विदेश मंत्री एस जयशंकर ने नई दिल्ली में आयोजित ‘ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम’ में बदलते वैश्विक समीकरणों और अमेरिका के साथ भारत के रिश्तों पर खुलकर बात की. उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत, अमेरिका का कोई औपचारिक सैन्य या संधि सहयोगी नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच एक मजबूत रणनीतिक साझेदारी है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वैश्विक व्यवस्था में अमेरिका ने अपनी स्थिति और प्राथमिकताओं को बदल लिया है. जब महाशक्ति का रुख बदलता है तो उसके सहयोगी और साझेदार देशों के चयन का तरीका भी बदल जाता है.
हाल के दिनों में अमेरिका की तरफ से लिए गए कुछ फैसलों के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुश्किलें पैदा हुई हैं. इन चुनौतियों की ओर इशारा करते हुए विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि दुनिया अब पुराने ढर्रे पर नहीं चल सकती. अमेरिका के बदलते नजरिए के कारण भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के अन्य देशों को भी उसके साथ अपने संबंधों को फिर से व्यवस्थित करना पड़ रहा है.
यह भी पढ़ें : ‘भारत से संबंध टूटे तो US के लिए होगी मुसीबत’, ट्रंप के सांसद ने क्यों दिया ऐसा बयान?
साझेदार देशों के चयन में दिख रहा बदलाव
जयशंकर के मुताबिक, अमेरिका अब पहले जैसा नहीं रहा और विश्व व्यवस्था में उसने अपनी पोजिशनिंग में बड़ा फेरबदल किया है. इसका सीधा असर इस बात पर पड़ रहा है कि वह अपने सहयोगियों और रणनीतिक साझेदारों को किस तरह देखता है. उन्होंने कहा कि यह चुनौती केवल भारत के सामने नहीं है. दुनिया का हर वह देश जो अमेरिका के साथ साझेदारी रखता है, आज इस बदलाव को महसूस कर रहा है और अपने हितों की रक्षा के लिए रिश्तों का नया ताना-बाना बुनने में जुटा हुआ है.
‘रणनीतिक साझेदारी और गठबंधन में फर्क’
विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका आजकल अपने पुराने गठबंधनों और संधि शर्तों की समीक्षा कर रहा है. इसका सीधा असर यूरोप और कुछ हद तक पूर्वी एशियाई देशों पर महसूस किया जा रहा है. भारत के संदर्भ में उन्होंने कहा, “हम अमेरिका के साथ कई मुद्दों पर मिलकर काम कर रहे हैं, लेकिन हमारे सामने गठबंधन की शर्तों जैसी कोई समस्या नहीं है, क्योंकि हम आधिकारिक तौर पर उसके ‘एलाई’ नहीं हैं. एक रणनीतिक साझेदारी सिर्फ एक साझेदारी होती है, कोई गठबंधन नहीं.” उन्होंने आगे जोड़ा कि पिछले 20 से अधिक सालों में भारत और अमेरिका ने अपने साझा हितों और प्राथमिकताओं की पहचान कर उन पर मिलकर काम किया है और बुनियादी तौर पर इसमें कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है.
टैरिफ विवाद की असली जड़ क्या है?
अमेरिकी टैरिफ नीतियों पर बात करते हुए जयशंकर ने कहा कि टैरिफ को लेकर अमेरिका का नजरिया बिल्कुल अलग है, लेकिन यह किसी गहरी बात का संकेत है. असल में अमेरिका अपने यहां उद्योगों को फिर से खड़ा करने और अपनी अर्थव्यवस्था तक पहुंच के नियमों को नए सिरे से तय करने में जुटा है. जयशंकर के मुताबिक, टैरिफ की पूरी बहस इसी बात पर टिकी है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था तक किस देश को किस शर्त पर पहुंच मिलेगी.
‘बातचीत में हम काफी आगे’
विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि इस बदलाव के चलते आज दुनिया की हर बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका के साथ नए सिरे से बातचीत की मेज पर बैठी है. इस मामले में भारत अकेला नहीं है, बल्कि राहत की बात यह है कि अमेरिका के साथ इन आर्थिक वार्ताओं में भारत काफी आगे के चरण में पहुंच चुका है.
यह भी पढ़ें : Explained: भारत-अमेरिका रिश्तों में नया मोड़, ट्रंप का बयान और भारत की सधी रणनीति
संबंधित खबरें
'मिडटर्म चुनाव तक रुक जाओ, फिर...' डोनाल्ड ट्रंप ने हूतियों को दी धमकी
2 hrs agoपोप लियो को हुआ कैंसर, सर्जरी में फेफड़े का निचला हिस्सा हटाया
2 hrs agoइजरायल ने 11 देशों के पायलटों और क्रू पर लगाई पाबंदी, सुरक्षा नियम किए सख्त
2 hrs agoदुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामको पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला
3 hrs agoफ्लाईदुबई मामले में आया नया ट्विस्ट, पकड़े गए मालदीव के 2 पायलट
11 hrs agoन्यूयॉर्क में मुहम्मद यूनुस से बदसलूकी, बांग्लादेश सरकार करेगी कार्रवाई!
12 hrs agoहोर्मुज पर टोल फीस देने से 60 देशों ने किया इनकार, क्या करेगा ईरान?
13 hrs agoमुंबई में जन्मीं असरा नोमानी कैसे बनीं US की चर्चित लेखक, किया बड़ा दावा
22 hrs agoक्या फ्रांस के बाद भारत अगला टारगेट? US पत्रकार के चौंकाने वाले खुलासे
22 hrs agoहूती हमलों के बाद कहां हैं सऊदी के क्राउन प्रिंस? रक्तदान के बाद से गायब
1 day agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines