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

विज्ञापन

यह भी पढ़ें:क्या मिडिल ईस्ट में तबाही मचेगी! ईरान समर्थक यमन का क्या है प्लान?

डेनमार्क ने दिया अमेरिका को खास ऑफर

रिपोर्ट के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप के मंसूबों के बारे में पता चलते ही डेनमार्क में हड़कंप मच गया। डेनमार्क ने एक मैसेज भेजकर अमेरिका को ऑफर दिया है। डेनमार्क ने यह स्पष्ट रूप से कह दिया है कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है, लेकिन अगर अमेरिका अपना सैन्य तंत्र यहां मजबूत करना चाहता है तो इसके लिए परमिशन दी जा सकता है, लेकिन वह ग्रीनलैंड को डेनमार्क से आजाद कराकर कब्जा नहीं सकता। डेनमार्क टेबल पर अमेरिका के साथ बातचीत करने के लिए तैयार है, लेकिन ग्रीनलैंड की आजादी पर बात नहीं होगी।

विज्ञापन

संबंधित खबरें

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
... और पढ़ें

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola