अमेरिका और ईरान के बीच चल रही भीषण जंग को रोकने की दिशा में एक सकारात्मक खबर सामने आ रही है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों देश मौजूदा युद्धविराम को और आगे बढ़ाने के लिए सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गए हैं. फिलहाल यह युद्धविराम 22 अप्रैल तक लागू है लेकिन समझौते की कोशिशों में लगे मध्यस्थों को और वक्त देने के लिए इसे दो सप्ताह के लिए और बढ़ाया जा सकता है. हालांकि अभी इसकी औपचारिक घोषणा होना बाकी है पर अमेरिकी पक्ष ने संकेत दिए हैं कि बातचीत को अंजाम तक पहुंचाने के लिए शांति की इस अवधि को बढ़ाना बेहद जरूरी है ताकि किसी ठोस नतीजे पर पहुंचा जा सके.
इस्लामाबाद वार्ता के वो तीन विवादित मुद्दे
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई पिछली वार्ता मुख्य रूप से तीन बड़े बिंदुओं पर आकर अटक गई थी जिससे शांति की राह मुश्किल हो गई थी. इन मुद्दों में ईरान का परमाणु कार्यक्रम, सामरिक रूप से महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलसंधि का नियंत्रण और युद्ध के दौरान हुए भारी नुकसान की भरपाई शामिल है. इन जटिल मसलों पर आम सहमति बनाने के लिए अब पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र और ओमान जैसे देश सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. इन मध्यस्थ देशों का लक्ष्य एक ऐसा बीच का रास्ता निकालना है जिस पर वाशिंगटन और तेहरान दोनों राजी हो सकें और क्षेत्र में स्थायी शांति का रास्ता साफ हो सके.
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वर्दी वाली कूटनीति लेकर तेहरान पहुंचे मुनीर
शांति बहाली के इसी अभियान के तहत पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर खुद तेहरान पहुंचे हैं जहाँ वे सैन्य वर्दी में कूटनीति के मोर्चे को संभाल रहे हैं. मुनीर वहाँ ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्छी और उच्च स्तरीय सुरक्षा प्रतिनिधियों के साथ गहन बैठकें कर रहे हैं. इस दौरे का मुख्य उद्देश्य अमेरिका की ओर से भेजे गए खास संदेशों और नए प्रस्तावों को ईरानी नेतृत्व के सामने रखना है. इसके साथ ही मुनीर ईरान की शर्तों को भी अमेरिकी प्रशासन तक पहुंचाने का काम करेंगे ताकि दोनों महाशक्तियों के बीच बने तनाव को कम किया जा सके और रुकी हुई बातचीत को दोबारा पटरी पर लाया जा सके.
मल्टी-फ्रंट डिप्लोमेसी और शहबाज शरीफ का मिशन
शांति के इस मिशन को और मजबूत करने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी जल्द ही तुर्की और सऊदी अरब के दौरे पर जा सकते हैं. इस बार की रणनीति केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें ‘मल्टी-फ्रंट डिप्लोमेसी’ का सहारा लिया जा रहा है. इसके तहत खाड़ी देशों और तुर्की को भी इस प्रक्रिया में शामिल कर एक बड़ा गठबंधन बनाने की तैयारी है जो दोनों पक्षों पर युद्धविराम और समझौते के लिए दबाव बना सके. अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जानकारों का मानना है कि अगर यह साझा प्रयास सफल रहता है तो मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी इस खूनी संघर्ष पर लगाम लगाई जा सकती है.
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