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ट्रंप का बड़ा दावा, US के व्यापार घाटे में 78% की भारी गिरावट, टैरिफ नीति को बताया 'गेम चेंजर'

डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि टैरिफ नीतियों की वजह से अमेरिका का व्यापार घाटा 78 प्रतिशत कम हुआ है. उन्होंने इसे दशकों बाद मिली बड़ी आर्थिक सफलता करार दिया है.

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि देश के व्यापार घाटे में 78 प्रतिशत की भारी कमी आई है. ट्रंप ने इसका पूरा श्रेय अपनी सरकार द्वारा विभिन्न देशों और कंपनियों पर लगाए गए टैरिफ यानी आयात शुल्क को दिया है. उन्होंने इसे दशकों में होने वाली पहली बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि इस साल के अंत तक अमेरिका का व्यापार सकारात्मक स्थिति में पहुंच जाएगा. ट्रंप ने पिछले साल 2 अप्रैल को ‘लिबरेशन डे’ के तहत करीब 100 देशों पर 10 से 50 प्रतिशत तक के टैरिफ लगाए थे, जिसे उन्होंने अमेरिका की आर्थिक स्वतंत्रता की घोषणा बताया था.

आंकड़ों में उतार-चढ़ाव और असलियत

भले ही राष्ट्रपति इस गिरावट का जश्न मना रहे हों, लेकिन व्यापार के ताजा आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं. पिछले साल नवंबर के महीने में अमेरिका का व्यापार घाटा फिर से बढ़कर 56.8 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया था, जो उससे पिछले महीने की तुलना में करीब 95 प्रतिशत ज्यादा था. वाणिज्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार निर्यात में 3.6 प्रतिशत की गिरावट आई जबकि आयात 5 प्रतिशत तक बढ़ गया. अर्थशास्त्रियों का मानना है कि घाटे में आई शुरुआती कमी केवल सोने जैसे कुछ खास उत्पादों के व्यापार में आए अस्थायी बदलावों के कारण थी. हकीकत में 2025 के शुरुआती 11 महीनों में कुल व्यापार घाटा पिछले साल के मुकाबले 4.1 प्रतिशत अधिक ही रहा है.

यह भी पढ़ें: मध्य पूर्व में कल हो सकता है ‘महायुद्ध’ का शंखनाद, ईरान का समझौते से इनकार, ट्रंप बोले- हम जंग के लिए तैयार

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चीन और यूरोपीय संघ के साथ बदलती स्थिति

ट्रंप प्रशासन की इस टैरिफ रणनीति ने अमेरिका के व्यापारिक रिश्तों को पूरी तरह बदल दिया है. रिपोर्ट के अनुसार जनवरी से नवंबर के बीच चीन के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा 189 बिलियन डॉलर रहा, जो अब यूरोपीय संघ के साथ होने वाले घाटे से भी कम हो गया है. इसका मतलब है कि अब अमेरिका का सबसे बड़ा व्यापार घाटा चीन के बजाय यूरोप के साथ है. वर्तमान में अमेरिका में प्रभावी टैरिफ दर करीब 17 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो साल 1932 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है. इस नीति ने वैश्विक बाजार में भारी हलचल पैदा कर दी है और व्यापार प्रवाह में काफी अस्थिरता देखी जा रही है.

कानूनी अड़चनें और भविष्य की रणनीति

राष्ट्रपति की इस टैरिफ नीति के सामने अब बड़ी कानूनी चुनौती खड़ी हो गई है. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट जल्द ही इस पर फैसला सुनाने वाला है कि क्या सरकार 1970 के दशक के आपातकालीन कानून का इस्तेमाल करके इस तरह के टैक्स लगा सकती है या नहीं. अगर अदालत का फैसला सरकार के खिलाफ आता है, तो भी व्हाइट हाउस ने संकेत दिए हैं कि वे इन शुल्कों को बनाए रखने के लिए दूसरे कानूनी रास्ते खोजेंगे. फिलहाल ट्रंप प्रशासन अपनी नीतियों पर अडिग नजर आ रहा है, जबकि वैश्विक व्यापार जगत की नजरें सुप्रीम कोर्ट के फैसले और इसके वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर पर टिकी हुई हैं.

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लेखक के बारे में

Raja Alam

राजा आलम वर्तमान में News 24 हिंदी (B.A.G. Network) में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में चार वर्षों के अनुभव के साथ नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर बारीकी से लेखन कर रहे हैं. पत्रकारिता की नींव देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU), अलीगढ़ से रखी, जहां से राजा आलम ने पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद, हिंदी लेखन में गहराई को और विस्तार दिया जब राजा ने जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से हिंदी साहित्य में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की. हर रोज़ कुछ नया सीखना और पाठकों तक सही, निष्पक्ष और भरोसेमंद खबर पहुंचाना उनका मुख्य उद्देश्य रहा है. राजा के लेखन में आपको पत्रकारिता की गंभीरता के साथ-साथ पाठकों से जुड़ने वाली सरल भाषा और कंटेंट की विविधता दोनों मिलेंगे.
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