'जम्मू-कश्मीर में अवैध रूप से कब्जा किए गए इलाके को खाली करें', भारत ने UN में पाकिस्तान को लताड़ा
Raghoo Puri In United Nations: संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव रघु पुरी ने इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान के प्रतिनिधियों को अपनी सेना के आदेशों का पालन करने के बजाय अपने नागरिकों के कल्याण पर ध्यान देना चाहिए.
India Slams Pakistan at UN: भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की कड़ी आलोचना की है. नई दिल्ली ने इस्लामाबाद पर आरोप लगाया है कि वो इस अंतरराष्ट्रीय मंच का इस्तेमाल अपने राजनीतिक प्रोपगैंडा को आगे बढ़ाने के लिए कर रहा है. नई दिल्ली ने फिर दोहराया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और पाकिस्तान से कहा कि वो उन इलाकों को खाली करे, जिन पर उसने अवैध कब्जा कर रखा है.
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UN में भारत ने उठाया कश्मीर का मुद्दा
संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में ‘अल्पसंख्यक मुद्दों पर विशेष प्रतिवेदक’ के साथ हुई बातचीत के दौरान, संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव, रघु पुरी ने पाकिस्तान के कमेंट्स का कड़ा जवाब दिया. पुरी ने कहा कि पाकिस्तान ने अपने प्रोपगैंडा को चलाने के लिए इस मंच का गलत इस्तेमाल किया है. उन्होंने जोर देकर कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का एक अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है, और पाकिस्तान से कहा कि वो अपने अवैध कब्जे वाले इलाकों को खाली कर दे. भारतीय राजनयिक ने पाकिस्तानी प्रतिनिधियों से ये भी कहा कि वो सेना के निर्देशों का पालन करने के बजाय अपने नागरिकों की जिंदगी को बेहतर बनाने पर ध्यान दें.
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के मुद्दे पर बात करते हुए रघु पुरी ने कहा कि ‘संप्रभु समानता’ के सिद्धांत के अनुसार, अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करना खास तौर से देशों की जिम्मेदारी है. उन्होंने धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए भारत के संवैधानिक प्रावधानों का जिक्र किया और कहा कि भारत की विविधता उसकी सांस्कृतिक विरासत का एक अहम हिस्सा है. पुरी ने ये भी बताया कि अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों ने भारत के विकास में बड़ा योगदान दिया है और वो सरकार और अहम संस्थानों में बड़े पदों पर आसीन हैं.
धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर पहले भी हुई थी बहस
ये ताजा टकराव 23 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र में हुई एक और बहस के बाद हुआ है, जब भारत ने धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के मामले में पाकिस्तान की आलोचना की थी. ‘धर्म या विश्वास की स्वतंत्रता पर विशेष प्रतिवेदक’ के साथ बातचीत के दौरान, भारत की प्रथम सचिव भाविका मंगलानंदन ने एक रिपोर्ट के कुछ पहलुओं पर सवाल उठाए. ये रिपोर्ट खास हालात में अंतिम संस्कार के अधिकारों से जुड़ी थी.
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उन्होंने तर्क दिया कि ये रिपोर्ट ‘ग्लोबल साउथ’ की कमियों पर बहुत ज्यादा जोर देती है, जबकि विकसित देशों में भी ऐसी ही स्थितियों को नजरअंदाज कर देती है. उन्होंने आतंकवादियों से जुड़े मामलों में अंतिम संस्कार के अधिकारों पर की गई चर्चा को लेकर भी चिंता जताई.