मिडल-ईस्ट में जारी जंग ने पाकिस्तान की कमर तोड़ दी है. ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जंग की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य का रूट बंद कर दिया गया. भारत की तरह पाकिस्तान का भी ज्यादातर ऑयल इसी रूट से आता है. इस संकट के खतरे के कम करने के लिए शहबाज शरीफ सरकार ने फ्यूल बचाने के लिए अब कोविड-19 महामारी दौर वाली पाबंदियां दोबारा लगाने का फैसला किया है. पाकिस्तान ने वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन क्लासेज करने का फैसला किया है, ताकि लोग गाड़ियों से कम सफर करें और तेल की बचत हो सके.

क्या-क्या लगेंगी पाबंदी

पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार कर्मचारियों के लिए 'वर्क फ्रॉम होम' और स्कूलों-कॉलेजों में ऑनलाइन क्लासेज शुरू करने पर गंभीरता से विचार कर रही है. इसके पीछे मकसद सड़कों पर गाड़ियों की संख्या कम करना और तेल की खपत में भारी कटौती करना है. आईटी और टेलीकॉम कंपनियों से कहा गया है कि वे अपने स्टाफ को हफ्ते में कम से कम दो दिन घर से काम करने की अनुमति दें. इसके अलावा, ऑफिस जाने वालों के लिए 'राइड-शेयरिंग' जैसे विकल्पों को प्रमोट करने पर भी विचार किया जा रहा है.

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कितने दिन का बचा है तेल?

पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब के मुताबिक, अभी पाकिस्तान के पास करीब 25 दिनों का पेट्रोल और डीजल का स्टॉक, करीब 10 दिनों का क्रूड ऑयल रिजर्व और 15 दिनों की LPG सप्लाई है.

सऊदी से लगाई गुहार

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इमरजेंसी से निपटने के लिए शहबाज सरकार ने सऊदी अरब से अनुरोध किया है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य के बजाय लाल सागर के जरिए तेल की सप्लाई करे. साथ ही, पेट्रोल की जमाखोरी रोकने के लिए कीमतों की साप्ताहिक समीक्षा भी शुरू की जा रही है.

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ईरान को दी थी धमकी

ये वही पाकिस्तान है, जिसके विदेश मंत्री ने एक दिन पहले ईरान को धमकी देते हुए कहा था कि अगर सऊदी अरब पर हमला किया तो हमें भी युद्ध में कूदना पड़ेगा. पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार ने यह बयान सऊदी अरब के साथ उस डील का हवाला देते हुए दिया था, कि 'किसी एक देश पर हमला, दोनों देशों पर माना जाएगा.'