पठारी देश तिब्बत में आए जोरदार भूकंप ने भयंकर तबाही मचाई है. रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 7 रही, जिसके झटके भयानक तरीके से लगे. भूकंप ने करीब 16 लोगों की जान ली है और 45 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं, जिनमें से कई लोगों की हालत नाजुक बनी हुई है. सबसे ज्यादा नुकसान नागकू शहर में हुआ है, जहां भूकंप से करीब 340 घर ढह गए और लोग बेघर हो गए. राहत और बचाव दलों ने फील्ड में उतरकर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया. मृतकों के शव अस्पताल पहुंचाए गए और घायलों को अस्पताल में भर्ती करा उनका उपचार कराया गया. विस्थापितों के लिए टेंट लगाए गए हैं.
भूकंप आने के बाद कई इलाकों में बिजली ठप
नागकू प्रशासन के अधिकारियों ने नुकसान की पुष्टि की है और बताया कि भूकंप से कई घर ढह गए, जिसके मलबे में फंसे लोगों के रेस्क्यू किया गया है. भूकंप प्रभावित लोगों को सुरक्षित जगहों पर पुलिस और दमकल वाहनों की मदद से शिफ्ट किया गया है. भूकंप के झटके नागकू के अलावा बाकेन, कमदो और न्यिंगची शहरों में भी महसूस हुए. वहीं भूकंप से इन इलाकों में बिजली ठप हो गई और चट्टानें गिरने से सड़कें बंद हो गईं. इसलिए भूकंप से प्रभाावित ऊंचाई वाले इलाकों में राहत कर्मियों को पहुंचने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी. लेकिन कठिनाइयों के बावजूद बचाव दल मौके पर पहुंचे.
भूकंप आने के बाद लोगों में दहशत का माहौल
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, भूकंप का केंद्र राजधानी ल्हासा के नागकू शहर से 191 किलोमीटर दूर पूर्व-उत्तर-पूर्व दिशा में बाकेन काउंटी में 18 किलोमीटर की गहराई में मिला. भूंकप स्थानीय समय के अनुसार रात करीब साढ़े 10 बजे आया था, जिससे लोगों में अफरा-तफरी मच गई थी. यह भूकंप पिछले 5 साल में तिब्बत में आया सबसे बड़ा भूकंप था. अगस्त में नेपाल-चीन बॉर्डर के पहाड़ी इलाकों में आई जलप्रलय ने तिब्बत में 1400 से ज्यादा लोगों की जान ली थी. 2023 में चीन के पास के पहाड़ी प्रांत गांसू में 6.2 तीव्रता का भूकंप आया था, जिससे 120 लोगों की मौत हुई थी.
तिब्बत में क्यों आते हैं भूकंप जो मचाते तबाही?
बता दें कि तिब्बत भारतीय और यूरेशियाई टेक्टोनिक प्लेटों पर बसा है. वैज्ञानिकों का अध्ययन कहता है कि 50 मिलियन वर्ष पहले भारतीय प्लेट उत्तर की ओर खिसकी थीं और यूरेशियाई प्लेट्स से टकराई थीं. आज भी दोनों प्लेट्स आपस में टकरा रही हैं और हर साल 50-60 मिमी की स्पीड से भारतीय प्लेट्स यूरेशियन प्लेट्स के नीचे धंस रही हैं, जिसके चलते घर्षण होने से तनाव पैदा होता है और तरंगें निकलती हैं, जो धरती की तरफ भूकंप के रूप में आती हैं.