मध्य पूर्व में युद्ध की शुरुआत के साथ ही वैश्विक राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. शनिवार को इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान के कई शहरों पर भीषण हवाई हमले किए, जिसमें सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के दफ्तर के पास का इलाका भी शामिल था. इन हमलों के तुरंत बाद पाकिस्तान ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इसकी कड़ी निंदा की है. दिलचस्प बात यह है कि हाल के दिनों में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पाकिस्तान और अमेरिका के बीच नजदीकियां काफी बढ़ी थीं. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर की व्हाइट हाउस यात्रा के बाद डोनाल्ड ट्रंप भी उनकी तारीफ कर चुके थे, लेकिन ईरान पर हमले ने इस दोस्ती में दरार डाल दी है. पाकिस्तान ने अपने ‘दोस्त’ अमेरिका को झटका देते हुए इन हमलों को पूरी तरह बेवजह बताया है.
पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने ईरान को दिया समर्थन
ईरान पर हुए हमलों के बाद पाकिस्तान के सुर पूरी तरह बदल गए हैं. पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार ने तुरंत अपने ईरानी समकक्ष को फोन किया और एकजुटता जाहिर की. इशाक डार ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस्लामाबाद अमेरिकी और इजरायली हमलों की कड़ी निंदा करता है. पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक रास्तों को फिर से शुरू किया जाए. पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के बयान के मुताबिक, वे क्षेत्र में बढ़ते तनाव को लेकर चिंतित हैं और इसे तुरंत रोकने की मांग करते हैं. अमेरिका के साथ बढ़ती रणनीतिक साझेदारी के बावजूद पाकिस्तान का ईरान के पक्ष में खड़ा होना यह दर्शाता है कि वह मुस्लिम देशों के साथ अपने रिश्तों को प्राथमिकता दे रहा है.
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शांति बहाली के लिए रूस की बड़ी पेशकश
ईरान पर हुए हमलों को लेकर रूस ने भी अपना रुख साफ कर दिया है. रूसी विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय कानून और आपसी सम्मान के आधार पर इस संकट का शांतिपूर्ण समाधान खोजने में मदद करने के लिए तैयार है. रूस ने साफ किया कि वह हितों के संतुलन को ध्यान में रखते हुए मध्यस्थता कर सकता है ताकि स्थिति और न बिगड़े. रूस का यह बयान क्षेत्र में संतुलन बनाने की एक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है. फिलहाल, ईरान पर हुए इन हमलों ने दुनिया को दो गुटों में बांट दिया है, जहां एक तरफ अमेरिका और इजरायल हैं, तो दूसरी तरफ पाकिस्तान और रूस जैसे देश शांति और बातचीत की वकालत कर रहे हैं.
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