यूक्रेन को अपने ड्रोन ऑपरेशन में बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है. द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, स्टारशील्ड सैटेलाइट इंटरनेट सेवा में रुकावट आने के कारण यूक्रेन के हथियारों से लैस कई ड्रोन अपना कनेक्शन खो बैठे. इससे कई ड्रोन आसमान से नीचे गिर गए और यूक्रेन को 10 लाख डॉलर से ज्यादा कीमत का नुकसान हुआ. रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन के एक बड़े सेना कमांडर ओलेह ने बताया कि पिछले हफ्ते दर्जनों हथियारबंद ड्रोन रूसी ठिकानों की तरफ बढ़ रहे थे. तभी अचानक उनके वीडियो फीड में दिक्कत आने लगी. ड्रोन का जमीन पर मौजूद पायलटों से स्टारशील्ड के जरिए संपर्क टूट गया, जिसके चलते कई ड्रोन गिर गए.
इस परेशानी के कारण ओलेह की यूनिट को करीब तीन दिनों तक लगभग सभी सेना के ऑपरेशन रोकने पड़े. इनमें रूसी कमांड पोस्ट और ईंधन केंद्रों पर हमले भी शामिल थे. इस घटना के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच तनाव बढ़ने की बात सामने आई है. यूक्रेनी अधिकारियों को शक है कि इंटरनेट सेवा पर लगाई गई पाबंदियों के पीछे राजनीतिक वजह हो सकती है.
स्टारशील्ड में रुकावट से यूक्रेन का सेना ऑपरेशन प्रभावित
द न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, शुरुआत में इंटरनेट कनेक्शन में आई दिक्कतों के कारण ड्रोन महज 40 मील प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ते समय भी अपना संपर्क खोने लगे थे. बाद में कनेक्शन में कुछ सुधार हुआ, लेकिन यूक्रेनी अधिकारियों का कहना है कि 100 मील प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार पर उड़ने वाले ड्रोन अब भी रुकावट का सामना कर रहे थे. इसका असर अलग-अलग तरह के ड्रोन पर अलग-अलग पड़ा. कुछ ड्रोन कम रफ्तार पर भी ठीक से काम कर सकते हैं, लेकिन ओलेह की यूनिट के ड्रोन को अपने टारगेट तक पहुंचने के लिए ज्यादा तेज उड़ना पड़ता है.
यूक्रेनी कमांडरों के मुताबिक, इस परेशानी का असर रूसी ड्रोन को रोकने के लिए इस्तेमाल होने वाले इंटरसेप्टर सिस्टम पर भी पड़ा. ये सिस्टम यूक्रेन के शहरों को निशाना बनाने वाले रूसी ड्रोन को रोकने में मदद करते हैं. जेलेंस्की ने कहा कि ड्रोन की रफ्तार पर लगाई गई सीमा से इन सिस्टम के काम में रुकावट आई है. इससे यूक्रेन की आम आबादी को हवाई हमलों से बचाने की क्षमता को लेकर चिंता बढ़ गई. ब्रिगेडियर जनरल आंद्रिय बिलेत्स्की, जिन्होंने हाल ही में ईस्ट यूक्रेन में हजारों सैनिकों की कमान संभाली है, ने बताया कि पहले स्टारशील्ड से जुड़े यूक्रेनी ड्रोन 250 मील प्रति घंटे तक की रफ्तार से उड़ते हुए भी स्थिर कनेक्शन बनाए रखते थे. उनके मुताबिक, 100 मील प्रति घंटे की सीमा पहले से तय थी, लेकिन इसे पहले सख्ती से लागू नहीं किया गया था.
यूक्रेन को शक, क्या राजनीतिक वजह से लगाई गई पाबंदी?
स्टारशील्ड सेवा में आई रुकावट ऐसे समय में सामने आई है, जब कीव और वॉशिंगटन के रिश्तों में तनाव बढ़ रहा है. यूक्रेनी अधिकारियों को शक है कि ट्रंप प्रशासन ने रूस की तेल रिफाइनरियों पर यूक्रेन के हमलों से नाराज होकर ये पाबंदियां लगाई हों. उन्हें यह भी शक है कि अमेरिका इन कदमों के जरिए यूक्रेन पर युद्ध को लेकर समझौता करने का दबाव बना रहा है. यूक्रेन ने अमेरिकी सैन्य खुफिया जानकारी मिलने में कमी, अमेरिकी इंटरसेप्टर मिसाइलों की आपूर्ति में देरी और रूस की बैलिस्टिक मिसाइलों के हमलों की चेतावनी देने वाले सिस्टम में रुकावट की भी शिकायत की है. हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों ने जानबूझकर यूक्रेन को मदद देने से इनकार करने या सेवाओं में रुकावट डालने के आरोपों को खारिज किया है.
स्टारशील्ड, एलन मस्क की स्टारलिंक से जुड़ा एक सैटेलाइट इंटरनेट सिस्टम है. यूरोपीय देश यूक्रेन के लिए इस सेवा का खर्च उठाते हैं. हालांकि, यह सुविधा यूक्रेन की सभी सैन्य यूनिट को उपलब्ध नहीं है. कई यूनिट ड्रोन ऑपरेशन के लिए स्टारशील्ड पर निर्भर हैं, जबकि सामान्य संचार के लिए स्टारलिंक के कनेक्शन का भी इस्तेमाल होता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि यूक्रेनी अधिकारियों ने स्टारशील्ड के साथ-साथ स्टारलिंक सेवा की स्पीड कम होने की भी शिकायत की थी.
ट्रंप प्रशासन ने इंटरनेट सेवा में रुकावट पर क्या कहा?
इस मामले पर अमेरिकी प्रशासन की ओर से अलग-अलग बयान सामने आए. व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि यूक्रेन में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा में कोई बदलाव नहीं किया गया है. वहीं, ट्रंप ने कहा कि इसमें उनकी कोई हाथ नहीं था. उनके मुताबिक, उन्हें जो जानकारी मिली थी, उसके अनुसार सेवा पहले की तरह ही काम कर रही थी. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बाद में माना कि स्टारलिंक की सेवा की स्पीड में कुछ कमी आई थी. रुबियो ने इस आरोप को भी खारिज किया कि वॉशिंगटन ने जानबूझकर यूक्रेन को सहायता देने से इनकार किया. रविवार को अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने एनबीसी के कार्यक्रम ‘मीट द प्रेस’ में कहा कि ट्रंप और रुबियो दोनों ने साफ तौर पर इस बात से इनकार किया है कि प्रशासन के किसी व्यक्ति ने इंटरनेट सेवा में रुकावट की थी. उन्होंने जेलेंस्की की ओर से लगाए गए आरोप को ‘बहुत गैर-जिम्मेदाराना’ बताया.
यूक्रेनी सैनिकों को दोबारा रुकावट आने का डर
कनेक्टिविटी में सुधार के बावजूद यूक्रेनी कमांडरों की चिंता खत्म नहीं हुई है. उन्हें डर है कि इंटरनेट सेवा पर दोबारा पाबंदियां लग सकती हैं या सैटेलाइट कनेक्शन अचानक पूरी तरह बंद हो सकता है. यूक्रेन इंटरनेट के दूसरे ऑप्शन ढूंढ रहा है, लेकिन द न्यूयॉर्क टाइम्स से बातचीत में कमांडरों ने कहा कि इस काम में सैनिकों का समय और ध्यान बंट रहा है. इससे उनका ध्यान सीधे युद्ध के मैदान में चल रहे ऑपरेशन से हट रहा है. ओलेह ने बताया कि कनेक्शन टूटने के बाद सैनिकों ने घबराहट में लगातार फोन किए. वे ड्रोन का रास्ता बदलने और सैन्य उपकरणों को बचाने की कोशिश कर रहे थे. उन्होंने याद किया कि कुछ सैनिकों को लगा कि उन्हें बीच में अकेला छोड़ दिया गया है. ओलेह के मुताबिक, इस घटना से यूक्रेन को अमेरिका को अपने सहयोगी के रूप में देखने की उम्मीदों पर फिर से विचार करने की जरूरत महसूस हुई. यूक्रेन की 23वीं असॉल्ट रेजिमेंट में कंपनी कमांडर लेफ्टिनेंट यूरी बुटुसोव ने भी कहा कि इंटरनेट कनेक्शन की गति धीमी होने से उनकी यूनिट के सैन्य ऑपरेशन पर काफी असर पड़ा.
बुटुसोव ने द न्यूयॉर्क टाइम्स से कहा, ‘स्टारलिंक के बिना इस दिन रूस के कई लोगों की जान बची और उसके कई ट्रक भी बच गए. दुर्भाग्य से ऐसा हुआ.’उन्होंने आगे कहा कि यूक्रेन को इसकी कीमत सिर्फ पैसों के नुकसान के रूप में नहीं चुकानी पड़ी, बल्कि इसमें सैनिकों की जान का जोखिम भी शामिल था. उनके शब्दों में, ‘यह हमारे लिए बहुत बड़ी कीमत है और इससे कहीं ज्यादा खून बहता है, हमारा खून.’
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