अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी युद्ध को लेकर बड़ा बयान दिया है. ट्रंप का कहना है कि अमेरिकी सैन्य हमलों में ईरान की सैन्य ताकत लगभग खत्म हो चुकी है. उन्होंने कहा कि ईरान की सेना, नौसेना और वायुसेना का वजूद खत्म हो गया है. उन्होंने कहा कि अमेरिका का सैन्य अभियान अभी भी जारी रहेगा और जरूरत पड़ने पर इससे भी बड़ा एक्शन लिया जा सकता है. ट्रंप ने ये बयान पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिया. उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाया है और इसके परिणाम साफ दिखाई दे रहे हैं. उनके मुताबिक अमेरिकी सेना ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को भारी नुकसान पहुंचाया है.
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'बिना डरे होर्मुज स्ट्रेट का इस्तेमाल करें'
ट्रंप ने कहा कि ईरान के पास मौजूद कई युद्धपोत और सैन्य संसाधन अब नष्ट हो चुके हैं. उन्होंने कहा कि ईरान के पास 32 जहाज थे और अब वो सभी समुद्र की तलहटी में पहुंच चुके हैं. इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि ईरान का मिलिट्री कम्युनिकेशन सिस्टम भी तबाह हो चुका है. ट्रंप ने ग्लोबल तेल आपूर्ति के अहम मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर भी बयान दिया. उन्होंने कहा कि तेल कंपनियों बिना डरे इस रास्ते का इस्तेमाल करें और किसी भी तरह से घबराएं नहीं. अमेरिकी राष्ट्रपति ने ये भी दावा किया कि ईरान की राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व को भी बड़ा नुकसान पहुंचा है. ट्रंप के मुताबिक ईरान के नेताओं के दो सेट खत्म हो चुके हैं और अब तीसरे नेतृत्व समूह की बारी है. उन्होंने कहा कि अमेरिका की कार्रवाई के कारण ईरान की कमांड संरचना कमजोर हो गई है और देश की सैन्य क्षमता काफी घट गई है.
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ईरान की लीडरशिप पर भी हमला
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को ईरान के खिलाफ कार्रवाई इसलिए करनी पड़ी क्योंकि ईरान के हमलों में अमेरिकी सैनिकों को नुकसान हो रहा था. उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान समर्थित समूह सड़क किनारे बम लगाकर अमेरिकी सैनिकों को निशाना बना रहे थे. ट्रंप के मुताबिक इन हमलों में कई सैनिक मारे गए या गंभीर रूप से घायल हुए. उन्होंने कहा कि अमेरिका लंबे समय तक इसे सहन नहीं कर सकता था, इसलिए जवाबी कार्रवाई जरूरी थी. इस दौरान ट्रंप ने अमेरिकी सेना की तारीफ भी की. उन्होंने कहा कि अमेरिकी सैनिक बेहद बहादुरी और दक्षता के साथ ऑपरेशन चला रहे हैं और उनकी वजह से अमेरिका को बड़ी सफलता मिली है. ट्रंप ने ये भी कहा कि अमेरिका ने बी-2 बॉम्बर्स जैसे एड्वांस हथियारों का इस्तेमाल करते हुए ईरान की परमाणु क्षमता को भी निशाना बनाया है.