मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच इस हफ्ते के आखिर में इस्लामाबाद एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का केंद्र बन गया है. ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधि एक ही शहर में मौजूद रहेंगे, लेकिन दोनों के बीच किसी भी तरह की प्रत्यक्ष बातचीत की संभावना फिलहाल खत्म होती नजर आ रही है. अमेरिका से ट्रंप की टीम जल्द पाकिस्तान पहुंचेगी. हालांकि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस फिलहाल इस यात्रा में शामिल नहीं होंगे. रिपोर्ट के मुताबिक, अगर बातचीत आगे बढ़ती है तो शायद वो इसमें शामिल होने की प्लानिंग कर सकते हैं. फिलहाल अमेरिका की तरफ से ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और दामाद जेरेड कुशनर पाकिस्तान आ रहे हैं. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची पाकिस्तान पहुंच चुके हैं. वो पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व और अधिकारियों से मुलाकात करेंगे, लेकिन अमेरिकी डेलिगेशन के साथ उनकी कोई बैठक तय नहीं है. ये जानकारी ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाएई ने खुद सोशल मीडिया के जरिए दी.
सीधी बातचीत के लिए तैयार नहीं ईरान
बकाएई ने साफ कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच कोई सीधी मुलाकात नहीं होगी. उन्होंने कहा कि ईरान अपने विचार और प्रस्ताव पाकिस्तान को सौंपेगा, जो आगे अमेरिकी पक्ष तक पहुंचाए जाएंगे. उन्होंने ये भी कहा कि यह पहल क्षेत्र में शांति बहाल करने और अमेरिका की थोपी गई ‘आक्रामक स्थिति’ को खत्म करने के लिए पाकिस्तान की मध्यस्थता का हिस्सा है. इस बार की बातचीत पहले दौर से अलग मानी जा रही है. अप्रैल में हुई शुरुआती बातचीत के दौरान मतभेदों के बावजूद दोनों देशों के बीच आमने-सामने बैठे थे . उस समय अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद गालिबाफ के बीच बातचीत हुई, लेकिन बात नहीं बनी.
ईरान ने रखी अपनी बात
इस बार हालात बदल गए हैं और दोनों देशों के बीच विश्वास में आई गिरावट साफ दिखाई दे रही है. अब हालात ये है कि दोनों पक्ष सीधे संवाद से बच रहे हैं और पाकिस्तान के अधिकारियों के जरिए अपनी बात रखना चाह रहे हैं. ईरान के रुख को और साफ करते हुए तसनीम न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी तरह की सीधी बातचीत का अनुरोध नहीं किया है. ये बयान व्हाइट हाउस के उस दावे के उलट है, जिसमें कहा गया था कि बातचीत की पहल ईरान की ओर से हुई है.
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क्या है ईरान का प्लान?
रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान ने अब तक ट्रंप प्रशासन के साथ नए दौर की बातचीत को मंजूरी ही नहीं दी है. ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका अपनी शर्तें वापस नहीं लेता और मौजूदा तनाव के लिए जिम्मेदारी स्वीकार नहीं करता, तब तक वार्ता आगे नहीं बढ़ सकती. दिलचस्प बात ये है कि इस्लामाबाद दौरे के बाद अराघची का Muscat और Moscow जाने का कार्यक्रम भी तय है. इसे इस संकेत के तौर पर देखा जा रहा है कि अगर पाकिस्तान की मध्यस्थता सफल नहीं होती, तो ईरान और भी ऑप्शन की तलाश कर सकता है.
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