Iran Nuclear Plants: ट्रंप की धमकी के बाद परमाणु ठिकानों को लेकर ईरान अलर्ट, अमेरिका के हमले से बचाने का क्या बनाया प्लान?

Iran Nuclear Sites: ईरान ने अमेरिका के हमले से अपने परमाणु ठिकानों को बचाने का प्लान बना लिया है। सैटेलाइट तस्वीरों में इसकी झलक दिखी है। ईरान ने अपने परमाणु ठिकानों को बंकर बनाना शुरू कर दिया है और उनकी मरम्मत भी कर दी है।

Iran Nuclear Sites

अमेरिका ने पिछले साल ईरान के 3 परमाणु ठिकानों पर हमला किया था।

Iran Nuclear Plants: अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला करने की धमकी दी हुई है। वहीं धमकी के चलते ईरान भी परमाणु ठिकानों को लेकर अलर्ट मोड में है। ईरान ने अपने परमाणु ठिकानों की मरम्मत शुरू कर दी है। उन्हें अमेरिका के हमले से बचाने के लिए मजबूत किला बनाया जा रहा है। सैटेलाइट तस्वीरों से ईरान की इस तैयारी का सबूत मिला है। इनमें देख सकते हैं कि अमेरिका की सैन्य कार्रवाई से परमाणु ठिकानों को बचाने की प्लानिंग ईरान कर चुका है।

विज्ञापन

परमाणु ठिकानों को मिट्टी और कंक्रीट की दीवारों से ढका

सैटेलाइट फोटो के अनुसार, ईरान ने अपने परमाणु ठिकानों के ऊपर कंक्रीट की ढाल बनाकर उसे मिट्टी से ढक दिया है। परमाणु ठिकानों की सुरंगों के एंट्री गेट को मिट्टी के अंदर दबा दिया है। तेहरान से लगभग 30 किलोमीटर (20 मील) दक्षिण-पूर्व में परचिन कैंपस ईरान का सबसे संवेदनशील सैन्य स्थल है। इजरायल ने अक्टूबर 2014 में इसी कैंपस पर हमला किया था। अब यहां एक अयाताकार इमारत नजर आ रही है, जो परमाणु ठिकाने के ऊपर बनाया गया मिट्टी का ढांचा है।

विज्ञापन

मिट्टी का ताबूत के अंदर दफन परमाणु ठिकाने बने बंकर

विज्ञान और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा संस्थान (ISIS) के अनुसार, ईरान ने परमाणु ठिकानों की सुरंग को 36 मीटर लंबाई और 12 मीटर व्यास वाले कंक्रीट के ढांचे से कवर किया है और इस ढांचे को मिट्टी की दीवारों कवर किया है। पूरी साइट को कंक्रीट और मिट्टी का ताबूत बना दिया है। अब ईरान के परमाणु ठिकाने ऐसे बंकर में बदल गए हैं, जिन्हें पहचानना मुश्किल होगा कि कौन-सी इमारत बंकर है और कौन-सी इमारत परमाणु ठिकाना है। इससे परमाणु ठिकाने हवाई हमलों से बच सकते हैं।

विज्ञापन

इस्फहान परमाणु ठिकानों की सुरंगों में मिट्टी भरी गई

मिली जानकारी के अनुसार, इस्फहान परमाणु ठिकाने पर जून 2025 में अमेरिका ने हमला किया था। इस ठिकाने के अंदर ईरान के यूरेनियन का सबसे ज्यादा स्टॉक है। यह ठिकाना अंडरग्राउंड है और इस तक पहुंचने के लिए 3 सुरंग बनाई गई हैं। ईरान ने इन तीनों सुरंगों को मिट्टी से ढक दिया है। 10 फरवरी को ली गई तस्वीर में तीनों सुरंगें मिट्टी के नीचे दबी हुई दिखाई दे रही हैं। सुरंगों में मिट्टी भरी होने के कारण जमीनी स्तर पर ठिकाने के अंदर पहुंचना अमेरिकी सेना के लिए मुश्किल होगा।

विज्ञापन

नतान्ज की सुरंगें भी मिट्टी में दबाकर किला बनाई गईं

नतान्ज परमाणु ठिकाने की भी किलेबंद की गई है। नतान्ज से लगभग 2 किलोमीटर (1.2 मील) दूर पहाड़ के नीचे बनी सुरंग के अंदर ईरान के 2 यूरोनियम संवर्धन प्लांट हैं। इजरायली संगठन अल्मा रिसर्च एंड एजुकेशन सेंटर के अनुसार, साउथ ईरान के शिराज से लगभग 10 किलोमीटर (6 मील) दूर बना सैन्य अड्डा बेहद संवेदनशील है। यह अड्डा मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागने में सक्षम 25 प्रमुख ठिकानों में से एक है। इजरायल ने इस सैन्य ठिकाने पर हमला किया था।

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
... और पढ़ें
विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ