अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में राष्ट्रपति द्वारा आपातकालीन शक्तियों के तहत लगाए गए टैरिफ को अवैध करार दे दिया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि टैरिफ असल में एक तरह का टैक्स होता है और अमेरिकी संविधान के अनुसार टैक्स लगाने का अधिकार सिर्फ कांग्रेस के पास है, राष्ट्रपति के पास नहीं. प्रशासन ने तर्क दिया था कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत वे आपात स्थिति में ऐसे कदम उठा सकते हैं, लेकिन अदालत ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया. इस फैसले से यह साफ हो गया है कि राष्ट्रपति अपनी मर्जी से असीमित व्यापारिक अधिकार इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं.
शक्तियों के बंटवारे का सख्त ढांचा
अमेरिकी लोकतंत्र में शक्तियों का बंटवारा बहुत बारीकी से किया गया है जिसे ‘सेपरेशन ऑफ पावर्स’ कहा जाता है. संविधान के अनुसार कांग्रेस का काम कानून बनाना और टैक्स तय करना है, जबकि राष्ट्रपति की जिम्मेदारी उन कानूनों को लागू करना है. न्यायपालिका का मुख्य कार्य कानून की सही व्याख्या करना और यह देखना है कि सरकार का हर कदम संविधान के दायरे में है या नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में ‘मेजर क्वेश्चन डॉक्ट्रिन’ का हवाला देते हुए कहा कि बड़े आर्थिक प्रभाव वाले फैसलों के लिए संसद की साफ मंजूरी जरूरी है. राष्ट्रपति शांति काल में अपनी मर्जी से व्यापारिक नीतियां नहीं थोप सकते हैं.
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क्या होगा अगर ट्रंप आदेश न मानें?
अक्सर यह सवाल उठता है कि अगर कोई ताकतवर राष्ट्रपति सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मानने से इनकार कर दे तो क्या होगा. अमेरिकी व्यवस्था में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय अंतिम और सर्वोपरि होता है. राष्ट्रपति किसी भी कार्यकारी आदेश के जरिए अदालत के फैसले को पलट नहीं सकते हैं. अगर वे दोबारा उसी कानूनी आधार पर वही टैरिफ लगाने की कोशिश करते हैं जिसे कोर्ट असंवैधानिक कह चुका है, तो यह सीधे तौर पर संविधान का उल्लंघन माना जाएगा. अमेरिकी कानून में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है जो राष्ट्रपति को सुप्रीम कोर्ट के ऊपर खड़े होने की इजाजत देती हो.
संवैधानिक संकट और महाभियोग का खतरा
हालांकि सुप्रीम कोर्ट के पास अपनी कोई सेना या पुलिस नहीं होती, लेकिन उसके आदेशों का पालन करना अनिवार्य है. अगर राष्ट्रपति खुलेआम अदालत की अवमानना करते हैं, तो यह एक गंभीर संवैधानिक संकट पैदा कर देगा. ऐसी स्थिति में संसद यानी कांग्रेस की भूमिका बढ़ जाती है और राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है. राष्ट्रपति के पास अब केवल यही रास्ता बचा है कि वे कांग्रेस से नया कानून पास करवाएं या व्यापार नीति के अन्य कानूनी विकल्पों की तलाश करें. फिलहाल इस फैसले ने यह साबित कर दिया है कि अमेरिका में कानून सर्वोपरि है.
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