जम्मू-कश्मीर में मस्जिदों और उनकी कमेटियों की प्रोफाइलिंग को लेकर टिप्पणी करना पाकिस्तान को महंगा पड़ गया है. भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने की कोशिश पर बलूचिस्तान के कद्दावर नेता मीर यार ने शहबाज शरीफ सरकार की जमकर क्लास लगाई है. मीर यार ने पाकिस्तान को दुनिया के सामने एक ‘आतंकी देश’ करार देते हुए उसकी पोल खोल दी है. उन्होंने साफ कहा कि जो देश खुद अपने यहाँ अल्पसंख्यकों और धार्मिक स्थलों को निशाना बनाता है उसे भारत को मानवाधिकारों पर ज्ञान देने का कोई हक नहीं है. बलूच नेता ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि बलूचिस्तान इस मामले में पूरी तरह से भारत के रुख के साथ खड़ा है और पाकिस्तान का विरोध करता है.
पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में मस्जिदों को किया तबाह
मीर यार ने सोशल मीडिया पर पाकिस्तान की सेना की बर्बरता का कच्चा चिट्ठा खोलते हुए बताया कि पाकिस्तान ने खुद बलूचिस्तान में करीब 40 मस्जिदों को तबाह किया है. उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सेना ने न केवल मस्जिदों पर सीधे बमबारी की बल्कि पवित्र कुरान को जलाया और मस्जिदों के इमामों का अपहरण भी किया. बलूच नेता के अनुसार पाकिस्तान की हमलावर सेना ने नागरिकों पर तोपें चलाईं और टैंकों से हमला किया. उन्होंने कलात के खान की ऐतिहासिक मस्जिद का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां आज भी मोर्टार के गोलों के निशान मौजूद हैं जो पाकिस्तान की क्रूरता और गैर-इस्लामी व्यवहार की गवाही देते हैं.
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पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के बयान पर पलटवार करते हुए मीर यार ने कहा कि पाकिस्तान हिंदुओं, सिखों और ईसाइयों जैसे अल्पसंख्यकों को परेशान करने में सबसे आगे है. उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की सेना धार्मिक और जिहादी चरमपंथियों का इस्तेमाल अल्पसंख्यकों को डराने और दबाने के लिए एक हथियार के रूप में करती है. बलूच नेता का कहना है कि जो देश खुद अपनी जनता और अल्पसंख्यकों पर जुल्म करता है वह भारत, अफगानिस्तान या बलूचिस्तान को अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर लेक्चर नहीं दे सकता. पाकिस्तान का यह असली चेहरा दुनिया के सामने है जहाँ मजहब के नाम पर ही लोगों का खून बहाया जाता है.
कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान की दखलअंदाजी
दरअसल यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने मस्जिदों और उनकी मैनेजमेंट कमेटियों की जानकारी जुटाने के लिए एक प्रोफाइलिंग फॉर्म जारी किया. इस कदम का मकसद व्यवस्था को बेहतर बनाना था लेकिन पाकिस्तान ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन बताते हुए इसकी निंदा कर दी. पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने इसे मुस्लिम आबादी को डराने की कोशिश करार दिया था जिस पर भारत और अब बलूच नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है. विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक विफलताओं और बलूचिस्तान में बढ़ते विद्रोह से ध्यान भटकाने के लिए अक्सर कश्मीर का सहारा लेता है लेकिन इस बार वह खुद अपने ही घर के विरोध में घिर गया है.
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