अमेरिका में मिडटर्म चुनाव 2026 के लिए कल 3 नवंबर 2026 दिन मंगलवार को मतदान होगा. वोटिंग खत्म होने के बाद 3 नवंबर की रात को यानी भारतीय समय के अनुसार 4 नवंबर की सुबह मतगणना शुरू होगी और रुझान आने लगेंगे, जिसके बाद शाम तक औपचारिक चुनाव परिणाम घोषित होने लगेंगे. अमेरिका में स्टेटवाइज वोटिंग और काउंटिंग के रूल्स अलग-अलग होते हैं, इसलिए अलग-अलग सीटों पर डाक मतपत्रों की काउंटिंग पूरी होने में कई दिन या हफ्ते लग सकते हैं.कैलिफोर्निया में डाक मतपत्रों को काउंटिंग 10 नवंबर तक पूरी हो सकती है. इसलिए मिडटर्म इलेक्शन के फाइनल इलेक्शन रिजल्ट आने में करीब एक हफ्ता लग सकता है.
अमेरिकी संसद की इन सीटों पर चुनाव होंगे?
बता दें कि अमेरिका में संसद यानी कांग्रेस के 2 सदन होते हैं, जिसके सदस्यों का चुनाव जनता के द्वारा किया जाता है, जिससे अमेरिकी संसद में सत्ता का संतुलन तय होगा. एक उच्च सदन है, जिसे अमेरिकी प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव कहते हैं और इसके 435 सदस्य चुनने के लिए चुनाव होंगे. दूसरा निचला सदन, जिसे सीनेट कहते हैं और इसकी 100 में से एक-तिहाई यानी 35 सीटों पर चुनाव होंगे. उच्च सदन में 435 सदस्यों के अलावा 6 नॉन-वोटिंग सदस्य भी होते हैं, जो प्यूर्टो रिको, गुआम, अमेरिकी समोआ और वाशिंगटन डीसी के प्रतिनिधि होते हैं, लेकिन संसद में वोट किसी कानून को लेकर वोट देने का अधिकार उन्हें नहीं होता.
रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के बीच टक्कर
बता दें कि मिडटर्म चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन और जो बाइडेन की डेमोक्रेटिक पार्टी के बीच कांटे की टक्कर है. हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव के सदस्यों का कार्यकाल 2 साल का होता है, इसलिए हर 2 साल में इसके चुनाव होते हैं और इस सदन में हर राज्य को उसकी जनसंख्या के हिसाब से सीटें मिलती हैं. वर्तमान में इस सदन में सबसे ज्यादा सीटें कैलिफोर्निया और टेक्सास के पास हैं. वहीं निचले सदन यानी सीनेट के सदस्यों का कार्यकाल 6 साल का होता है और हर राज्य से 2 सीनेटर चुने जाते हैं. भारत की तरह अमेरिका में कोई कानून बनाने के लिए उच्च और निचले सदन की मंजूरी जरूरी है और फिर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर जरूरी हैं.
चुनाव का दोनों सदनों पर क्या-कैसे असर पड़ेगा?
बता दें कि अमेरिकी की संसद में जिस पार्टी की सीटों का बहुमत होगा, संसद पर उसी का नियंत्रण होगा. हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव का नेतृत्व स्पीकर करते हैं, जो बहुमत वाली पार्टी से होते हैं. इसमें सरकारी विधेयक पेश किए जाते हैं और महाभियोग चलाने का विशेष अधिकार इसके पास होता है. वहीं सीनेट के पास राष्ट्रपति के द्वारा की जाने वाली नियुक्तियों को मंजूरी देने का अधिकार है. अंतरराष्ट्रीय संधियों को मंजूरी देने और महाभियोग के खिलाफ सुनवाई का अधिकार है, लेकिन दोनों सदनों में से किसी एक सदन पर अगर विपक्ष यानी डेमोक्रेटिक का कंट्रोल हो गया तो राष्ट्रपति ट्रंप के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं.
मिडटर्म चुनाव का राष्ट्रपति ट्रंप पर क्या असर पड़ेगा?
बता दें कि अमेरिका में मिडटर्म चुनाव में जनता सरकार के कामकाज का 2 साल का रिपोर्ट कार्ड पेश करती है. अगर जनता काम से खुश होगी तो चुनाव में उनकी पार्टी को बहुमत मिलेगा और संसद पर उनकी सरकार का ही कंट्रोल रहेगा. लेकिन अगर जनता सरकार से नाराज हुई तो विपक्षी दल डेमोक्रेटिक पार्टी को बहुमत मिल सकता है और कांग्रेस पर उसका कंट्रोल हो सकता है. ऐसे में राष्ट्रपति के लिए अगले 2 साल में कोई कानून बनाना और फैसला लेना मुश्किल हो सकता है. संसदीय कमेटियों पर विपक्ष का कंट्रोल होगा के हाथ में चली जाएगी. राष्ट्रपति, मंत्रियों या परिवार सदस्यों के खिलाफ अनियमितताओं की जांच शुरू हो सकती है. राष्ट्रपति पर महाभियोग का खतरा मंडरा सकता है और वे अपनी मर्जी से जजों, राजदूतों या बड़े प्रशासनिक अधिकारियों को नियुक्त नहीं कर पाएंगे.