पश्चिम एशिया में शांति की ओर यूएस और ईरान ने एक कदम और आगे बढ़ाया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका-ईरान समझौते के मसौदे पर सहमति जताते हुए हस्ताक्षर कर दिए हैं.एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, ट्रंप ने बुधवार शाम को वर्साय पैलेस में आयोजित रात्रिभोज के दौरान अमेरिका-ईरान समझौते के मसौदे पर आधिकारिक तौर पर हस्ताक्षर किए.
अमेरिकी सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस 14 पॉइंट के इस ड्राफ्ट समझौते में होर्मुज को फिर से खोलने से लेकर ईरान को आर्थिक प्रतिबंधों से राहत देने सहित कई जरूरी बातें शामिल हैं.
ईरान ने भी की समझौते की पुष्टि
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सरकारी समाचार एजेंसी इरना के हवाले से कहा, ‘अमेरिका-ईरान शांति समझौता राष्ट्रपतियों के हस्ताक्षर के साथ अंतिम रूप ले चुका है. अब समझौते के क्रियान्वयन की परीक्षा का समय है.’ समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर पहले शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होने थे. हालांकि, तेहरान ने कहा है कि जिनेवा में प्रस्तावित बैठक अब भी तय कार्यक्रम के अनुसार आयोजित होगी.
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मसौदा में शामिल 14 अहम शर्तें
- अमेरिका, ईरान और मौजूदा युद्ध में उनके सहयोगी इस एमओयू पर हस्ताक्षर करके लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तत्काल और स्थायी रूप से समाप्त करने की घोषणा करेंगे. दोनों पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ युद्ध या सैन्य कार्रवाई शुरू नहीं करेंगे. बल प्रयोग या उसकी धमकी से बचेंगे. लेबनान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता सुनिश्चित करेंगे. अंतिम समझौते में इन प्रावधानों की पुष्टि की जाएगी.
- अमेरिका और ईरान एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करेंगे. एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे.
- दोनों देश अधिकतम 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते पर बातचीत पूरी करने का प्रयास करेंगे. आपसी सहमति से इस अवधि को बढ़ाया जा सकेगा.
- एमओयू पर हस्ताक्षर होते ही अमेरिका ईरान के खिलाफ अपनी नौसैनिक नाकाबंदी और अन्य बाधाओं को हटाने की प्रक्रिया शुरू करेगा. 30 दिनों के भीतर नाकाबंदी पूरी तरह समाप्त कर देगा. इस अवधि में जहाजों की आवाजाही युद्ध-पूर्व स्तर के अनुरूप बहाल की जाएगी. अंतिम समझौते के 30 दिनों के भीतर अमेरिका ईरान के निकटवर्ती क्षेत्रों से अपनी सैन्य मौजूदगी भी हटाएगा.
- ईरान एमओयू पर हस्ताक्षर के बाद 60 दिनों तक फारस की खाड़ी और ओमान सागर के बीच वाणिज्यिक जहाजों को बिना शुल्क सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक व्यवस्था करेगा. तकनीकी और सैन्य बाधाओं को हटाने के साथ बारूदी सुरंगों को हटाने के बाद 30 दिनों के भीतर सामान्य वाणिज्यिक यातायात बहाल किया जाएगा. ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य के भविष्य के प्रशासन और समुद्री सेवाओं को लेकर ओमान व फारस की खाड़ी के अन्य तटीय देशों के साथ अंतरराष्ट्रीय कानून और तटीय देशों के संप्रभु अधिकारों के अनुरूप बातचीत करेगा.
- अमेरिका अपने क्षेत्रीय साझेदारों के साथ मिलकर ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर की योजना तैयार करेगा. इस योजना को लागू करने की व्यवस्था अंतिम समझौते के हिस्से के रूप में 60 दिनों के भीतर तय की जाएगी. आवश्यक वित्तीय लेनदेन के लिए सभी जरूरी लाइसेंस, छूट और अनुमतियां अमेरिका उपलब्ध कराएगा.
- अमेरिका अंतिम समझौते के तहत तय कार्यक्रम के अनुसार ईरान पर लगाए गए सभी प्रकार के प्रतिबंधों को समाप्त करने का वचन देगा. इसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव, आईएईए बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के प्रस्ताव और अमेरिका के प्राथमिक एवं द्वितीयक एकतरफा प्रतिबंध शामिल होंगे. दोनों देश प्रतिबंधों की समाप्ति के मुद्दे को अत्यंत महत्वपूर्ण मानते हैं और इस पर शीघ्र सहमति बनाने के लिए वार्ता में प्राथमिकता देने की बात कहते हैं.
- ईरान ने दोहराया कि वह परमाणु हथियार हासिल या विकसित नहीं करेगा. संवर्धित यूरेनियम को आईएईए की देखरेख में वहीं नष्ट किया जाएगा. अंतिम समझौता न होने तक ईरान परमाणु कार्यक्रम को आगे नहीं बढ़ाएगा.
- अंतिम समझौता होने तक दोनों देश यथास्थिति बनाए रखेंगे. ईरान अपने मौजूदा परमाणु कार्यक्रम में बदलाव नहीं करेगा और अमेरिका कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा तथा क्षेत्र में अतिरिक्त सैन्य बल तैनात नहीं करेगा.
- एमओयू पर हस्ताक्षर होते ही और प्रतिबंध समाप्त होने तक अमेरिका का वित्त मंत्रालय ईरानी कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और उनसे जुड़े उत्पादों के निर्यात के लिए आवश्यक छूट जारी करेगा. इसमें बैंकिंग, बीमा और परिवहन जैसी संबंधित सेवाएं भी शामिल होंगी.
- अमेरिका ने ईरान के जो फंड या संपत्तियां रोकीं या जब्त की थीं, उन्हें लौटाएगा. ईरान का केंद्रीय बैंक इस राशि से भुगतान कर सकेगा.
- अमेरिका और ईरान इस बात पर सहमत हैं कि एमओयू के सफल क्रियान्वयन और भविष्य के अंतिम समझौते के पालन की निगरानी के लिए एक कार्यकारी तंत्र स्थापित किया जाएगा.
- एमओयू पर हस्ताक्षर होने और इसके पैरा 1, 4, 5, 10 और 11 के लागू होने के बाद, तथा इन उपायों के जारी रहने की स्थिति में, दोनों देश अंतिम समझौते के शेष प्रावधानों पर विशेष वार्ता शुरू करेंगे.
- अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के एक बाध्यकारी प्रस्ताव के माध्यम से समर्थन दिया जाएगा.
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