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9 महीने 13 दिन, Baby Feet, नवजात शिशु...क्या सुनीता विलियम्स लेंगी नया 'जन्म'? जानें कैसा होगा शरीर

सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर आज धरती पर लौट आएंगे, लेकिन चर्चा है कि 9 महीने 13 दिन बाद अंतरिक्ष से, जीरो ग्रैविटी से लौटने पर उनका शरीर बेहद कमजोर होगा, जैसे एक नवजात का होता है, जब वह अपनी मां के गर्भ से बाहर आता है। उनके पैर भी नवजात शिशु जैसे होंगे, जिस वजह से धरती पर उतरते ही खुद से चल नहीं पाएंगे।

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Sunita Williams

भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स आज अंतरिक्ष से धरती पर लौट रही हैं। पूरी दुनिया की नजर इस वापसी पर टिकी है। सुनीता विलियम्स को लेकर आ रहा ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से डॉक हो चुका है और 27000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धरती की तरफ बढ़ रहा है, लेकिन वापसी के इस मिशन में खतरा भी है, क्योंकि पहली चुनौती सेफ लैंडिंग की है। दूसरा चैलेंज अंतरिक्ष से लौटने के बाद सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर की हेल्थ और जिंदगी का है, जो नॉर्मल करने और धरती की ग्रैविटी के अनुसार ढलने में कई महीने लग जाएंगे।

अंतरिक्ष की दुनिया में पिछले कई दिन से चर्चा चल रही है कि अंतरिक्ष से 9 महीने 13 दिन बाद लौटने वाली सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर अगर सुरक्षित लैंड हो जाते हैं तो उन्हें नया जीवन मिलेगा। उनका फिर से जन्म होगा, क्योंकि उनका शरीर एक नवजात बच्चे जैसा होगा, जो बच्चे की तरह ही विकसित होगा और कुछ महीनों में वे दोनों नॉर्मल हो जाएंगे। यह स्थिति ठीक वैसे होगी, जैसे 9 महीने मां के गर्भ में रहने के बाद बच्चे का जन्म होता है, उसी तरह की स्थिति दोनों अंतरिक्ष यात्रियों की होगी। आइए नवजात जैसे शरीर वाली थ्योरी पर विस्तार से बात करते हैं…

 

नवजात बच्चों जैसे पैर हो जाएंगे

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, नासा के पूर्व अंतरिक्ष यात्री लेरॉय चियाओ बताते हैं कि सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर के पैर 9 महीने 13 दिन अंतरिक्ष में रहने के कारण बेबी फीट बन गए हैं। इसलिए वे धरती पर खुद से चल नहीं पाएंगे। यह ठीक वैसे होगा, जैसे मां के गर्भ से निकलकर बच्चे को चलना नहीं आता। उसे खड़ा होना और चलना सीखने में कई महीने लग जाता हैं, ठीक उसी तरह सुनीता और बुच को भी खुद से खड़े होने और चलना सीखने में समय लगेगा।

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अंतरिक्ष में बहुत ज्यादा समय तक रहने के कारण अंतरिक्ष यात्री के पैर नवजात के पैरों की तरह नरम हो जाते हैं। जब इंसान धरती पर चलता है तो पैरों को गुरुत्वाकर्षण और घर्षण के रूप में प्रतिरोध झेलना पड़ता है, जिससे तलवों की त्वचा मोटी हो जाती है, जो चलना आसान बनाती है, लेकिन अंतरिक्ष में वह मोटी त्वचा उतर जाती है और तलवे बेहद नरम कोमल हो जाते हैं, जैसे नवजात के होते हैं। इस नरम त्वचा को कठोर त्वचा बनने या बनाने में कुछ हफ़्ते से लेकर महीनों तक लग सकते हैं, जैसे बच्चे को लगते हैं।

 

कमजोर हड्डियां और मांसपेशियां

रिपोर्ट के अनुसार, सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर के न केवल पैर बच्चों जैसे होंगे, बल्कि उनकी हड्डियां, ऊत्तक, कोशिकाएं और मांसपेशियां भी कमजोर होंगी, जैसे नवजात बच्चे की हड्डियां, ऊत्तक, कोशिकाएं और मांसपेशियां कच्ची होती हैं। जरा-सी झटका लगते ही टूट जाती हैं, क्योंकि अंतरिक्ष में हर गुजरते महीने के साथ उनके शरीर में हड्डी का घनत्व एक प्रतिशत कम होता गया। दोनों अंतरिक्ष यात्रियों में खून की कमी हो सकती है। उनका दिल और दिमाग भी नॉर्मल नहीं होगा।

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उनकी नजर भी कमजोर होगी, वे साफ-साफ नहीं देख पाएंगे। वे मस्तिष्क पर दबाव बढ़ने से स्पेसफ्लाइट एसोसिएटेड न्यूरो-ऑकुलर सिंड्रोम (SANS) नामक विकार का शिकार हो सकते हैं। अंतरिक्ष में रहने के कारण उनका दिल भी अंडाकार से गोल हो चुका होगा। उनकी नसें सिकड़ चुकी होंगी। ब्लड की कमी के कारण ब्लडप्रेशर कंट्रोल करना मुश्किल हो सकता है। इसलिए चक्कर आ सकते हैं, उल्टियां लग सकती हैं और वे बेहोश हो सकते हैं।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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