मध्य पूर्व में जारी भीषण तनाव और खामेनेई की मौत के बाद दुनिया भर में तेल की किल्लत का डर गहरा गया है. इसे देखते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसेना की तैनाती का बड़ा ऐलान किया है. ट्रंप ने साफ किया है कि ऊर्जा की ग्लोबल सप्लाई को रुकने नहीं दिया जाएगा. उन्होंने ‘यूनाइटेड स्टेट्स डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन’ को निर्देश दिया है कि खाड़ी से गुजरने वाले जहाजों को राजनीतिक जोखिम बीमा और वित्तीय सुरक्षा प्रदान की जाए. ट्रंप का यह फैसला उन शिपिंग कंपनियों को भरोसा देने के लिए है जो जंग के डर से इस समुद्री रास्ते का उपयोग करने से कतरा रही हैं.
अमेरिकी नौसेना करेगी तेल टैंकरों का एस्कॉर्ट
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर चेतावनी देते हुए कहा कि अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो अमेरिकी नौसेना व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों को सुरक्षा घेरे में लेकर होर्मुज के रास्ते बाहर निकालेगी. उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका की सैन्य और आर्थिक ताकत दुनिया में सबसे महान है और किसी भी कीमत पर तेल का प्रवाह सुनिश्चित किया जाएगा. यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब होर्मुज जलडमरूमध्य लगातार चौथे दिन भी प्रभावी रूप से बंद है और वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 82.29 डॉलर के पार पहुंच गई हैं. होर्मुज दुनिया का सबसे बड़ा ‘एनर्जी चोकपॉइंट’ है, जिसके बंद होने से दुनिया भर में हाहाकार मच सकता है.
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खामेनेई की मौत और ईरान का भीषण पलटवार
इस तनाव की असली जड़ 28 फरवरी को हुए वे हमले हैं जिनमें इजरायल और अमेरिका ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई समेत कई बड़े सैन्य अधिकारियों को खत्म कर दिया था. इस घटना के बाद से ही पूरा क्षेत्र सुलग रहा है. जवाब में ईरान ने भी अपनी पूरी ताकत झोंक दी है और खाड़ी में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों से हमला किया है. ईरान ने न केवल इजरायल बल्कि बहरीन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों को भी निशाना बनाया है. इस जवाबी कार्रवाई ने पूरे मिडिल ईस्ट को युद्ध के मैदान में बदल दिया है और प्रवासियों के लिए बड़ा खतरा पैदा हो गया है.
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराता संकट
होर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता बंद होने से न केवल तेल बल्कि प्राकृतिक गैस की सप्लाई भी पूरी तरह ठप पड़ने के कगार पर है. ट्रंप का मानना है कि यदि इस रास्ते को सेना की मदद से नहीं खोला गया तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी. वाशिंगटन अब अपने आर्थिक और सैन्य संसाधनों का इस्तेमाल कर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्थिरता लाने की कोशिश कर रहा है. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी नौसेना के सीधे हस्तक्षेप से ईरान के साथ टकराव और भी हिंसक हो सकता है. अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ट्रंप की यह फौजी ताकत तेल के बाजार को मंदी की चपेट में आने से बचा पाएगी या नहीं.
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