अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर बड़े विवादों में घिर गए हैं जब उनके सोशल मीडिया अकाउंट से पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा का एक अपमानजनक वीडियो शेयर किया गया. करीब 62 सेकंड के इस वीडियो में बराक ओबामा और उनकी पत्नी मिशेल ओबामा के चेहरों को जानवरों के शरीर पर लगाकर दिखाया गया था. इस वीडियो के सामने आते ही अमेरिका में राजनीतिक हड़कंप मच गया और इसे सीधे तौर पर नस्लवादी और अमानवीय बताया गया. डेमोक्रेट्स के साथ-साथ कई रिपब्लिकन नेताओं ने भी इस हरकत की कड़ी निंदा की है क्योंकि इसे अमेरिका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति के अपमान के तौर पर देखा जा रहा है.
व्हाइट हाउस ने बताया 'इंटरनेट मीम'
विवाद बढ़ते देख व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लेविट ने शुरुआत में इस पोस्ट का बचाव किया था. उन्होंने इसे एक साधारण इंटरनेट मीम का हिस्सा बताया जिसमें ट्रंप को 'किंग ऑफ द जंगल' और अन्य डेमोक्रेट नेताओं को अलग-अलग किरदारों में दिखाया गया था. हालांकि जब नागरिक अधिकार संगठनों और राजनीतिक गलियारों में गुस्सा बढ़ने लगा तो प्रशासन को कदम पीछे खींचने पड़े. लगभग 12 घंटे बाद उस विवादित पोस्ट को ट्रंप के अकाउंट से हटा लिया गया. बाद में एक अधिकारी ने सफाई देते हुए कहा कि यह वीडियो गलती से एक स्टाफ सदस्य द्वारा शेयर हो गया था.
---विज्ञापन---
यह भी पढ़ें: POK पर पाकिस्तान को बड़ा झटका, अमेरिका ने भी माना भारत का हिस्सा
---विज्ञापन---
ट्रंप ने माफी मांगने से किया इनकार
जब पत्रकारों ने इस मामले पर राष्ट्रपति ट्रंप से सवाल पूछे तो उन्होंने कंटेंट की निंदा तो की लेकिन माफी मांगने से साफ मना कर दिया. ट्रंप का कहना था कि उन्होंने खुद कोई गलती नहीं की है और वे इस विवाद के लिए जिम्मेदार नहीं हैं. यह मामला इसलिए भी ज्यादा तूल पकड़ रहा है क्योंकि अमेरिका में इस समय 'ब्लैक हिस्ट्री मंथ' चल रहा है. गौरतलब है कि ट्रंप पहले भी ओबामा के जन्मस्थान को लेकर विवादित सवाल उठाकर चर्चा में रह चुके हैं. इस पूरे मामले पर अब तक बराक ओबामा या उनकी पत्नी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है.
नस्लवाद और अमानवीयता के लगे आरोप
आलोचकों का तर्क है कि इस तरह के वीडियो चुनाव से जुड़े आरोपों को दिखाने के बहाने अश्वेत नेताओं को नीचा दिखाने की कोशिश हैं. नागरिक अधिकार संगठनों ने इसे समाज में नफरत फैलाने वाला कदम बताया है. वीडियो के अंत में जिस तरह से ओबामा दंपत्ति के चेहरे जानवरों पर लगाए गए थे उसे अमानवीय व्यवहार की श्रेणी में रखा गया है. अमेरिका में बढ़ते इस राजनीतिक तनाव के बीच विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे विवाद आने वाले चुनावों में सोशल मीडिया के इस्तेमाल और एथिक्स पर बड़ी बहस छेड़ सकते हैं.