नेपाल और बांग्लादेश के बाद सर्बिया में छात्र आंदोलन सत्ता बदलने में कामयाब हो गए हैं. जी हां, 2 साल से चल रहे छात्रों के विरोध प्रदर्शन के चलते 14 साल से सत्ता में काबिज अलेक्जेंडर वुचिच चुनाव हार गए हैं. चुनाव में उनकी दक्षिणपंथी पार्टी को छात्रों के नेतृत्व वाले विपक्षी आंदोलन ने कड़ी टक्कर दी थी. इस आंदोलन के तहत 2 साल से वुचिव की सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जा रहा था. वहीं बाल्कन देश में हुआ यह सियासी उलटफेर बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के समर्थक वुचिच 14 साल से बहुमत के साथ देश की सरकार चला रहे थे. अब चुनावी हार के बाद उन्होंने छात्र आंदोलन को उन्हें सत्ता से हटाने की विदेशी ताकतों की साजिश करार दिया है.
वुचिच ने हार के लिए यूरोपीय देशों को जिम्मेदार बताया
बता दें कि सर्बिया में 64 लाख मतदाता हैं, जिन्होंने 250 सदस्यों वाली संसद के लिए प्रतिनिधि चुना. चुनाव में हार स्वीकार करते हुए वुचिच ने कहा कि उनकी पार्टी को अनुमान था कि युवाओं के समर्थन वाली विपक्षी पार्टी ‘स्टूडेंट्स लिस्ट’ को 135 से 140 सीटें मिल सकती हैं और उनकी SNS पार्टी को 105 सीटें मिलने की उम्मीद है. लेकिन ऐसा नहीं हुआ और इसके लिए स्वतंत्र मीडिया के साथ-साथ यूरोपीय देशों का हस्तक्षेप जिम्मेदार है. चुनाव परिणाम का ऐलान होते ही बेलग्रेड में जश्न शुरू हो गया है. हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और उन्होंने कारों ने हॉर्न बजाकर डांस और नारेबाजी करके जीत का जश्न मनाया, लेकिन यह जीत स्टूडेंट्स की नहीं, सर्बिया की नहीं, बल्कि देश के विरोधियों की जीत है.
2014 में 16 मौतों के विरोध में शुरू हुआ था आंदोलन
वुचिच ने कहा कि स्टूडेंट लिस्टके समर्थक नारे लगा रहे हैं कि ‘अलेक्जेंडर चला गया. हालातों को देखते हुए सर्बिया पुलिस ने राजधानी में चुनाव आयोग के मुख्यालय के आस-पास सुरक्षा बढ़ा दी है. 2 साल चले स्टूडेंट के प्रदर्शनों के चलते चुनाव कराए गए थे. छात्र प्रदर्शन साल 2024 में नोवी साद के रेलवे स्टेशन पर कैनोपी गिरने से 16 लोगों की मौत होने के विरोध में शुरू हुए थे. इस आपदा ने भ्रष्टाचार, सरकारी जवाबदेही और सुरक्षा मानकों को लेकर लोगों के गुस्से को बढ़ावा दिया. वुचिच ने कहा कि फिर धीरे-धीरे विरोध प्रदर्शन सर्बिया की Gen-Z पीढ़ी के सबसे बड़े विरोध आंदोलनों में शामिल हो गया. प्रदर्शनकारियों ने राजनीतिक बदलाव की मांग करते हुए मेरा इस्तीफा मांग और सरकार पर दबाव बनाया.
छात्र आंदोलन के दबाव में आकर कराए गए थे चुनाव
बता दें कि वुचिच पॉपुलिस्ट और नेशनलिस्ट पॉलिटिशियन हैं, जिन्होंने साल 2014 से अबतक सर्बिया की पॉलिटिक्स में प्राइम मिनिस्टर या प्रेसिडेंट के तौर पर अपना दबदबा बनाए रखा. लेकिन छात्र आंदोलनों के बढ़ते दबाव के बीच सितंबर 2026 में उन्होंने चुनाव कराने का ऐलान करके चौंका दिया. उनके समर्थक उन्हें आर्थिक विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स जैसे हाईवे, रेलवे, स्कूल और अस्पताल के लिए क्रेडिट देते हैं. आलोचकों ने उनकी सरकार पर डेमोक्रेटिक संस्थाओं को कमजोर करने और विरोधियों को दबाने का आरोप लगाया है, लेकिन वुचिच ने आरोपों को बार-बार नकारा. सितंबर में कराए गए चुनाव में मतदान 70% के करीब पहुंचा, जो 1992 में यूगोस्लाविया के टूटने के बाद सबसे ज्यादा रहा.