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'संकट में फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालना पहली प्राथमिकता', रूस-यूक्रेन युद्ध का जिक्र कर बोले पीयूष गोयल

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बर्लिन में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि संकट के समय विदेशों में फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालना भारत की प्राथमिकता है. उन्होंने यूक्रेन से करीब 22 हजार भारतीयों की वापसी, केरल की नर्सों के योगदान और भारत-जर्मनी संबंधों पर भी बात की.

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केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल बर्लिन में. (Image- X/@PiyushGoyal)

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि दुनिया के किसी भी हिस्से में संकट के दौरान फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और उन्हें सुरक्षित देश वापस लाना भारत सरकार की प्राथमिकता रही है. उन्होंने कहा कि भारत सिर्फ लोगों को वापस आने की सलाह देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं मानता, बल्कि जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए भी कदम उठाता है. भारत ने कई मौकों पर दूसरे देशों के नागरिकों को भी सुरक्षित निकालने में मदद की है. पीयूष गोयल ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर को जर्मनी की राजधानी बर्लिन में भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित करते हुए यह बात कही. उन्होंने विदेशों में मुश्किल हालात का सामना कर रहे भारतीयों की मदद और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए सरकार की ओर से किए गए प्रयासों का जिक्र किया.

यूक्रेन से 22 हजार भारतीयों को निकालने का किया जिक्र

पीयूष गोयल ने रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के समय भारतीय नागरिकों को वहां से सुरक्षित निकालने के अभियान का उदाहरण दिया. उन्होंने बताया कि युद्ध शुरू होने के समय यूक्रेन में करीब 22 हजार भारतीय मौजूद थे. इनमें ज्यादातर छात्र थे. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीयों को सुरक्षित निकालने के अभियान की निगरानी की थी. इसके लिए दिल्ली में एक विशेष टीम बनाई गई थी, जो पूरे अभियान के बीच तालमेल बनाए रखने का काम कर रही थी. इसके अलावा चार वरिष्ठ मंत्रियों को आसपास के देशों में भेजा गया था, ताकि भारतीय नागरिकों की वापसी में मदद मिल सके. गोयल के मुताबिक, युद्ध की स्थिति गंभीर होने से पहले ही सरकार ने यूक्रेन में रह रहे भारतीयों को वापस लौटने के लिए कहा था. लेकिन युद्ध शुरू होने के बाद वहां से लोगों को निकालने का काम और मुश्किल हो गया.

‘दूसरे देश सिर्फ एडवाइजरी जारी करते हैं’

पीयूष गोयल ने कहा कि कई देश विदेश में फंसे अपने नागरिकों को केवल एडवाइजरी जारी कर वापस आने की सलाह देते हैं. लेकिन भारत का तरीका इससे अलग है. उन्होंने कहा कि भारत जरूरत पड़ने पर अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए जरूरी इंतजाम करता है और कई बार दूसरे देशों के लोगों को भी उनके साथ सुरक्षित बाहर निकालने में मदद करता है. मंत्री ने कहा कि विदेशों में मुश्किल के समय भारतीय नागरिकों की सुरक्षा तय करने के लिए सरकार लगातार प्रयास करती रही है. उनके बयान में ऐसे अभियानों के दौरान बेहतर तालमेल और समय पर कार्रवाई की अहमियत पर जोर दिया गया.

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जर्मनी में केरल की 6,000 नर्सों के योगदान को याद किया

पीयूष गोयल ने भारत और जर्मनी के पुराने संबंधों का जिक्र करते हुए केरल की करीब 6,000 नर्सों के योगदान की भी सराहना की. उन्होंने बताया कि 1960 के दशक में पश्चिमी जर्मनी के अस्पतालों में नर्सों की भारी कमी थी. इस जरूरत को पूरा करने के लिए वहां के लोगों ने केरल से 6,000 नर्सों को बुलाया था. इन नर्सों ने जर्मनी के अस्पतालों और देखभाल केंद्रों में काम किया. उन्होंने मरीजों की देखभाल की, परिवारों की मदद की और बाद में उसी देश में अपना जीवन बसाया. गोयल ने कहा कि इन नर्सों का योगदान केवल स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित नहीं था, बल्कि इससे भारत और जर्मनी के लोगों के बीच आपसी भरोसा और संबंध भी मजबूत हुए.

भारत-जर्मनी के संबंधों में बढ़ा सहयोग

पीयूष गोयल ने कहा कि समय के साथ भारत और जर्मनी के संबंध रणनीतिक साझेदारी में बदल गए हैं. दोनों देशों ने पिछले साल अपनी रणनीतिक साझेदारी के 25 साल पूरे किए थे. वहीं, इस साल भारत और जर्मनी के बीच राजनयिक संबंधों के 75 साल पूरे हो रहे हैं. दोनों देश व्यापार, निवेश, तकनीक और दूसरे क्षेत्रों में आपसी सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं. दोनों देशों के कारोबारी भी नए अवसरों का लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं. इसमें भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से मिलने वाले अवसर भी शामिल हैं.

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