JD Vance On Republicans Defeat: अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने 3 नवंबर के मिड-टर्म इलेक्शन में रिपब्लिकन पार्टी की करारी हार के लिए ईरान के साथ जंग, रोजमर्रा के बढ़ते खर्च और ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति से गुस्से को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने दावा किया कि 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन करने वाले कई मतदाताओं ने अपना पाला बदलकर डेमोक्रेट्स का समर्थन करना शुरू कर दिया.
क्यों जीते डेमोक्रेट्स?
‘एक्स’ पर एक पोस्ट में जेडी वेंस ने तर्क दिया कि रिपब्लिकन पार्टी को मिली हार का बड़ा कारण वोटर्स का कम मतदान प्रतिशत नहीं था. इसके बजाय उन्होंने कहा कि कई पारंपरिक रिपब्लिकन समर्थकों ने चुनाव में हिस्सा तो लिया, लेकिन उन्होंने डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को चुना क्योंकि वो सरकार के फैसलों से नाखुश थे.
रिपब्लिकन पार्टी की हार के 4 बड़े कारण
पार्टी के आंतरिक आकलन और राजनीतिक सर्वे के साथ हुई बातचीत का हवाला देते हुए जेडी वेंस ने 4 ऐसे अहम मुद्दों की पहचान की जिनकी वजह से वोटर्स रिपब्लिकन पार्टी से दूर हो गए. अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने लिखा, ‘हमारी हार का कारण युद्ध है,” और उन्होंने इस संघर्ष से हुए राजनीतिक नुकसान को स्वीकार किया.
- ईरान के साथ चल रहा युद्ध.
- बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की बढ़ती लागत.
- ट्रंप के ‘अमेरिका फर्स्ट’ एजेंडे से पीछे हटने की धारणा.
- इजरायल के साथ अमेरिकी सरकार के रिश्तों को लेकर असंतोष.
उन्होंने एक रिपब्लिकन डेटा एनालिस्ट के साथ हुई बातचीत का भी जिक्र किया, जिसने चेतावनी दी थी कि मतदाताओं की भारी भागीदारी का मतलब ये नहीं है कि वो रिपब्लिकन उम्मीदवारों का ही समर्थन कर रहे हैं. विश्लेषक के मुताबिक 2024 में ट्रंप-वेंस टिकट का समर्थन करने वाले कई लोग अब डेमोक्रेट्स को वोट देने के बारे में सोच रहे थे.
वेंस ने कहा कि बाद में आए चुनावी नतीजे ने इस आकलन को सही साबित किया. उन्होंने फ्लोरिडा की मिसाल दी, जहां वोटर्स के बीच रिपब्लिकन पार्टी की स्थिति काफी मजबूत बनी रही. उन्होंने तर्क दिया कि परेशानी मतदान में भागीदारी की नहीं, बल्कि वोटर्स की पसंद में आए बदलाव की थी.
दोनों सदनों पर डेमोक्रेट्स का कब्जा
रिपब्लिकन पार्टी की इस हार ने अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट दोनों पर डेमोक्रेट्स का नियंत्रण स्थापित कर दिया है, जो ट्रंप के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका है. इस नतीजे से डेमोक्रेट्स को प्रशासन के फैसलों की जांच करने, सरकारी अधिकारियों को तलब करने और इमिग्रेशन, आर्थिक प्रबंधन और ईरान संघर्ष जैसे अहम नीतिगत क्षेत्रों की बारीकी से समीक्षा करने की ज्यादा मिल गई है. इन नतीजों के कारण ट्रंप के कार्यकाल के बचे हुए 2 साल राजनीतिक रूप से चैलेंजिंग हो सकते हैं.