Petrol-Diesel Price Today: मिडिल ईस्ट में 40 दिन जंग के बाद 2 हफ्तों का सीजफायर तो हो गया लेकिन हालात जस के तस है। दुनिया के बड़े जलमार्गों में से हॉर्मुज स्ट्रेट को अभी तक खोला जा सका है। अमेरिका ने हॉर्मुज में नाकाबंद कर दी है। वहीं ईरान के समर्थन चीन, रूस और यमन जैसे देश उतर आएं हैं। हॉर्मुज रूट बंद होने का सबसे ज्यादा असर दुनिया में होने वाले कच्चे तेल की सप्लाई पर हो रहा है। सप्लाई सीमित होने से पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान पर पहुंच गए हैं। फिलीपिंस में तो डीजल के रेट में 172 प्रतिशत तक का उछाल आया है।
दुनियाभर में पेट्रोल-डीजल के रेट में काफी बढोतरी देखी गई है। हालांकि अभी तक भारत में ऐसी समस्या का सामना नहीं करना पड़ रहा है। फिलीपींस में डीजल की कीमतों में 172 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जबकि म्यांमार में पेट्रोल की कीमतें दोगुनी हो गई हैं। हालांकि, भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अभी भी कुछ राहत है। दिल्ली में पेट्रोल की कीमत कई वर्षों से 94.77 रुपये और डीजल की कीमत 87.67 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है। आशंका है कि चुनाव के बाद यह राहत खत्म हो सकती है।
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पेट्रोल के दाम पर क्या पड़ा फर्क?
globalpetrolprices.com के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, जिन देशों ने पेट्रोल की कीमतों में सबसे अधिक वृद्धि की है, वे हैं म्यांमार (101.1%), फिलीपींस (72.6%), मलेशिया (68.1%), लाओस (45.6%), जिम्बाब्वे (42.9%), पाकिस्तान (42.0%), यूएई (40.8%), कंबोडिया (40.4%) और नेपाल (39.5%)।
पेट्रोल के दाम पर क्या पड़ा फर्क?
डीजल के दाम सबसे अधिक बढ़ाने वाले देश में कई देश शामिल हैं। फिलीपींस 172.0%, लाओस 169.5%, म्यांमार 161.4%, मलेशिया 124.7%, न्यूजीलैंड 89.9%, यूएई 86.1%, कंबोडिया 84.0%, लेबनान 80.5%, वियतनाम 77.9% और ऑस्ट्रेलिया 65.3%।
29 अप्रैल के बाद भारत में बढ़ेंगे दाम?
भारत में इन दिनों 5 राज्यों में चुनाव चल रहे हैं। 3 राज्यों में हो गए हैं पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनाव होना बाकी है। सबसे आखिर में पश्चिम बंगाल में 29 अप्रैल को विधान सभा चुनाव होने हैं। वहीं 4 मई तक सभी 5 राज्यों के रिजल्ट जारी होंगे। ऐसे में हर जगह यही चर्चा है कि चुनाव के बाद भारत में पेट्रोल डीजल के दामों में काफी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। इसकी पुष्टि एक रिपोर्ट से होती दिख रही है। Macquarie Group ने रिपोर्ट में कहा है कि पेट्रोल पर कंपनियों को 18 और डीजल पर 35 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। इसलिए माना जा रहा है कि चुनाव के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफा हो सकता है। जानकारी के अनुसार, एक बैरल कच्चे तेल में 10 डॉलर की बढ़ोतरी की वजह से कंपनियों को करीब 6 रुपये प्रति लीटर का नुकसान होता है।
क्यों बढ़ रहे दाम?
बता दें कि ईरान-अमेरिका युद्ध शुरू होने के बाद बेंट क्रूड की कीमत 71 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 111 डॉलर तक पहुंच गई है। सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई थी। वहीं मार्च के बीच तक ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के ऊपर चला गया। शुरुआती अप्रैल तक यह 111.73 डॉलर पर था। हालांकि ईरान और अमेरिका में 2 हफ्तों के सीजफायर के ऐलान के बाद यह 95.49 डॉलर पर आ गया।
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