भारत के पड़ोसी देश नेपाल में फिर तबाही मचने के संकेत मिले हैं, क्योंकि त्रिभुवन विश्वविद्यालय के केंद्रीय जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग ने इस हफ्ते 4 दिन भारी बारिश होने की चेतावनी दी है. दरअसल, बंगाल की खाड़ी के ऊपर निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है, जो ओडिशा तट से टकराने वाला है और यह चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ में बदल सकता है, जिसके उत्तर की ओर मुड़ने की आशंका है, जिससे भोटेकोसी और त्रिशुली घाटी में भारी बारिश होने का खतरा है. पिछले महीने हिमस्खलन होने के बाद भोटेकोसी और त्रिशुली घाटी में आई बाढ़ से भयंकर तबाही मची थी.
सुपर एल नीनो ने मौसम पैटर्न पर असर डाला
हालांकि अभी निम्न दबाव का क्षेत्र है, लेकिन इसके चक्रवाती तूफान में बदलने से उत्तरी भारत और नेपाल में मानसून के आखिर में भारी बारिश होने की भविष्यवाणी है. दरअसल, प्रशांत महासागर में बने सुपर एल नीनो ने दुनियाभर के मौसम को प्रभावित किया है. पश्चिमी हवाओं के कारण चक्रवाती तूफान अर्नब बना तो यह सीजन का पहला चक्रवात होगा. विश्व मौसम विश्लेषण संघ के वैज्ञानिकों के अनुसार, लांगटांग द्वीप पर चट्टानों के अस्थिर होने के कारण हिमस्खलन हुआ है. पूर्वानुमानित तूफानों के लिए वैज्ञानिक जलवायु परिवर्तन को जिम्मेदार ठहराते हैं, लेकिन सतर्क रहने को भी कहते हैं.
नेपाल के इन इलाकों में भयंकर बरसेंगे बादल
जल विज्ञान एवं मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, नेपाल के गंडकी और लुम्बिनी प्रांतों में गुरुवार 24 सितंबर से रविवार 27 सितंबर तक भारी से बहुत भारी बारिश होने, बादल गरजने फटने और बिजली गिरने की संभावना है. मधेस, कोसी, बागमती और सुदूर पश्चिम के कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश और बिजली गिरने की संभावना है. इस साल पश्चिमी हवाएं बहुत तेज हैं और बंगाल की खाड़ी से उत्तर की ओर नेपाल आने वाली हवाओं को बाधित कर सकती हैं, जिससे भारी बारिश हो सकती है. रसुवा और नुवाकोट के साथ-साथ पर्वतारोहण अभियानों पर विशेष ध्यान देने की सलाह है.
400 से 600 मिलीमीटर बारिश होने के आसार
मौसम विभाग के अनुसार, अब हुई बारिश पहले से कमजोर हो चुकी ढलानों को अस्थिर कर सकती है और पिछले महीने की बाढ़ से आई गाद को बहाकर ला सकती है. 24 से 27 सितंबर तक 4 दिन में नेपाल में 400 मिमी से 600 मिमी बारिश हो सकती है. नया वेदर पैटर्न पूरे नेपाल को प्रभावित करेगा और भोटेकोसी और त्रिशुली बेसिन को प्रभावित करेगी. इसी इलाके में 26 अगस्त को लांगटांग लिरुंग पर्वत के ग्लेशियर टूटने से ग्लेशिर झील फटने के बाद विनाशकारी जनलेवा जलप्रलय आई थी. ग्लेशियर ढहने से झील फटी और उसके बाद लगभग 5 करोड़ टन बर्फ और चट्टानें भोटेकोसी और त्रिशुली में बहकर आई थी.
2024 में भी बारिश से आई थी भयानक बाढ़
जलप्रलय से 100 किलोमीटर नीचे तक फैले रास्ते में आने वाली हर चीज तबाह हो गई थी. अबतक 1451 शव बरामद किए गए हैं, जबकि 6100 से ज्यादा लोग लापता हैं. बाढ़ ने अब घाटी में भारी मात्रा में रेत, मिट्टी, बजरी और बड़े-बड़े पत्थर जमा कर दिए. ऐसे ही निम्न दबाव वाले क्षेत्र के कारण 2024 में काठमांडू घाटी में 24 घंटे में 600 मिमी बारिश हुई थी. परिणामस्वरूप 28 सितंबर 2024 को आई बाढ़ में 100 लोगों की मौत हो गई और फसलों के साथ नदी किनारे की बस्तियां नष्ट हो गई थीं. इसके बाद भी कई बार ऐसे ही पहाड़ों से आया पानी नेपाल में तबाही मचा सकता है, लेकिन 26 अगस्त की तबाही सबसे भयानक थी.