अफ्रीका की नील नदी घाटी में कई जनजातियों रहती हैं. ये सभी जनजातियां सदियों से अपनी परंपराओं को निभा रही हैं. इन जनजातियों के समूह को निलोटिक समुदाय कहा जाता है. ये अपने आध्यात्मिक विश्वासों के आधार पर रीति-रिवाज निभाते आ रहे हैं. इनमें से एक जनजाति है लुओ (Luo). इस जनजाति की परंपराएं बड़ी अजीब हैं.
मूल रूप से कहां के बाशिंदे?
बताया जाता है कि लुओ जनजाति के लोग सूडान से पलायन करके पहुंचे थे. समय के साथ, वे पश्चिमी केन्या, उत्तरी युगांडा और उत्तरी तंजानिया के कुछ हिस्सों में बस गए. यह जनजाति अलग-अलग देशों में जरूर रहती है, लेकिन इनकी सांस्कृतिक पहचान एक समान है. ये सभी लोग समान रीति-रिवाजों का पालन करते हैं. धोलुओ भाषा बोलने वाली ये जनजाति ने पुराने समय से चले आ रहे रीति-रिवाजों का पालन जारी रखा है. दूसरी जनजातियों की तरह लुओ जनजाति के भी जन्म, विवाह और मृत्यु से जुड़े अपने कई रीति-रिवाज हैं. लेकिन उनकी एक परंपरा हैरान कर देने वाली है, जो विधवा महिलाओं से जुड़ी हुई है.
पति के शव के बगल में क्यों सोती हैं महिलाएं?
इस परंपरा के मुताबिक, किसी महिला के पति की मौत के बाद, उसे उसके शव के साथ सोना होता है. इस रिवाज का मकसद विधवा को डराना या परेशान करना कतई नहीं होता है. इसे उस महिला की अपने पति के लिए आखिरी जिम्मेदारी होती है. पति की मौत के बाद पत्नी से उम्मीद की जाती है कि वह उसके शव के बगल में रात गुजारे. इसके पीछे इनका कहना है कि यह रिवाज पति-पत्नी के बीच तब तक संबंध बनाए रखती है, जब तक आत्माएं यह तय नहीं कर लेतीं कि महिला जीवन में आगे बढ़ने के लिए आजाद है.
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सपने में दूसरी शादी की मंजूरी
विधवा महिला के लिए, यह रात अपने दिवंगत पति के प्रति सम्मान होता है. इसके बाद, वह एक सपने का इंतजार करती है. इस सपन को यह समुदाय बेहद गंभीरता से लेता है. अगर महिला के सपने में, पति उससे प्यार करता हुआ दिखता है तो यह माना जाता है कि महिला दूसरी शादी करके अपने जीवन में आगे बढ़ सकती है. माना जाता है कि यह सपना आने के बाद ही विधवा फिर से जीवन शुरू कर सकती है. सपने के बिना, समुदाय के बुजुर्गों को लगता है कि पति की आत्मा ने अभी तक मंजूरी नहीं दी है. हालांकि, ऐसे रीति-रिवाज बाहरी दुनिया को अजीब लग सकते हैं. लेकिन लुओ के लिए, ये प्रथाएं परिवार के सम्मान की रक्षा करती हैं. इसके साथ ही ये लोग मानते हैं कि उस परिवार के लोगों को दिवंगत आत्माएं परेशान नहीं करतीं.
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काम क्या करते हैं ये लोग?
लुओ लोग पारंपरिक रूप से पशुपालन, खेती और मछली पकड़ने का काम करते हैं. मुख्यत: ये लोग विक्टोरिया झील के पास मछली पकड़ते हैं. इनके लिए मवेशी धन और सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता है. जब किसी की शादी होती है तो दूल्हे के परिवार की ओर से दुल्हन के परिवार को वधू मुल्य के रूप में मवेशी दिए जाते हैं. अगर किसी को मुआवजा देना हो तो उसके लिए भी मवेशी यूज होते हैं.
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