अमेरिका में आज मिडटर्म इलेक्शन (मध्यावधि चुनाव 2026) के मतदान हैं और भारतीय समय के अनुसार शाम 4:30 बजे वोटिंग शुरू होगी. कल 4 नवंबर दिन बुधवार की सुबह मतगणना शुरू होगी, जो कई दिन तक चल सकती है. 10 नवंबर तक चुनाव परिणाम फाइनल होने की उम्मीद है. मुख्य मुकाबला रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के बीच है. इन चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की साख दांव पर लगी है. क्योंकि यह चुनाव उनके पहले 2 साल के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड है और इनसे उनके अगले 2 साल के कामकाज का रूटमैप तय होगा. अगर जनता खुश हुई तो वे अपने तरीके से काम कर सकेंगे और फैसले ले सकेंगे, लेकिन अगर जनता नाराज हुई तो वे न फैसले ले सकेंगे और न ही कोई कानून बना सकेंगे.
अमेरिका में कितने राज्य और कैसे होता मतदान?
बता दें कि अमेरिका में करीब 50 राज्य हैं और जिन्हें जनसंख्या के अनुसार संसद में प्रतिनिधित्व मिलता है. अमेरिका में 3 तरीकों से मतदान होता है, जिसमें एक पोस्टल मेल इन बैलट यानी डाक से मतदान शामिल है. इसके तहत लोग मतदान से पहले ही अपने वोट पोस्ट के जरिए भेज देते हैं. दूसरा अर्ली इन पर्सन वोटिंग यानी समय से पहले व्यक्तिगत मतदान है, जिसमें वोटिंग डे से पहले लोग मतदान केंद्रों पर जाकर वोट डालते हैं. तीसरा वोटिंग डे पर मतदान, जिसके तहत लोग अपने नजदीकी स्थानीय मतदान केंद्रों पर जाकर वोट डालते हैं. क्योंकि अमेरिका में बैलट पेपर वोटिंग होती है, इसलिए यहां मतगणना में कई दिन लग जाते हैं और फाइनल इलेक्शन रिजल्ट आने में भी टाइम लगता है.
चुनाव जीतने के लिए संसद में कितनी सीटें चाहिए?
बता दें कि अमेरिका की संसद को कांग्रेस कहते हैं और इसमें 2 सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव और सीनेट होते हैं. आज निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की 435 सीटों और उच्च सदन सीनेट की 35 सीटों पर मतदान होगा. राष्ट्रपति के 4 साल के कार्यकाल में पहले 2 साल के कार्यकाल के बाद मिडटर्म इलेक्शन कराए जाते हैं, जिसके जरिए सांसदों के अलावा कुछ राज्यों में गवर्नर भी चुने जाते हैं. वर्तमान में डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के पास संसद के दोनों सदनों में बहुमत है. सीनेट में 100 सीटें होती हैं और वर्तमान में रिपब्लिकन के पास 53, डेमोक्रेटिक के पास 45 और 2 निर्दलीय सीटें हैं.
सीनेट में बहुमत के लिए 51 सीटें जरूरी हैं और अगर दोनों दल 50-50 सीटें जीत जाते हैं तो उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का वोट निर्णायक साबित होगा. इस बार सीनेट की 35 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, जिनमें 22 सीटें वर्तमान में रिपब्लिकन और 13 सीटें डेमोक्रेटिक के पास हैं. वहीं हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में बहुमत के लिए 218 सीटें चाहिए और वर्तमान में 435 में से 218 सीटें रिपब्लिकन के पास हैं, लेकिन अगर डेमोक्रेटिक 218 से ज्यादा सीटें इस चुनाव में जीत जाती है तो बहुमत विपक्ष के पास चला जाएगा, जिससे सत्तारूढ़ रिपब्लिकन और डोनाल्ड ट्रंप के लिए मुश्किल खड़ी हो जाएगी.
क्या कहते हैं मिडटर्म चुनाव 2026 के सर्वे के आंकड़े?
कारनेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों द्वारा जारी ‘इंडियन अमेरिकन एटीट्यूड सर्वे’ (IAAS) के आंकड़े बताते हैं कि इस समुदाय का राजनीतिक झुकाव किस ओर है
डेमोक्रेट्स की ओर झुकाव: सर्वे के मुताबिक, करीब 62% से 66% भारतीय-अमेरिकी मतदाता कांग्रेस के चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान करने का इरादा रखते हैं.
ट्रंप और रिपब्लिकन का समर्थन: हाल के वर्षों में हालांकि कंजर्वेटिव मुद्दों और टैक्स नीतियों के चलते डोनाल्ड ट्रंप के प्रति भारतीय-अमेरिकियों का एक छोटा धड़ा आकर्षित हुआ है, और लगभग 30% के करीब मतदाता रिपब्लिकन पार्टी का समर्थन करते हैं.
इसके बावजूद, कुल समुदाय का एक बड़ा हिस्सा अभी भी डेमोक्रेटिक नीतियों के साथ अधिक सहज महसूस करता है.
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव में 4 बड़े मुद्दे…
ईरान युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका में डीजल 70% और पेट्रोल 50% तक महंगा हुआ है. ट्रम्प की अप्रूवल रेटिंग गिरकर 31% पर आ गई है. ईंधन की बढ़ती कीमतें मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के लिए चुनौती हैं. रूस से 3 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा डीजल खरीदने के फैसले पर भी ट्रम्प की आलोचना हो रही है.
इमिग्रेशन और अवैध प्रवासी
ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल के पहले 18 महीनों में करीब 9.8 लाख लोगों को डिपोर्ट किया गया. मेक्सिको बॉर्डर पर अवैध घुसपैठ 95% घटी. लेकिन छापेमारी और बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों को भी निकालने का विरोध हो रहा है. डेमोक्रेट्स का आरोप है कि इससे परिवार बिछड़ रहे हैं, जबकि खेती और निर्माण जैसे क्षेत्रों में मजदूरों की कमी हो सकती है.
ट्रम्प ने टैरिफ से अमेरिकी कंपनियों और नौकरियों को फायदा पहुंचाने का वादा किया था. लेकिन इससे गाड़ियों, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ों और निर्माण सामग्री की कीमतें 12% से 18% तक बढ़ने का दावा है. टैरिफ से अमेरिकी परिवारों का खर्च बढ़ा है और दूसरे देशों के जवाबी टैरिफ से किसानों के सोयाबीन और मक्का कारोबार पर असर पड़ा है.
गर्भपात का अधिकार और महंगा इलाज
केएफएफ के सर्वे के मुताबिक, 68% महिला वोटरों और 18 से 29 साल के 74% युवाओं के लिए गर्भपात का अधिकार बड़ा चुनावी मुद्दा है. डेमोक्रेट्स चाहते हैं कि महिलाओं को गर्भपात कराने का कानूनी अधिकार पूरे देश में मिले. वहीं, रिपब्लिकन चाहते हैं कि हर राज्य खुद तय करे कि वहां गर्भपात की अनुमति होगी या नहीं. वहीं, ओबामाकेयर के तहत 2.13 करोड़ लोग स्वास्थ्य बीमा का लाभ लेते हैं. सरकारी मदद घटने पर बीमा महंगा होने का मुद्दा भी चुनाव में अहम है.
सीनेट की 5 सीटों पर कड़ा मुकाबला
टेक्सास: रिपब्लिकन केन पैक्सटन और डेमोक्रेट जेम्स टैलारिको के बीच मुकाबला बराबरी का है. अक्टूबर के दो सर्वे में दोनों को 49% वोट मिले, जबकि एक अन्य सर्वे में टैलारिको 3.8 पॉइंट आगे हैं.
ओहायो: रिपब्लिकन जॉन हस्टेड का मुकाबला डेमोक्रेट शेरोड ब्राउन से है. सर्वे में ब्राउन 4 से 6 पॉइंट आगे हैं. यह सीट रिपब्लिकन के लिए बहुमत बचाने के लिहाज से अहम है.
नॉर्थ कैरोलाइना: डेमोक्रेट रॉय कूपर सर्वे में 52% वोट के साथ रिपब्लिकन माइकल वाटले से 13 पॉइंट आगे हैं. माइकल को 39% वोट मिले हैं.
मिशिगन: डेमोक्रेट अब्दुल अल-सईद को रिपब्लिकन माइक रोजर्स के मुकाबले मामूली बढ़त मिली है. सर्वे में अल-सईद 50% और रोजर्स 48% पर हैं.
मेन: डेमोक्रेट ट्रॉय जैक्सन सर्वे में 49% वोट के साथ रिपब्लिकन सीनेटर सुसान कॉलिन्स (47%) से आगे हैं. कॉलिन्स को 47% वोट मिले हैं.