मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) से बड़ी खबर आ रही है. रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को खोलने के लिए लाया गया एक बड़ा प्रस्ताव वीटो पावर की भेंट चढ़ गया है. दरअसल, बीते दिन 2 अप्रैल को बहरीन के नेतृत्व में खाड़ी देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया था. इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के समुद्री रास्ते को पूरी तरह खुला रखना और वहां होने वाली बाधाओं को दूर करना था. बहरीन ने मांग की थी कि इस रास्ते को सुचारू बनाने के लिए 'सभी आवश्यक तरीकों' का इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाए. सरल शब्दों में कहें तो, इस प्रस्ताव में ईरान के कड़े विरोध के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की संभावना भी शामिल थी.
चीन और रूस ने लगाया अड़ंगा
खबर है कि इस प्रस्ताव को लेकर सुरक्षा परिषद के गलियारों में काफी खींचतान चली. प्रस्ताव के मसौदे में कई बार बदलाव किए गए, लेकिन विवाद की मुख्य वजह 'बल प्रयोग' वाली भाषा रही. ईरान के करीबी सहयोगी माने जाने वाले रूस और चीन ने अपनी वीटो शक्ति का इस्तेमाल करते हुए इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया. उनका तर्क था कि इस तरह के कदम से इलाके में तनाव और अधिक बढ़ सकता है.
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फ्रांस ने भी जताई असहमति
हैरानी की बात यह रही कि इस बार रूस-चीन के साथ फ्रांस ने भी असहमति दर्ज कराई. हालांकि फ्रांस ने वीटो का इस्तेमाल नहीं किया, लेकिन उसने सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीति पर जोर दिया. फ्रांस ने एक ऐसे गैर-वीटो प्रस्ताव का समर्थन किया जिसमें शांतिपूर्ण तरीके से समाधान निकालने की बात हो.
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अधर में लटका प्रस्ताव
काफी बहस और मतभेदों के बाद स्थिति यह बनी कि इस प्रस्ताव पर अंतिम मतदान तक की नौबत नहीं आई. प्रमुख देशों के विरोध के कारण बहरीन का यह प्रस्ताव आखिरकार अटक गया है. फिलहाल 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को लेकर कूटनीतिक गतिरोध बरकरार है, जिससे वैश्विक तेल सप्लाई और सुरक्षा पर चिंता के बादल मंडरा रहे हैं.