हमारे साथ जुड़ें X IG YT FB
Trending: DiwaliIndia blocGyanesh KumarBigg Boss 20

US Midterm Elections: कौन हैं अब्दुल अल सैयद, जिन्होंने बढ़ाई ट्रंप की टेंशन, जीते तो अमेरिकी संसद में रचेंगे इतिहास

Who is Abdul El-Sayed: अमेरिका में जारी मिडटर्म चुनावों के बीच मिशिगन सीनेट सीट पर ऐतिहासिक मुकाबला देखने को मिल रहा है. डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार अब्दुल अल सैयद अगर जीतते हैं तो वह अमेरिकी इतिहास के पहले मुस्लिम सीनेटर बनेंगे. इस अहम सीट पर उनका सीधा मुकाबला ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के माइक रॉजर्स से है.

विज्ञापन
अमेरिका में जारी मिडटर्म चुनाव में मिशिगन सीट पर अब्दुल एल-सय्यद की उम्मीदवारी ने अमेरिकी सियासत में राष्ट्रपति ट्रंप की टेंशन बढ़ा दी है. credit: AI/ANI

Who is Abdul El-Sayed: अमेरिका में 3 नवंबर को हो रहे मिड-टर्म चुनावों के बीच पूरी दुनिया की नजरें एक खास सीट पर टिक गई हैं. यह सीट है मिशिगन राज्य की, जहां अमेरिकी सीनेट का बेहद दिलचस्प मुकाबला चल रहा है. यहां से डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार अब्दुल अल सैयद मैदान में हैं. अगर अब्दुल यह चुनाव जीत जाते हैं, तो वह अमेरिकी इतिहास में पहले मुस्लिम सीनेटर बनकर नया रिकॉर्ड बनाएंगे. मिशिगन में मौजूदा सीनेटर गैरी पीटर्स के रिटायर होने के बाद यह सीट खाली हुई है. डेमोक्रेटिक पार्टी ने यहां से युवा और प्रगतिशील चेहरे अब्दुल एल-सय्यद पर दांव लगाया है. वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से माइक रॉजर्स चुनावी मैदान में हैं.

यह भी पढ़ें : अमेरिका में मिड टर्म चुनाव क्यों, जानें वहां की ‘लोकसभा’ और ‘राज्यसभा’ का पूरा चुनावी गणित?

कौन हैं अब्दुल अल सैयद?

अब्दुल बाहर से आकर अमेरिका में नहीं बसे हैं, बल्कि उनका जन्म मिशिगन के रोचेस्टर हिल्स में ही हुआ था. उनके माता-पिता जरूर मिस्र से अमेरिका आए थे. अब्दुल पेशे से डॉक्टर हैं और स्वास्थ्य विभाग में उच्च पद पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं. चुनावी मैदान में उनके तीन बड़े मुद्दे हैं:

विज्ञापन
  • हर नागरिक के लिए सरकारी स्वास्थ्य बीमा.
  • राजनीति और चुनावों से बड़े उद्योगपतियों के पैसे का दखल खत्म करना.
  • इजराइल को अमेरिका की तरफ से बिना शर्त सैन्य मदद देने पर रोक लगाना.

ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी के लिए क्यों बढ़ गई है टेंशन?

मिड-टर्म चुनावों के नतीजे सीधे तौर पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आगे की नीतियों और सरकार के कामकाज पर असर डालेंगे. अगर संसद के दोनों सदनों में ट्रंप की पार्टी का बहुमत नहीं रहा तो ईरान युद्ध समेत कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू मसलों पर बड़े फैसले लेना उनके लिए बेहद मुश्किल हो जाएगा. दूसरी तरफ, अब्दुल एल-सय्यद की उम्मीदवारी ने अमेरिकी सियासत में नई बहस छेड़ दी है. यूरोप में शरणार्थियों को लेकर ट्रंप पहले ही कड़ा रुख अपनाते रहे हैं और उनके समर्थक भी इस मुद्दे पर काफी मुखर रहे हैं. ऐसे माहौल में सीनेट की दहलीज तक एक मुस्लिम चेहरे का पहुंचना ट्रंप के पारंपरिक कोर वोट बैंक के लिए बड़ा सियासी झटका माना जा रहा है.

डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर की बगावत ने फंसाया पेंच

इस मुकाबले में रोमांच तब और बढ़ गया जब डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर ही फूट देखने को मिली. पार्टी की प्राइमरी में अब्दुल ने जब उम्मीदवारी की दौड़ जीती, तो टिकट की रेस में पिछड़ी नेता नाराज हो गईं. उन्होंने अपनी ही पार्टी के खिलाफ बगावत करते हुए ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार माइक रॉजर्स का समर्थन कर दिया है. अंदरूनी कलह और विरोधी दलों के तीखे हमलों के बावजूद अब्दुल अल सैयद मजबूती से टिके हुए हैं. अब 3 नवंबर के नतीजों से तय होगा कि क्या अमेरिकी संसद के उच्च सदन में पहली बार कोई मुस्लिम नेता पहुंचेगा या रिपब्लिकन पार्टी इस सीट पर कब्जा जमाएगी.

विज्ञापन

अब्दुल अगर जीते तो डोनाल्ड ट्रंप के लिए झटका क्यों?

मिशिगन को अमेरिकी सियासत में ‘स्विंग स्टेट’ माना जाता है, यानी यहां की जनता कभी रिपब्लिकन तो कभी डेमोक्रेटिक पार्टी को चुनती है. हाल के सालों में इस राज्य में मुस्लिम आबादी तेजी से बढ़ी है. मिशिगन का डियरबोर्न इलाका इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां अब अरब मूल के लोगों की बहुसंख्या है. यहां की सड़कों पर अरबी साइनबोर्ड दिखते हैं, मस्जिदें हैं और ईद पर आधिकारिक छुट्टी तक होती है. हाउस में तो इस इलाके से पहले भी मुस्लिम सांसद चुने जा चुके हैं, लेकिन सीनेट की दहलीज पर पहली बार कोई मुस्लिम उम्मीदवार मजबूती से खड़ा है.

राष्ट्रपति ट्रंप अक्सर अपने भाषणों में यह कहते रहे हैं कि अमेरिका का स्वरूप बदल रहा है और वे ऐसा नहीं होने देंगे. ट्रंप जिस तरह यूरोप में शरणार्थियों और मुस्लिम आबादी के बढ़ने पर सवाल उठाते रहे हैं, उसी तरह अगर अब्दुल उनके ही देश की सीनेट में पहुंच जाते हैं, तो यह ट्रंप की राजनीति के लिए बहुत बड़ा सियासी झटका साबित होगा.

विज्ञापन

यह भी पढ़ें : अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में कौन-कौन किस्मत आजमा रहे भारतीय मूल के दिग्गज?

संबंधित खबरें

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
... और पढ़ें

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola