जंग के बीच हूती विद्रोहियों को 95 अरब क्यों देगा सऊदी अरब? रक्षा मंत्री ने दिया ऑफर, जानें क्या है मकसद?

हूती विद्राहियों के साथ संघर्ष विराम के लिए सऊदी अरब ने एक ऑफर दिया है. सऊदी अरब ने ईरान में तुर्किए और पाकिस्तान की मौजूदगी में हूती विद्रोहियों से एक अरब डॉलर लेने और हमले रोकने का आग्रह किया है.

mohammed bin salman | Houthi Rebels | Saudi Arabia

हूती विद्रोही सऊदी अरब के एयरपोर्ट पर हमले करके भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं. (Credit-ANI)

यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों को सऊदी अरब ने एक ऑफर दिया है. ईरान की यात्रा के दौरान सऊदी अरब के रक्षा मंत्री सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान ने हूती विद्रोहियों को ऑफर दिया कि सऊदी अरब उन्हें 1 बिलियन डॉलर यानी 95 अरब 11 करोड़ 81 लाख 50 हजार रुपये देगा. दावा किया जा रहा है कि सऊदी अरब हमले रोकने के बादल में हूती विद्रोहियों को इतनी बड़ी रकम देगा. क्योंकि हूती विद्रोही लगातार सऊदी अरब के एयरपोर्ट और धार्मिक शहरों पर हमले कर रहे हैं, वहीं सऊदी अरब के एयर डिफेंस सिस्टम हमलों को रोकने में नाकाम साबित हो रहे हैं, इसलिए सऊदी अरब की स्थिति घुटने टेकने की बन गई है. इसलिए एक अरब डॉलर का ऑफर दिया है.

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सऊदी अरब ने ईरान के जरिए ऑफर दिया

मीडियो रिपोर्ट्स के अनुसार, अभी तक सऊदी अरब, ईरान और हूती विद्रोहियों की ओर से 1 बिलियन डॉलर के ऑफर को लेकर कुछ नहीं कहा गया है, लेकिन सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान हूती विद्रोहियों के साथ युद्धविराम कराने के मकसद से बातचीत करने तेहरान गए थे. इस दौरान उन्होंने ईरान के सामने ऑफर रखा कि अगर वे हूती विद्रोहियों के साथ सऊदी अरब का युद्धविराम करा दें तो सऊदी अरब हूती विद्रोहियों को 1 बिलियन डॉलर देगा, जिसका इस्तेमाल वे अपनी मर्जी से किसी भी तरीके से कर सकेंगे. सऊदी मंत्री ‘हरक्यूलिस’ विमान में अपने साथ पैसे भी तेहरान ले गए थे, लेकिन अभी तक यह पुष्टि नहीं हुई है कि हूती विद्रोहियों ऑफर मान लिया है और पैसे ट्रांसफर कर दिए गए हैं.

मीटिंग में तुर्किए और पाकिस्तान भी मौजूद रहा

मीडियो रिपोर्ट्स के अनुसार, सऊदी अरब के रक्षा मंत्री के अलावा तुर्की के इंटेलिजेंस चीफ इब्राहिम कलिन और पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर भी ईरान पहुंचे थे. ईरान के प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान, सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के महासचिव मोहसेन रेजाई और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे. सऊदी अरब के रक्षा मंत्री ने तुर्की और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में ही ईरान के अधिकारियों से हूती विद्रोहियों के बारे में बात की. ईरान ने ही सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष विराम के लिए मध्यस्थता करने का ऑफर दिया था. क्योंकि हूती विद्रोहियों के हमलों से सऊदी अरब को लाल सागर, होर्मुज स्ट्रेट और देश में नुकसान हो रहा है.

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हूती विद्रोहियों से पैसे लेकर हमले रोकने का आग्रह

सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान ने ‘मक्का गठबंधन’ के सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के साथ ईरान की यात्रा की है. यात्रा का मकसद सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच तनाव कम करना, बातचीत और कूटनीतिक समाधान को बढ़ावा देना, कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थता के प्रयासों का समर्थन करना है. हूती विद्रोहियों के साथ विवाद की एक वजह 3 साल पहले हुए समझौते के नियमों को लागू करने से जुड़ा है. जिसके तहत सऊदी अरब को हूती विद्रोहियों को वित्तीय सहायता देनी थी, ताकि वे यमन में अपने कब्जे वाले इलाकों में तैनात कर्मचारियों को वेतन दे सकें, लोगों के लिए बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण कर सकें. बदले में हूती विद्रोहियों से उम्मीद की गई है कि वे युद्धविराम का पालन करेंगे और सऊदी अरब पर हमले रोक देंगे.

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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