नेपाल में कुत्तों के लिए एक खास त्योहार मनाया जाता है. इसका नाम कुकुर तिहार है. इस दिन पालतू कुत्तों के साथ-साथ आवारा और पुलिस के कुत्तों की भी पूजा की जाती है. कुकुर तिहार नेपाल के पांच दिन चलने वाले त्योहार तिहार का हिस्सा है. साल 2026 में यह त्योहार 8 नवंबर को मनाए जाएगा.
कुत्तों को क्यों पूजते हैं?
हिंदू मान्यता के अनुसार, कुत्ते को यमराज का संदेशवाहक माना जाता है. यह भी माना जाता है कि कुत्ते परलोक के दरवाजे की रक्षा करते हैं. इसलिए इस दिन उनकी पूजा करके उनके प्रति प्यार और आभार जताया जाता है. महाभारत की एक कहानी भी इस त्योहार से जुड़ी है. मान्यता है कि युधिष्ठिर स्वर्ग जाते समय एक कुत्ते को अपने साथ ले गए थे. उन्होंने उस कुत्ते को छोड़कर स्वर्ग में जाने से इनकार कर दिया था. यह कहानी वफादारी और दया का संदेश देती है.
फूलों की माला और खास खाना
इस दिन लोग सुबह अपने कुत्तों को नहलाते हैं. फिर उनके गले में गेंदे के फूलों की माला पहनाते हैं और माथे पर लाल टीका लगाते हैं. इसके बाद उन्हें मिठाई, दूध, चावल और मांस जैसे खास पकवान खिलाए जाते हैं. आवारा कुत्तों को भी खाना दिया जाता है और उनकी देखभाल की जाती है.
पुलिस के कुत्तों का भी सम्मान
कुकुर तिहार में पुलिस और बचाव कार्यों में मदद करने वाले कुत्तों को भी सम्मान दिया जाता है. नेपाल में पुलिस के कुत्तों को विस्फोटक ढूंढने और लोगों को बचाने की ट्रेनिंग दी जाती है. इस दिन उनके काम और लोगों की सुरक्षा में उनके योगदान को याद किया जाता है.
पांच दिन तक चलता है तिहार
तिहार के दौरान कौओं, कुत्तों और गायों की पूजा की जाती है. इसके बाद मां लक्ष्मी की पूजा और भाई-बहन के रिश्ते का त्योहार मनाया जाता है. इन दिनों घरों में दीपक जलाए जाते हैं और फूलों से सजावट की जाती है. अगर आप इस त्योहार में शामिल हों, तो कुत्तों के साथ प्यार से पेश आएं. उन्हें जबरदस्ती न छुएं और केवल ऐसा खाना दें जो उनके लिए सुरक्षित हो. उनके गले में बहुत कसकर माला न बांधें और पटाखों व जलते दीयों को उनसे दूर रखें.