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'एक झटके में 10 करोड़ मोबाइल फोन बंद!', पाकिस्तान में रातों-रात क्यों हुआ बड़ा एक्शन!

Pakistan Blocks 100 Million Mobile Devices: पाकिस्तान टेलीकॉम अथॉरिटी (PTA) ने देश के मोबाइल इतिहास की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 10 करोड़ मोबाइल डिवाइस को ब्लॉक कर दिया है. इस कड़े फैसले के बाद रातों-रात करोड़ों फोन ‘डिब्बा’ बन गए हैं, जिससे पूरे देश में हड़कंप मच गया है.

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Pakistan 10 Crore Mobile Blocked: पड़ोसी देश पाकिस्तान में मोबाइल यूजर्स के लिए बड़ी कार्रवाई की गई है. पाकिस्तान टेलीकॉम अथॉरिटी (PTA) ने करीब 10 करोड़ मोबाइल फोन ब्लॉक कर दिए हैं. PTA की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक 7.2 करोड़ नकली या डुप्लीकेट फोन, 2.7 करोड़ क्लोन IMEI वाले फोन, 8.68 लाख चोरी या खोए हुए मोबाइल ब्लॉक किए गए हैं. PTA का कहना है कि ऐसे फोन न सिर्फ नेटवर्क के लिए नुकसानदायक हैं, बल्कि यूजर्स की सुरक्षा और प्राइवेसी के लिए भी खतरा बनते हैं. इस फैसले के बाद पाकिस्तान के मोबाइल बाजार में हलचल मच गई है.

क्यों बंद हुए करोड़ों मोबाइल फोन?

पाकिस्तान सरकार और पीटीए ने यह कदम सुरक्षा कारणों और अवैध व्यापार पर लगाम लगाने के लिए उठाया है. PTA और पाकिस्तान सरकार के अनुसार के मुताबिक, इन 10 करोड़ फोन में से अधिकांश का इस्तेमाल टैक्स चोरी करके देश में लाने या फिर संदिग्ध गतिविधियों के लिए किया जा रहा था. ये फोन कानून के खिलाफ होने के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा और टेलीकॉम सिस्टम के लिए भी जोखिम थे. डिवाइस आइडेंटिफिकेशन रजिस्ट्रेशन एंड ब्लॉकिंग सिस्टम (DIRBS) के जरिए इन अवैध फोनों की पहचान की गई और उन्हें नेटवर्क से बाहर कर दिया गया.

बंद किए गए फोन के पीछे तकनीकी कारण

बंद किए मोबाइल फोन के IMEI फर्जी थे, जो बाजार में अवैध रूप से बिक रहे थे, उनका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं था. असली फोन की पहचान चुराकर बनाए गए नकली हैंडसेट का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों और अपराधों में करना आसान होता है क्योंकि उन्हें ट्रैक करना मुश्किल होता है. एक ही आईएमईआई (IMEI) नंबर पर हजारों मोबाइल चलाए जा रहे थे. इस कार्रवाई से उन लोगों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है जिन्होंने सस्ते के चक्कर में बिना जांचे-परखे फोन खरीदे थे.

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इतने फोन किए गए हैं ब्लॉक

PTA की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक 7.2 करोड़ नकली या डुप्लीकेट फोन, 2.7 करोड़ क्लोन IMEI वाले फोन, 8.68 लाख चोरी या खोए हुए मोबाइल ब्लॉक किए गए हैं. इस कार्रवाई के बाद कई यूजर्स के फोन अचानक बंद हो गए. अब ये फोन कॉल, मैसेज या इंटरनेट के काम नहीं आएंगे. सरकार ने कहा है कि जिन्होंने सही तरीके से मोबाइल खरीदा है, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है लेकिन सस्ते और संदिग्ध फोन खरीदने वालों के लिए यह एक चेतावनी है.

यह भी पढ़ें: पाकिस्तान का पूर्व मेजर क्यों घोषित हुआ आतंकी? क्या है शेडयूल 4 का सच, जिसके तहत एक्शन

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फर्जी मोबाइल ऐसे पकड़े गए

इसके लिए पाकिस्तान में DIRBS नाम का खास सिस्टम इस्तेमाल किया गया. यह सिस्टम मोबाइल डिवाइस को रजिस्टर करता है और सिर्फ वैध IMEI वाले फोन को ही नेटवर्क पर चलने देता है. जिन फोन के IMEI नंबर रिकॉर्ड से मेल नहीं खाए, उन्हें तुरंत ब्लैकलिस्ट कर दिया गया. सरकार का मानना है कि इस फैसले से लोकल मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा. अवैध फोन हटने से देश में बने मोबाइल की मांग बढ़ेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. पाकिस्तान में 2025 तक 95% से ज्यादा मोबाइल वहीं लोकल स्तर पर बने थे. इस कदम के बाद भारत में भी चर्चा शुरू हो गई है.

भारत में भी नकली और क्लोन IMEI वाले फोन

टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह समस्या उन देशों में ज्यादा आती है जहां मोबाइल का ग्रे-मार्केट (Grey Market) सक्रिय है. अगर भारत भी नकली और क्लोन IMEI वाले फोनों पर सख्ती करे, तो मोबाइल फ्रॉड, डेटा चोरी और साइबर अपराध पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है. पाकिस्तान में इतनी बड़ी संख्या में फोन बंद होना चर्चा का विषय बन गया है.

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यह भी पढ़ें: भारत के एक्शन से पाकिस्तान को लगी मिर्ची, सिंधु जल समझौते पर फिर लगा झटका, जानें अब क्या हुआ?

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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