वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो को उठाकर अमेरिका ले जाना सही या गलत? क्या कहता है अंतरराष्ट्रीय कानून

Venezuela US Attack: अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला करके वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करके तख्तापलट कर दिया. अमेरिकी सेना मादुरो को अमेरिका ले आई है और अबर उन पर न्यूयॉर्क की कोर्ट में केस चलेगा, लेकिन अमेरिका का इस तरह की जबरदस्ती करना सही है? ऐसे कई सवाल लोगों के मन में उठ रहे हैं.

Nicolas Maduro

Nicolas Maduro

Venezuela US Attack Inside Story: वेनेजुएला पर अमेरिका का हमला करना और वेनेजुएला को इस तरह घर में घुसकर जलील करते हुए गिरफ्तार करके जबरन अमेरिका ले आना सही है या गलत? क्या अमेरिका को इस तरह किसी देश पर हमला करने का अधिकार है? क्या इस तरह किसी देश के राष्ट्रपति को गिरफ्तार करने का अधिकार है? इस पर अंतरराष्ट्रीय कानून क्या कहता है? अमेरिका और राष्ट्रपति ट्रंप ने घटनाक्रम पर क्या सफाई दी है? आइए इन सवालों के जवाब जानते हैं…

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अमेरिका ने ऐसे चलाया ऑपरेशन

अमेरिका मादुरो को नार्को टेररिस्ट कहता है और उस पर अमेरिका में कोकीन की तस्करी करने का आरोप लगाया है. चेतावनी देने के बावजूद मादुरो नहीं माना तो अमेरिका ने उसे सत्ता से हटाने के लिए वेनेजुएला के खिलाफ एब्सोल्यूट रिजॉल्व ऑपरेशन चलाया. F-18, F-22, F-35 लड़ाकू विमान और B-1 बॉम्बर समेत 150 विमानों से वेनेजुएला की घेराबंदी करके हमला किया. 3 जनवरी दिन शनिवार की रात करीब 10:46 बजे राष्ट्रपति ट्रंप ने ऑपरेशन को मंजूरी दी. करीब सवा 2 घंटे बाद 1 बजे अमेरिकी सेना हमले करते हुए मादुरो के ठिकाने पर पहुंची और मादुरो को गिरफ्तार करके 3:29 बजे ऑपरेशन खत्म करके लौट गई.

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ऑपरेशन के समर्थक और विरोध

वेनेजुएला पर अमेरिका के हमले का समर्थन अर्जेंटीना, कोस्टा रिका, पेरू, कोसोवो, इटली, वेनेजुएला की विपक्षी मारिया कोरिना माचाडो (नोबेल पीस प्राइज विजेता) और एडमुंडो गोंजालेज, अमेरिका में रिपब्लिकन नेता जैसे हाउस स्पीकर माइक जॉनसन आदि ने किया. वहीं रूस, चीन, ईरान, क्यूबा, निकारागुआ, ब्राजील, कोलंबिया, मेक्सिको, चिली, उरुग्वे, बोलिविया, बेलारूस, अमेरिकी डेमोक्रेट्स टिम केन, रूबेन गैलिगो आदि, कुछ अमेरिकी रिपब्लिकन मार्जोरी टेलर ग्रीन, थॉमस मैसी आदि ने विरोध किया. वहीं ब्रिटेन, यूरोपीय यूनियन, कनाडा, स्पेन, नॉर्वे, मलेशिया ने तटस्थ रुख अपनाया.

क्या कहता है अंतर्राष्ट्रीय कानून?

अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार, अमेरिका को किसी देश के कार्यकारी राष्ट्राध्यक्ष को पद से हटाने करने की शक्ति नहीं है. संयुक्त राष्ट्र ने भी अमेरिका के वेनेजुएला पर हमला करने के कदम को देखकर कहा कि अमेरिका का यह रवैया दुनिया के लिए खतरनाक है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का मादुरो को गिरफ्तार करना अक्टूबर 1945 में साइन किए गए संयुक्त राष्ट्र चार्टर का स्पष्ट उल्लंघन है. समझौते के तहत अनुच्छेद 2(4) में प्रावधान किया गया है कि किसी भी देश को अन्य देश के खिलाफ सैन्य बल का प्रयोग करने से परहेज करना चाहिए, लेकिन अमेरिका ने इसका उल्लंघन किया है.

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अमेरिका ने हमले को उचित ठहराया

बता दें कि अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमले को उचित कार्रर्वा ठहराया है. राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो को सैन्य अभियान के तहत गिरफ्तार किया गया है. अमेरिका के न्याय विभाग ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति को गिरफ्तार करने के लिए सैन्य सहायता मांगी थी, जो उपलब्ध कराई गई. मादुरो के खिलाफ अमेरिका में केस दर्ज हैं और वह अमेरिका के न्याय विभाग का आरोपी है, इसलिए उसे गिरफ्तार करना जरूरी था. वेनेजुएला पर कार्रवाई सीमित दायरे में और राष्ट्र हित में की गई है. पिछली सरकारें भी इस तरह की कार्रवाई करती आई हैं और उन्होंने भी उन कार्रवाइयों को तब तक सही ठहराया है, जब तक वे राष्ट्र हित में हों.

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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