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1170 साल पुराने दुर्लभ शिव मंदिर का भारत और हिंदू धर्म से क्या है कनेक्शन? इंडोनेशिया में PM मोदी आज करेंगे दर्शन

Prambanan Temple Indonesia: मुस्लिम बहुल देश इंडोनेशिया में एक हिंदू मंदिर है, जो करीब 1170 साल पुराना है। आज प्रधानमंत्री मोदी इस मंदिर के दर्शन करेंगे। वहीं मोदी सरकार इस मंदिर के जीर्णोद्धार का काम भी इंडोनेशिया की सरकार के साथ मिलकर करेगी।

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प्रधानमंत्री मोदी इंडोनेशिया के दौरे पर हैं और वे जावा द्वीप पर बने ऐतिहासिक शिव मंदिर में दर्शन भी करेंगे। जी हां, करीब 87 प्रतिशत मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया में 1170 साल पुराना दुनियाभर में मशहूर और यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल प्रम्बानन मंदिर है, जिसका भारत से भी कनेक्शन है। इंडोनेशिया के साथ मिलकर भारत इस मंदिर का के जीर्णोद्धार का काम करेगा। आइए जानते हैं कि इस मंदिर की कहानी, इतिहास, महत्व और भारत के साथ कनेक्शन क्या है?

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इंडोनेशिया में 20000 से ज्यादा मंदिर

बता दें कि इंडोनेशिया में छोटे-बड़े मिलाकर 20000 से ज्यादा हिंदू मंदिर हैं, जिन्हें वहां पुरा या चांडी कहा जाता है। वहीं सबसे ज्यादा मंदिर बाली द्वीप पर हैं और बाली की आबादी भी हिंदू बहुसंख्यक है। बाली के अलावा जावा, लोम्बोक और अन्य द्वीपों पर भी मंदिर हैं। मध्य जावा द्वीप पर प्रम्बानन मंदिर, चांडी सुकुह, चांडी चेतो हैं। वहीं बाली के प्रमुख मंदिर बेसाकीह मंदिर, तनाह लोट मंदिर, उलुवातु मंदिर, तिर्ता एम्पुल मंदिर, गोवा लवाह मंदिर, तमन आयुन मंदिर, पुरा उलुन दानु ब्रातन मंदिर हैं।

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यूनेस्को की विश्व धरोहर है प्रम्बानन मंदिर

बता दें कि साल 1991 में यूनेस्को ने इंडोनेशिया के प्रम्बानन मंदिर को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया था। आज यह इंडोनेशिया का सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल है, जिसे देखने हर साल लाखों लोग आते हैं। प्रम्बानन मंदिर इंडोनेशिया के जावा द्वीप पर योग्यकार्ता शहर के पास बना है। देश की राजधानी जकार्ता से यह 500 किलोमीटर है। यह मंदिर 9वीं शताब्दी का है और इसकी गिनती दक्षिण-पूर्व एशिया के सबसे भव्य हिंदू मंदिरों में होती है। अब भारत-इंडोनेशिया मिलकर इसे संरक्षित करेंगे।

संजय वंश के राजा ने बनवाया था मंदिर

19वीं-20वीं सदी में खुदाई के दौरान मिले शिलालेखों के अनुसार, यह मंदिर 9वीं सदी में संजय वंश के राजा रकाई पिकातन ने बनवाया था, जिसे अन्य राजाओं ने अपने-अपने तरीके से बदला और विस्तृत किया। एक शिलालेख पर अंकित तारीख से पता चला कि यह मंदिर 1100 साल पुराना है और भगवान शिव को समर्पित है। राजा राकाई पिकातन ने साल 850 में मंदिर का निर्माण कार्य शुरू कराया था। मुख्य शिव मंदिर का उद्घाटन राजा लोकपाल ने साल 856 में किया था। आगे चलकर इस मंदिर के आंगन में भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा के मंदिर भी बनवाए गए थे।

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मंदिर को कब-क्यों-कैसे पहुंचा नुकसान?

बता दें कि समय के साथ-साथ मंदिर का महत्व कम होता गया। भूकंप और ज्वालामुखी गतिविधियों ने मंदिर को नुकसान पहुंचाया। काफी लंबे समय तक मंदिर खंडहर बना रहा। 19वीं शताब्दी में यूरोप के खोजकर्ताओं ने मंदिर पर ध्यान दिया और इसके संरक्षण के साथ पुनर्निर्माण का काम शुरू हुआ। प्रम्बानन मंदिर ऊंची-ऊंची आकर्षक शिखर शैली के लिए मशहूर है। इसमें 240 संरचनाएं, 3 बड़े मंदिर, कुछ छोटे मंदिर, भगवान शिव का मंदिर,भगवान विष्णु का मंदिर और भगवान ब्रह्मा का मंदिर है।

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नंदी, गरुड़ और हंस को समर्पित मंदिर भी बने हैं। भगवान शिव का मंदिर सबसे ऊंचा है और इसकी ऊंचाई 47 मीटर है। मंदिर की दीवारों पर बेहद सुंदर नक्काशी है, जिन पर हिंदू धर्म की कथाएं उकेरी गई हैं। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता पत्थरों की नक्काशी है। दीवारों पर रामायण की कथा उकेरी गई है। भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण, हनुमान और रावण से जुड़े चित्र पत्थरों पर उकेरे गए हैं।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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